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Chandigarh News: घायल को पीजीआई पहुंचाया, मदद करने की बजाय सुरक्षाकर्मी बोले- इससे बढ़िया होता सड़क पर ही पड़े रहने देता

Tue, 01 Oct 2024 06:19 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 01 Oct 2024 06:19 AM IST
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The injured was taken to PGI, instead of helping him the security personnel said- it would have been better if he had let him lie on the road
चंडीगढ़। सड़क हादसे में किसी घायल को अस्पताल पहुंचाने पर कई राज्य सरकारें मददगार को सम्मानित करती है लेकिन चंडीगढ़ में उल्टा हो रहा है। रविवार को डड्डूमाजरा में एक हादसा हो गया। घायल को पति-पत्नी अपनी गाड़ी में पीजीआई ले गए। वहां उन्हीं को परेशान किया गया। कई सवाल पूछे गए। दंपति ने कहा कि घायल का अच्छे से इलाज भी नहीं किया और उन्हीं पर दबाव बनाने लगे कि घायल को किसी दूसरे अस्पताल में ले जाएं। सुरक्षा कर्मियों ने यहां तक कह दिया कि...इससे बढ़िया होता, सड़क पर ही पड़े रहने देता।
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शहर में रहने वाले सन्नी अपनी पत्नी संग रविवार शाम साढ़े सात बजे अपने घर की ओर जा रहे थे जब डड्डूमाजरा टी प्वाइंट पर उन्होंने दो बाइक सवारों का एक्सीडेंट हुए देखा। सन्नी एक जख्मी व्यक्ति को अपनी गाड़ी में पीजीआई के लिए रवाना हुए और पुलिस को दूसरे जख्मी व्यक्ति की जानकारी दी। 15 मिनट में पीजीआई लेकर पहुंच गए। घायल व्यक्ति को पहुंचाने के बाद वह वहां से जाने लगे तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें इंतजार करने के लिए कहा और उनसे उनका नाम और पता जानकारी ली। इतने में दो डॉक्टर आए, मरीज को देखा और कहा ठीक हो जाएगा, एडमिट करने की जरूरत नहीं। सन्नी वहां से जाने लगे तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें मरीज को अन्य अस्पताल में ले जाने के लिए कहा। सन्नी ने कहा कि उन्होंने सड़क पर पड़े व्यक्ति की मदद की है। अब इनके परिजन को जानकारी दें ताकि वो इनकी देखभाल कर सकें। लेकिन सुरक्षाकर्मी इकट्ठे हो गए और मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने का दबाव बनाने लगे। सन्नी ने बताया कि बहस के दौरान एक सुरक्षाकर्मी बोला कि इससे बढि़या होता कि इसे सड़क पर ही पड़ा रहने देता। इसे 16 या 32 के अस्पताल में ले जाओ, हम यहां नहीं देखेंगे। यहां तक कह दिया कि अब उन्हें मरीज की जिम्मेदारी लेनी होगी। यह चाहे मरे या बचे तेरी जिम्मेदारी। सन्नी ने बताया कि रविवार को उन्हें ऐसा लगा जैसे किसी की मदद करके उन्होंने गलती कर दी है। अगर ऐसे किसी मददगार के साथ बर्ताव होगा तो कैसे कोई मदद करेगा। अगली बार सड़क हादसे में किसी की मदद करने को लेकर दो बार सोचना पड़ेगा।
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पीजीआई ने ''गुड सेमेरिटन'' दिशानिर्देशों का नहीं किया पालन
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार पिछले 10 सालों में 13 लाख लोगों की मौत सड़क हादसे के कारण हुई है। इनमें से आधे लोगों की जान बच सकती थी अगर मरीज को समय पर अस्पताल ले जाया जाता। चार में से तीन लोग सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाने से झिझकते हैं। घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जा रहे व्यक्ति का पुलिस, अस्पताल या किसी भी कानूनी तरीके से शोषण न हो इसलिए मंत्रालय ने सेमेरिटन दिशानिर्देश जारी किए हैं। सेमेरिटन मतलब नेकदिल इंसान जो सड़क हादसे में घायल अनजान व्यक्ति को बिना किसी अपेक्षा के उसे अस्पताल ले जाए। यह कहते हैं सेमेरिटन
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दिशानिर्देश -
- मरीज को अस्पताल ले जा रहे सेमेरिट की जिम्मेदारी सिर्फ उसे अस्पताल पहुंचाने तक की है।
- अस्पताल सेमेरिटन से उसकी निजी जानकारी नहीं ले सकता।
- अस्पताल सेमेरिटन को एक निश्चित फॉर्मेट में उसे घटना की एक्नॉलेजमेंट देगा।
पीजीआई में इन तीनों में से किसी भी दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया। घायल को अस्पताल पहुंचाने के बाद सुरक्षाकर्मियों ने सेमेरिटन को वहां रोके रखा, उनसे उनकी निजी जानकारी ली और जबरदस्ती घायल व्यक्ति की जिम्मेदारी लेने का दबाव बनाया।


बॉक्स -
अस्पताल पहुंचाने वालों को पंजाब करता है सम्मानित, यहां स्थिति उलट
पंजाब में फरिशते स्कीम के तहत अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों को सम्मानित किया जाता है लेकिन यहां स्थिति उलट है। घायलों को भी मुफ्त इलाज दिया जाता है। घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले 16 फरिश्तों को पंजाब सरकार की तरफ से 15 अगस्त के मौके पर सम्मानित किया गया था। उन्हें प्रशंसा पत्र और 2000 रुपये का नकद इनाम भी दिया गया। पंजाब सरकार ने यहां तक नियम बनाया है कि जो घायल को अस्पताल पहुंचाएगा, उससे पुलिस द्वारा कोई पूछताछ नहीं की जाएगी।

---कोट---
उचित कार्रवाई के लिए मामले की जांच की जाएगी। - पीजीआई आधिकारिक प्रवक्ता
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