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Chandigarh News: नगर निगम को नहीं परवाह... खंडहर सरकारी मकान में कर्मचारी जीने के लिए लाचार

Thu, 25 Dec 2025 11:38 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 25 Dec 2025 11:38 PM IST
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The Municipal Corporation doesn't care... employees forced to live in dilapidated government housing
चंडीगढ़। टूटी खिड़कियां... जर्जर हो चुके चिड़िया दरवाजे और जगह-जगह उखड़े हुए ढांचे। यह है सेक्टर-20सी में नगर निगम कर्मचारियों के लिए बनी आवासीय कॉलोनी की बदहाली। यहां के खाली पड़े मकानों के अंदर तक पीपल के पेड़ों के तने घुस चुके हैं और कभी भी दीवारों को तोड़ सकते हैं। कॉलोनी में 74 आवास थे। इनमें से 28 या तो खाली हैं या जर्जर हैं। 46 में लोग रह रहे है। इनमें रहना मौत को दावत देना जैसा है। कई कर्मचारियों ने डर के मारे मकान छोड़ दिया तो कई मजबूरी में अभी रह रहे हैं। उनका कहना है कि यह लोकेशन शानदार है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए दिन काट रहे हैं। इनमें ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर मकान के अलावा सिंगल स्टोरी और डबल स्टोरी शामिल हैं।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि छतें कमजोर हो चुकी हैं और कभी भी गिर सकती हैं। बारिश के दिनों में मकानों की हालत और भी खराब हो जाती है, जब घर का हर कोना टपकने लगता है। दीवारों में दरारें और सीलन आम समस्या बन चुकी है। कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इन मकानों की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए ताकि किसी अप्रिय घटना से पहले उन्हें सुरक्षित आवास मिल सके। नगर निगम की तरफ से इन्हें बनाने के लिए करीब 3.50 करोड़ रुपये का बजट हाउस से पास कर दिया गया है। इसको करीब एक साल से ज्यादा समय हो गया उसके बाद भी काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
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मकानों के अंदर पेड़ निकलने लगे

यहां बने मकानों अंदर पेड़ निकलने लगे हैं। स्थिति यह है कि फ्लैट के अंदर बने किचन और बाथरूम के अंदर तक पीपल के पेड़ के तने निकल आए हैं। पूरी तरह से यह खराब हो चुके हैं। कभी भी यह गिर सकते हैं।
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क्या कहते हैं यहां के बाशिंदे
भवन की हालत जर्जर

कई सालों से मरम्मत कार्य नहीं हुआ है। भवन की हालत काफी जर्जर है। पहले शिकायत करने के लिए अलग सेंटर था, अब वह भी नहीं है। - भुवनेश सप्रा
बारिश में छत टपकती है

बारिश में बहुत ज्यादा समस्या आती है। छत टपकती है। आवास बहुत ज्यादा जर्जर हो गए है। पीपल के पेड़ निकल आए हैं। - रानी
यहां रहना दूभर हो रहा

सालों से मरम्मत का काम नहीं हुआ है। यहां रहना दूभर होते जा रहा है। इसको ठीक कराने की जरूरत है। रहने में बहुत परेशानी आती है। - आशा देवी
घर की हालत बेहद खराब

घरों की हालत बहुत ज्यादा खराब है। दीमक बहुत है। जो मकान खाली है, उसमें पेड़ की जड़ें अंदर तक चली गई है। - गीता


फाइल कहां रुकी है , इसकी जांच की जाएगी। पहले बजट का अभाव था हो सकता उसकी वजह से काम टेंडर न हुआ हो। इस प्रोजेक्ट की पूरी डिटेल मंगाने के बाद जल्द ही टेंडर जारी करा कर काम कराया जाएगा। -सीबी ओझा, चीफ इंजीनियर, नगर निगम
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