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Chandigarh News: विधानसभा चुनाव से पहले शिअद ने दिए गठबंधन के संकेत

Mon, 19 Jan 2026 08:37 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jan 2026 08:37 PM IST
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The Shiromani Akali Dal has given indications of an alliance ahead of the assembly elections.
-पार्टी के मुद्दों पर कांग्रेस को छोड़कर कोई दल साथ आना चाहे तो तैयार हैं: शिअद -पहले प्रदेश में बसपा और भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ चुकी है पार्टी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने एक बार फिर गठबंधन के संकेत देकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। शिअद ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस को छोड़कर यदि कोई राष्ट्रीय पार्टी उसके मुद्दों से सहमत होती है तो वह चुनावी गठबंधन के लिए तैयार है। हालांकि, भाजपा का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया लेकिन बयान को शिअद-भाजपा संभावित गठबंधन से जोड़कर देखा जा रहा है।
शिअद के मुख्य प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल पंजाब और पंजाबियों से जुड़े मूल मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस को छोड़कर जो भी राष्ट्रीय पार्टी इन मुद्दों से इत्तेफाक रखेगी, उसका शिअद खुले दिल से स्वागत करेगा। कलेर के इस बयान को चुनाव से पहले गठबंधन की संभावनाओं की औपचारिक पेशकश माना जा रहा है।
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भाजपा के साथ रहा है पुराना गठबंधन
शिरोमणि अकाली दल लंबे समय तक भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ता रहा है। इसके अलावा शिअद ने 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ भी गठबंधन किया था। हालांकि यह गठबंधन बाद में टूट गया। अब पार्टी की रणनीति 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव गठबंधन के तहत लड़ने की दिख रही है, ताकि सत्ता में वापसी की संभावनाएं मजबूत की जा सकें।
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हरसिमरत बादल भी कर चुकी हैं पैरवी
शिअद की सांसद हरसिमरत कौर बादल पहले ही सार्वजनिक रूप से भाजपा के साथ गठबंधन की पैरवी कर चुकी हैं। अब पार्टी प्रवक्ता के बयान से यह संकेत और मजबूत हो गया है कि शिअद चुनाव से पहले किसी बड़े राष्ट्रीय दल के साथ तालमेल की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
भाजपा में मतभेद
भाजपा में इस मुद्दे पर स्पष्ट मतभेद नजर आ रहे हैं। पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ और भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह यह कह चुके हैं कि शिअद के साथ मिलकर चुनाव लड़ना भाजपा की जीत की संभावनाओं को बढ़ा सकता है। वहीं, भाजपा के कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष अश्वनी शर्मा, केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू और महासचिव अनिल सरीन जैसे नेता अगला चुनाव अकेले लड़ने की वकालत कर रहे हैं।

अंतिम फैसला हाईकमान के हाथ
भाजपा में चल रहे मतभेदों के बीच अब सबकी निगाहें केंद्रीय नेतृत्व पर टिकी हैं। गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला भाजपा हाईकमान को लेना है, जबकि शिरोमणि अकाली दल ने अपने रुख से साफ कर दिया है कि वह गठबंधन के लिए पूरी तरह तैयार है।
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