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Chandigarh News: नाटक का संदेश है कि गलत रास्ता पकड़ोगे तो मंजिल सही नहीं हो सकती।
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चंडीगढ़। सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में सुचेतक रंग मंच की ओर से नाटक सुखी बसै मसकीनिया का मंचन हुआ। पांच दिवसीय 22 वां गुरशरण सिंह नाटय उत्सव के चौथे दिन इसका मंचन हुआ। रमन ढिल्लों के निर्देशन में स्टेज टू स्क्रीन क्लब के कलाकारों अभिनय किया। नाटक में तीन पीढ़ियों की कहानी दिखाई गई है। इसमें माता पिता, बेटा बहू और पोता की कहानी है।
नाटक की खासियत है कि माता पिता का किरदार निभाने वाले रमन ढिल्लों और जसबीर ढिल्लों दोनों असल जिंदगी में पति-पत्नी हैं। पति-पत्नी की भूमिका निभाने वाले गैरी बड़ैच और सुमनदीप बड़ैच असल जिंदगी में पति-पत्नी हैं।
इसमें दिखाया कि किस प्रकार बेटे ने पिता की बात नहीं मानी। उसे रुतबा, नाम और राजनीति में नाम चाहिए थ। वह भ्रष्टाचार का हिस्सा बन गया। वह मां को कहता है कि यह सब कहने की बात है कि विनम्र व्यक्ति को सुखी होते नहीं देखे। इस पर अमल करने लग जाऊं तो झोपड़ी में चला जाऊं। पिता ने जिंदगी भर नौकरी की पर दो कमरे का घर नहीं बना सके।
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नाटक एक जैकेट के इर्द-गिर्द घूमता है। यह वर्ष 1980 के दशक की कहानी है। बेटा तस्करी करने लगता है। दूसरे देश से माल छिपाकर सस्ते में लाता है और महंगे में बेचकर धन कमाता है। नाटक में इसी को लेकर पिता पुत्र में नोक-झोंक होती है। फिर खबर आती है कि पोते को पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया है। इस पर पिता अपने बेटे को बोलता है कि जो तुमने बोया उसे काटना पड़ा है। नाटक का संदेश है कि गलत रास्ता पकड़ोगे तो मंजिल सही नहीं हो सकती।
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नाटक की खासियत है कि माता पिता का किरदार निभाने वाले रमन ढिल्लों और जसबीर ढिल्लों दोनों असल जिंदगी में पति-पत्नी हैं। पति-पत्नी की भूमिका निभाने वाले गैरी बड़ैच और सुमनदीप बड़ैच असल जिंदगी में पति-पत्नी हैं।
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इसमें दिखाया कि किस प्रकार बेटे ने पिता की बात नहीं मानी। उसे रुतबा, नाम और राजनीति में नाम चाहिए थ। वह भ्रष्टाचार का हिस्सा बन गया। वह मां को कहता है कि यह सब कहने की बात है कि विनम्र व्यक्ति को सुखी होते नहीं देखे। इस पर अमल करने लग जाऊं तो झोपड़ी में चला जाऊं। पिता ने जिंदगी भर नौकरी की पर दो कमरे का घर नहीं बना सके।
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नाटक एक जैकेट के इर्द-गिर्द घूमता है। यह वर्ष 1980 के दशक की कहानी है। बेटा तस्करी करने लगता है। दूसरे देश से माल छिपाकर सस्ते में लाता है और महंगे में बेचकर धन कमाता है। नाटक में इसी को लेकर पिता पुत्र में नोक-झोंक होती है। फिर खबर आती है कि पोते को पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया है। इस पर पिता अपने बेटे को बोलता है कि जो तुमने बोया उसे काटना पड़ा है। नाटक का संदेश है कि गलत रास्ता पकड़ोगे तो मंजिल सही नहीं हो सकती।