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Chandigarh News: हाईकोर्ट ने दिए एनएचएआई मुआवजा घोटाले की विजिलेंस जांच के आदेश

Thu, 23 Oct 2025 08:39 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Oct 2025 08:39 PM IST
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The High Court granted NHAI compensation. A vigilance investigation was ordered into the scam.
-राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर अधिगृहीत भूमि को कृषि से गैर-कृषि में बदलने का आरोप
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-एनएचएआई से अधिक मुआवजा हासिल किया, सभी अधिकारियों की भमिका की होगी जांच
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में धांधली कर राजकोष को नुकसान पहुंचाने के आरोप पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राजस्व अधिकारियों की भूमिका की विजिलेंस जांच कराने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि राजस्व रिकाॅर्ड में हेराफेरी कर अधिगृहीत भूमि की प्रकृति कृषि से गैर-कृषि में अवैध रूप से बदली गई ताकि एनएचएआई से अधिग्रहण में फर्जी तरीके से अधिक मुआवजा हासिल किया जा सके।

जस्टिस हरकेश मनूजा की एकलपीठ ने आदेश दिया कि मामले में पटवारी से लेकर संबंधित एसडीएम तक सभी जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए और अगली सुनवाई तक विजिलेंस विभाग अपनी रिपोर्ट अदालत में पेश करे। कोर्ट ने कहा कि यह मामला जनता के धन से जुड़ा है इसलिए विस्तृत और निष्पक्ष जांच आवश्यक है। ऐसे अनुचित दावों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
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ऐसे हुआ सारा खेल
मामला अमृतसर जिले के मनावाला गांव की भूमि से जुड़ा है जिसे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के अंतर्गत अधिगृहीत किया गया था। रिकाॅर्ड में बदलाव का खेल धारा 3ए की 21 नवंबर 2020 की अधिसूचना 10 मई-2021 की धारा 3डी अधिसूचना और 6 अगस्त-2021 के अवाॅर्ड जारी होने के बाद कथित रूप से खेला गया। प्रारंभिक रिकाॅर्ड में जमीन गैर-मुमकिन/बंजर बताई गई थी लेकिन शिकायतकर्ता की शिकायत पर खुलासा हुआ कि नोटिफिकेशन के बाद भूमि का दर्जा अवैध तरीके से बदला गया ताकि अधिक रकम प्राप्त की जा सके। जांच में यह तथ्य सामने आया कि राजस्व प्रविष्टियां कृषि भूमि से बदलकर गैर-कृषि/गैर-मुमकिन गोदाम दर्शा दी गईं।
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परियोजना निदेशक ने किया कार्रवाई से इन्कार
कोर्ट ने माना कि डिप्टी कमिश्नर ने जिला कलेक्टर के रूप में सही नीयत से जांच की और हेराफेरी उजागर की लेकिन इसके बावजूद परियोजना निदेशक ने कार्रवाई करने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। कोर्ट ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण और लापरवाही भरा रवैया करार दिया। हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि परियोजना निदेशक जनता के धन के संरक्षक हैं और ऐसे मामलों में आंखें मूंद लेना स्वीकार्य नहीं। अदालत ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता सचमुच गोदामों के अस्तित्व का दावा कर रहे हैं तो वे इसका प्रमाण जैसे बिजली बिल आदि पेश करें। वहीं, राज्य पक्ष भी कोई ऐसा संतोषजनक रिकाॅर्ड या आदेश पेश नहीं कर सका जो भूमि प्रविष्टि बदलने की वैधता सिद्ध कर सके। हाई कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि राजकोष को नुकसान पहुंचाने वाली ऐसी हेराफेरी पर सख्त कार्रवाई तय है और जिम्मेदार राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
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