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Chandigarh News: सितार की धुनों और खूबसूरत ओडिसी नृत्य के रंग ने दर्शकों को रोमांचित किया

Sat, 14 Mar 2026 01:40 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 14 Mar 2026 01:40 AM IST
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The melodies of the sitar and the beautiful Odissi dance enthralled the audience.
चंडीगढ़। टैगोर थिएटर में आयोजित किए जा रहे 55 वें अखिल भारतीय भास्कर राव नृत्य एवं संगीत सम्मेलन के दूसरे दिन शास्त्रीय संगीत और नृत्य ने दर्शकों आखिर तक बांधे रखा। कार्यक्रम में सितार वादक पंडित पूर्वायन चटर्जी की सितार वादन प्रस्तुति तथा नृत्यांगना एवं कोरियोग्राफर विदुषी शर्मिला बिस्वास एवं उनके दल द्वारा शानदार प्रस्तुति दी गई।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. शशि प्रताप शाही, कुलपति, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया रहे। इस अवसर पर केंद्र के अध्यक्ष एसके मोंगा, रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर तथा सचिव सजल कौसर मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे।
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संगीत संध्या का शुभारंभ पंडित पूर्वायन चटर्जी की सितार वादन प्रस्तुति से हुआ। पंडित चटर्जी भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्व के विभिन्न संगीत रूपों से जोड़ने के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। उन्होंने अपने कई अंतरराष्ट्रीय एल्बमों और विश्व के प्रतिष्ठित कलाकारों के साथ सहयोग के माध्यम से वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान बनाई है।
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उन्होंने अपने वादन की शुरुआत राग पूरिया धनाश्री से की, जिसमें राग की गहनता और सूक्ष्मताओं को अत्यंत निपुणता के साथ प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने राग हमीर की जीवंत प्रस्तुति दी, जिसमें उनकी राग विस्तार और लयकारी पर अद्भुत पकड़ देखने को मिली। अंत में उन्होंने ठुमरी प्रस्तुत की।

इसके बाद विदुषी शर्मिला बिस्वास ने अपने दल के साथ मंच संभालते हुए ओडिसी नृत्य नाटिका पगडंडी प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति की शुरुआत ऊर्जा और उल्लास से भरपूर नृत्य से हुई। प्रस्तुति का एक महत्वपूर्ण अंश विलासिनी ए वुमन रोमांसिंग विद लाइफ था, जो ओडिशा की मंदिर नर्तकियों को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि थी। इसमें एक वृद्ध, सेवानिवृत्त नर्तकी की भावनात्मक यात्रा को दर्शाया गया, जो अपने अतीत की स्मृतियों और यौवन की गरिमा को फिर से अनुभव करती है। नृत्य के माध्यम से वह भक्ति, सौंदर्य और कला के उस स्वर्णिम युग को पुनर्जीवित करती है और दर्शकों को अपनी स्मृतियों की पवित्र दुनिया में आमंत्रित करती है।




इसके अलावा मूर्छना वाद्य नामक एक और जीवंत प्रस्तुति में ओडिशा में लोक परंपराओं को दिखाया गया। इसमें विशेष रूप से मृदंग की शक्तिशाली तालों को केंद्र में रखा गया, जो ओडिशा के ग्रामीण जीवन और अनुष्ठानों की धड़कन मानी जाती है। इस रचना की कोरियोग्राफी में इन सशक्त लयों को गतिशील नृत्य मुद्राओं के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
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