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हरियाली का दुश्मन.. तने को चपेट में लेकर पेड़ों की सांस उखाड़ रहा सोरोसिस

Sat, 08 Jan 2022 01:54 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sat, 08 Jan 2022 01:54 AM IST
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The enemy of greenery...Psoriasis is uprooting the breath of trees by gripping the trunk
चंडीगढ़। त्वचा शरीर की सबसे बड़ी अंग प्रणाली है। यह अपने नीचे के ऊतकों को हवा, पानी, पदार्थ और बैक्टीरिया से बचाती है। यह चोट के प्रति संवेदनशील है और उसमें अपनी मरम्मत करने की उल्लेखनीय क्षमता है। त्वचा मनुष्य से लेकर जानवर व पेड़ों में भी होती है। पेड़ों की मुख्य त्वचा को छाल कहते हैं जो मुख्य रूप से तने से शुरू होती है और शाखाओं तक जाती है। त्वचा रोग हर प्राणी में होती हैं। उन्हीं में पेड़ भी शामिल हैं। इस समय ट्राइसिटी के कई पेड़ छाल रोग से ग्रसित हैं। इसे सोरोसिस बीमारी करते हैं। यदि चार से पांच साल यह रोग पेड़ पर रह जाता है तो उसका मरना तय है। इस रोग से मरने वाले पेड़ों के आंकड़े सामने नहीं आए हैं, लेकिन वनस्पति विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने इसे हरियाली के बड़ा खतरा माना है। इसका संक्रमण भी एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक पहुंचता है।
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चंडीगढ़ और पंचकूला के कई पेड़ इसकी चपेट में
यह रोग 20 से 25 साल पुराने पेड़ों पर देखा जा रहा है। चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया के कुछ पेड़ों के अलावा पंचकूला के पेड़ों पर भी है। पंचकूला में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के कार्यालय के नजदीक ही कुछ पेड़ सोरोसिस की चपेट में हैं जिन्हें जो भी वहां से गुजरता है तो देखता है। इन पेड़ों की छाल सड़ रही है। छाल जमीन पर भी गिर रही है। त्वचा से चिपचिपा पदार्थ भी निकल रहा है। इसे माना जाता है कि पेड़ की छाल जब सड़ती है तो पेड़ आंसुओं के रूप में यह पदार्थ निकालता है। यह पदार्थ खुद ही उस छाल की मरम्मत के भी काम आता है। लेकिन जब यह रोग पूरे तने पर फैल जाता है तो उसका इलाज संभव नहीं दिखता। पंजाब यूनिवर्सिटी के वनस्पति विज्ञान विभाग के कुछ प्रोफेसर इस पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि जहां भी किसी पेड़ पर सोरोसिस दिखे तो उस हिस्से को किसी चीज से हटा देना चाहिए।
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जड़ के जरिए दूसरे पेड़ तक चला जाता है सोरोसिस
वैज्ञानिकों के मुताबिक त्वचा जब सड़ती है तो तने को नुकसान होता है। बाहरी बैक्टीरिया का आक्रमण होने लगता है। इससे परेशानी बढ़ती चली जाती है। शाखाएं पेड़ की सूखना शुरू होती हैं। नई शाखाएं नहीं आती हैं। पतझड़ में सबसे पहले पत्ते पीले पड़ जाते हैं और गेरुआ रंग के धब्बे भी हो जाते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह रोग जड़ के जरिए भी दूसरे पौधे में चला जाता है। इसलिए जैसे ही यह रोग तने पर दिखे से हटा दें। इसको बढ़ने न दें। वैज्ञानिक कहते हैं कि पहले पेड़ की छाल खुद अपने को बचाती है, लेकिन जब सोरोसिस तेज बढ़ता है तो फिर बेकाबू हो जाता है।
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