आईएएस अशोक खेमका के बेटे से दक्षिण अफ्रीका में लूट, क्लेम नहीं देने पर कंपनी पर जुर्माना
हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका के बेटे श्रीनाथ खेमका के साथ दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में 15 जून 2019 को लूट हो गई। 5-6 युवकों ने श्रीनाथ खेमका पर हमला कर उनसे पर्स, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, मोबाइल, घड़ी समेत अन्य सामान लूट लिया। विदेश यात्रा पर वह एक पॉलिसी करवाकर गए थे लेकिन कंपनी ने क्लेम देने से मना कर दिया। उपभोक्ता फोरम में शिकायत के बाद फोरम ने कंपनी को दोषी पाया और जुर्माना लगाया है।
सेक्टर-19 में रहने वाले श्रीनाथ खेमका ने उपभोक्ता फोरम में गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड के खिलाफ शिकायत दायर की थी। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने 11 जून 2019 को दक्षिण अफ्रीका के टूर के लिए ‘डिजिट ऑन द मूव पॉलिसी’ खरीदी। इस पॉलिसी के तहत अगर उन्हें आपात स्थिति में पैसों की जरूरत पड़ती है तो कंपनी की तरफ से उन्हें पैसे मुहैया कराए जाएंगे। इसके अलावा सामान, पैसों आदि की चोरी की स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जाएगी।
पॉलिसी खरीदने के बाद 14 जून को शिकायतकर्ता दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना हुए। अगले दिन 15 जून की सुबह जोहान्सबर्ग में उन पर 5-6 युवकों ने हमला कर दिया और पर्स, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मोबाइल फोन और घड़ी समेत सारा सामान लूट लिया। लूटे गए सामानों की कीमत करीब 54 हजार रुपये थी।
इसके बाद शिकायतकर्ता तुरंत पास के पुलिस स्टेशन पहुंचे और इस घटना की शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में पुलिस की तरफ जांच की गई। उसी दिन शिकायतकर्ता की तरफ से कंपनी को पॉलिसी के तहत भरपाई (रिंबर्समेंट) के लिए एक ई-मेल भेजा गया लेकिन कंपनी ने क्लेम देने से साफ मना कर दिया। इसके बाद चंडीगढ़ पहुंचने पर शिकायतकर्ता ने गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में केस दायर किया। फोरम ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कंपनी को सेवा में कोताही का दोषी पाया।
फोरम ने दिए यह आदेश
आदेश दिए कि गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड कंपनी 15 जून 2019 के दिन डॉलर के भारतीय करेंसी की कीमत के तहत रोजाना ड़ॉलर का डेली अलाउंस 9 प्रतिशत ब्याज के साथ शिकायतकर्ता को अदा करें। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न झेलने के लिए शिकायतकर्ता को 10 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में भी 5 हजार रुपये देने के आदेश दिए। इन सभी आदेशों की पालना 30 दिनों के अंदर करनी होगी।