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Chandigarh News: पंजाब की अदालतों में इंसाफ की रफ्तार सुस्त
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-55% मामले एक साल से अधिक पुराने, दीवानी मुकदमों में देरी ज्यादा
-नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड की रिपोर्ट से खुलासा
-कुल 9.05 लाख लंबित मामलों में से 20% तीन साल से ज्यादा पुराने
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब की जिला अदालतों में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे न्याय व्यवस्था पर गंभीर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य की अदालतों में लंबित 9,05,312 मामलों में से 55.85 प्रतिशत यानी 5,05,577 मामले ऐसे हैं, जो एक वर्ष से अधिक समय से फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह स्थिति न्याय में देरी की गंभीर तस्वीर पेश करती है।
लंबित मामलों में 5,50,679 आपराधिक और 3,54,633 दीवानी मामले शामिल हैं। आपराधिक मामलों में 53.01 प्रतिशत (2,91,905) एक साल से अधिक पुराने हैं, जबकि दीवानी मामलों में देरी का अनुपात और भी ज्यादा है। 60.25 प्रतिशत दीवानी मामले यानी 2,13,672 मुकदमे एक वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। इससे साफ है कि दीवानी न्याय प्रणाली पर दबाव अपेक्षाकृत अधिक है।
पुराने मामलों का भारी बोझ
कुल लंबित मामलों में 44 प्रतिशत मुकदमे एक साल से कम पुराने हैं, जबकि 36 प्रतिशत मामले एक से तीन वर्ष और 20 प्रतिशत मामले तीन वर्ष से अधिक समय से अदालतों में अटके हुए हैं। तीन से पांच वर्ष पुराने मामले कुल लंबित मुकदमों का 13 प्रतिशत, जबकि 5 से 10 वर्ष तक लंबित मामलों की हिस्सेदारी 7 प्रतिशत है। एक वर्ष से कम अवधि वाले मामलों में 65 प्रतिशत और एक से तीन वर्ष की श्रेणी में 58 प्रतिशत मामले आपराधिक प्रकृति के हैं।
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निस्तारण के बावजूद नहीं घट रहा बोझ
बीते एक माह के दौरान अदालतों में 69,105 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 74,410 मामलों का निस्तारण भी किया गया। इसके बावजूद वर्षों पुराने मामलों की अधिक संख्या के कारण कुल लंबित मामलों में अपेक्षित कमी नहीं आ पा रही है। एनजेडीजी के अनुसार मामलों में देरी के पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। वकीलों की अनुपस्थिति के चलते 62,464 मामले लंबित हैं। इसके अलावा गवाहों से जुड़ी दिक्कतों के कारण 28,675, दस्तावेजों की प्रतीक्षा में 15,446, आरोपी के फरार होने से 5,875 और उच्च अदालतों से स्थगन के कारण 2,253 मामले अटके हुए हैं। अन्य कारणों से 28,910 मामले लंबित हैं।
महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के मामले भी फंसे
लंबित मामलों में 97,296 मुकदमे महिलाओं द्वारा दायर हैं, जबकि 88,813 मामलों में वरिष्ठ नागरिक पक्षकार हैं। प्राथमिकता के प्रावधान के बावजूद, ट्रायल के दबाव में ये मामले भी लंबे समय तक अटके रहते हैं। हालांकि, प्री-लिटिगेशन और प्री-ट्रायल चरण में निस्तारण अपेक्षाकृत तेज है, जहां केवल 19.85 प्रतिशत मामले ही एक वर्ष से अधिक समय तक लंबित हैं।
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-नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड की रिपोर्ट से खुलासा
-कुल 9.05 लाख लंबित मामलों में से 20% तीन साल से ज्यादा पुराने
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब की जिला अदालतों में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे न्याय व्यवस्था पर गंभीर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) के ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य की अदालतों में लंबित 9,05,312 मामलों में से 55.85 प्रतिशत यानी 5,05,577 मामले ऐसे हैं, जो एक वर्ष से अधिक समय से फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह स्थिति न्याय में देरी की गंभीर तस्वीर पेश करती है।
लंबित मामलों में 5,50,679 आपराधिक और 3,54,633 दीवानी मामले शामिल हैं। आपराधिक मामलों में 53.01 प्रतिशत (2,91,905) एक साल से अधिक पुराने हैं, जबकि दीवानी मामलों में देरी का अनुपात और भी ज्यादा है। 60.25 प्रतिशत दीवानी मामले यानी 2,13,672 मुकदमे एक वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। इससे साफ है कि दीवानी न्याय प्रणाली पर दबाव अपेक्षाकृत अधिक है।
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पुराने मामलों का भारी बोझ
कुल लंबित मामलों में 44 प्रतिशत मुकदमे एक साल से कम पुराने हैं, जबकि 36 प्रतिशत मामले एक से तीन वर्ष और 20 प्रतिशत मामले तीन वर्ष से अधिक समय से अदालतों में अटके हुए हैं। तीन से पांच वर्ष पुराने मामले कुल लंबित मुकदमों का 13 प्रतिशत, जबकि 5 से 10 वर्ष तक लंबित मामलों की हिस्सेदारी 7 प्रतिशत है। एक वर्ष से कम अवधि वाले मामलों में 65 प्रतिशत और एक से तीन वर्ष की श्रेणी में 58 प्रतिशत मामले आपराधिक प्रकृति के हैं।
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निस्तारण के बावजूद नहीं घट रहा बोझ
बीते एक माह के दौरान अदालतों में 69,105 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 74,410 मामलों का निस्तारण भी किया गया। इसके बावजूद वर्षों पुराने मामलों की अधिक संख्या के कारण कुल लंबित मामलों में अपेक्षित कमी नहीं आ पा रही है। एनजेडीजी के अनुसार मामलों में देरी के पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। वकीलों की अनुपस्थिति के चलते 62,464 मामले लंबित हैं। इसके अलावा गवाहों से जुड़ी दिक्कतों के कारण 28,675, दस्तावेजों की प्रतीक्षा में 15,446, आरोपी के फरार होने से 5,875 और उच्च अदालतों से स्थगन के कारण 2,253 मामले अटके हुए हैं। अन्य कारणों से 28,910 मामले लंबित हैं।
महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के मामले भी फंसे
लंबित मामलों में 97,296 मुकदमे महिलाओं द्वारा दायर हैं, जबकि 88,813 मामलों में वरिष्ठ नागरिक पक्षकार हैं। प्राथमिकता के प्रावधान के बावजूद, ट्रायल के दबाव में ये मामले भी लंबे समय तक अटके रहते हैं। हालांकि, प्री-लिटिगेशन और प्री-ट्रायल चरण में निस्तारण अपेक्षाकृत तेज है, जहां केवल 19.85 प्रतिशत मामले ही एक वर्ष से अधिक समय तक लंबित हैं।