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Chandigarh News: पंजाब में 5270 करोड़ का स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट अधर में लटका
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-केंद्र की आरडीएस योजना के तहत पंजाब में 87.85 लाख खपतकारों को स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य
-- -
रिंपी गुप्ता
पटियाला। पंजाब में 5270.88 करोड़ रुपये का स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है। केंद्र की रीवेंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर (आरडीएस) स्कीम के तहत यह परियोजना जनवरी 2021 में लांच की गई थी। लेकिन पांच साल बीत जाने के बावजूद सूबे में केवल 23 फीसदी खपतकारों के ही स्मार्ट मीटर लगाए जा सके हैं। लगाए गए स्मार्ट मीटरों में से करीब 15 फीसदी कार्यरत नहीं हैं और ये बिजली खपत का डाटा देने में असमर्थ हैं। इससे संबंधित खपतकारों का बिल भी समय पर नहीं भेजा जा पा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक पंजाब में कुल 20,13,744 स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
लगाए गए स्मार्ट मीटरों की स्थिति
सिंगल फेज: 17,40,711
थ्री फेज: 2,63,192
अन्य: 9,841
जोनवार स्थिति
बार्डर जोन: 3,35,384
सेंट्रल जोन: 3,07,281
नॉर्थ जोन: 3,87,991
साउथ जोन: 5,66,975
वेस्ट जोन: 4,16,113
किसान संगठनों का विरोध
कुल लगाए मीटरों में से केवल 17,14,804 मीटर डाटा दे पा रहे हैं जबकि 2,98,940 मीटर काम नहीं कर रहे। यह लगभग 15 फीसदी की खामी दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बार्डर जोन में खासकर गुरदासपुर, अमृतसर और तरनतारन जिलों में किसानों और आम जनता के विरोध के कारण स्मार्ट मीटर लगाने में कठिनाई आ रही है। पीएसईबीए इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव अजयपाल सिंह अटवाल ने बताया कि लोग इस प्रोजेक्ट को बिजली संशोधन बिल से जोड़कर देख रहे हैं। इससे सरकार के प्रति विश्वास कम हो गया है। उन्होंने कहा कि कुल लागत 11,000 करोड़ रुपये से अधिक आ सकती है, जिससे खपतकारों पर वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
प्रोजेक्ट का उद्देश्य और विशेषताएं
-बिजली चोरी रोकना: पावरकाम को सालाना 2500-2600 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा।
-रियल-टाइम डाटा: उपभोक्ता अपनी ऊर्जा खपत नियंत्रित कर सकते हैं।
-ऑनलाइन बिलिंग व रिचार्ज: पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी।
-ड्यूल टेक्नोलॉजी: मीटर प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों मोड में काम कर सकते हैं।
मार्च 2028 तक लंबित
पहले दिसंबर 2025 तक पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट अब मार्च 2028 तक लंबित कर दिया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर छोटे क्षेत्रों में शुरुआत करने की सलाह विशेषज्ञों ने दी थी। पांच साल बाद भी पंजाब में स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट अपनी गति पकड़ नहीं पाया है। तकनीकी खामियां, किसान संगठनों का विरोध और लोगों का विश्वास न बन पाना इस अधूरी परियोजना की मुख्य चुनौतियां हैं।
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रिंपी गुप्ता
पटियाला। पंजाब में 5270.88 करोड़ रुपये का स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है। केंद्र की रीवेंप्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर (आरडीएस) स्कीम के तहत यह परियोजना जनवरी 2021 में लांच की गई थी। लेकिन पांच साल बीत जाने के बावजूद सूबे में केवल 23 फीसदी खपतकारों के ही स्मार्ट मीटर लगाए जा सके हैं। लगाए गए स्मार्ट मीटरों में से करीब 15 फीसदी कार्यरत नहीं हैं और ये बिजली खपत का डाटा देने में असमर्थ हैं। इससे संबंधित खपतकारों का बिल भी समय पर नहीं भेजा जा पा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक पंजाब में कुल 20,13,744 स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
लगाए गए स्मार्ट मीटरों की स्थिति
सिंगल फेज: 17,40,711
थ्री फेज: 2,63,192
अन्य: 9,841
जोनवार स्थिति
बार्डर जोन: 3,35,384
सेंट्रल जोन: 3,07,281
नॉर्थ जोन: 3,87,991
साउथ जोन: 5,66,975
वेस्ट जोन: 4,16,113
किसान संगठनों का विरोध
कुल लगाए मीटरों में से केवल 17,14,804 मीटर डाटा दे पा रहे हैं जबकि 2,98,940 मीटर काम नहीं कर रहे। यह लगभग 15 फीसदी की खामी दर्शाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बार्डर जोन में खासकर गुरदासपुर, अमृतसर और तरनतारन जिलों में किसानों और आम जनता के विरोध के कारण स्मार्ट मीटर लगाने में कठिनाई आ रही है। पीएसईबीए इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव अजयपाल सिंह अटवाल ने बताया कि लोग इस प्रोजेक्ट को बिजली संशोधन बिल से जोड़कर देख रहे हैं। इससे सरकार के प्रति विश्वास कम हो गया है। उन्होंने कहा कि कुल लागत 11,000 करोड़ रुपये से अधिक आ सकती है, जिससे खपतकारों पर वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
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प्रोजेक्ट का उद्देश्य और विशेषताएं
-बिजली चोरी रोकना: पावरकाम को सालाना 2500-2600 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा।
-रियल-टाइम डाटा: उपभोक्ता अपनी ऊर्जा खपत नियंत्रित कर सकते हैं।
-ऑनलाइन बिलिंग व रिचार्ज: पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी।
-ड्यूल टेक्नोलॉजी: मीटर प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों मोड में काम कर सकते हैं।
मार्च 2028 तक लंबित
पहले दिसंबर 2025 तक पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट अब मार्च 2028 तक लंबित कर दिया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर छोटे क्षेत्रों में शुरुआत करने की सलाह विशेषज्ञों ने दी थी। पांच साल बाद भी पंजाब में स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट अपनी गति पकड़ नहीं पाया है। तकनीकी खामियां, किसान संगठनों का विरोध और लोगों का विश्वास न बन पाना इस अधूरी परियोजना की मुख्य चुनौतियां हैं।
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