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अमृतसरः चंडीगढ़ में युवती को लगी नशे की लत, मां ने बचाने के लिए बेटी को जंजीरों में जकड़ा
Tue, 27 Aug 2019 09:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अशोक नीर, अमृतसर
अशोक नीर, अमृतसर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Tue, 27 Aug 2019 09:42 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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नशे के दलदल में फंसी बेटी को बचाने के लिए एक मां ने उसके पैरों को जंजीरों से जकड़ दिया। बेटी नशे के लिए छटपटाती है, लेकिन बेबस मां जंजीरों को नहीं खोल पाती। अमृतसर की एक कॉलोनी के सामने एक फ्लैट में रहने वाली 25 वर्षीय युवती नशे की आदी हो चुकी है। छह बहनों में सबसे छोटी इस युवती को अब परिवार वाले नशा छुड़ाओ केंद्र से लाई गई दवा को ही नशे की गोली बता कर खिला रहे हैं।
सोमवार को किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस वहां पहुंची और युवती की मां से पूछा कि उसे जंजीरों में बांधकर क्यों रखा है। इस पर पीड़िता ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ाने की भी कोशिश की, पर पांचवीं के बाद उसका मन पढ़ाई में न लगा। उसे जंजीरों में बांधना मजबूरी है, वरना वह किसी भी समय घर से निकल जाती और नशा करके ही लौटती थी। सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थित स्वामी विवेकानंद नशा मुक्ति केंद्र ले गई, पर सरकारी दवा कारगर साबित न हुई।
उसकी नशा करने की इच्छा लगातार बढ़ रही है। वह कोई न कोई बहाना बनाकर घर से बाहर निकल जाती थी। इसके बाद पुलिस ने कहा कि इसे नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल करवा देते हैं, इस पर युवती की मां ने कहा कि उसे सिर्फ दस दिन का समय दिया जाए। वे उसे नशा मुक्ति की दवा खिला रही है। यदि वह ठीक न हुई तो जैसा पुलिस कहेगी, वैसा ही होगा।
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सोमवार को किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस वहां पहुंची और युवती की मां से पूछा कि उसे जंजीरों में बांधकर क्यों रखा है। इस पर पीड़िता ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ाने की भी कोशिश की, पर पांचवीं के बाद उसका मन पढ़ाई में न लगा। उसे जंजीरों में बांधना मजबूरी है, वरना वह किसी भी समय घर से निकल जाती और नशा करके ही लौटती थी। सरकारी मेडिकल कॉलेज स्थित स्वामी विवेकानंद नशा मुक्ति केंद्र ले गई, पर सरकारी दवा कारगर साबित न हुई।
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उसकी नशा करने की इच्छा लगातार बढ़ रही है। वह कोई न कोई बहाना बनाकर घर से बाहर निकल जाती थी। इसके बाद पुलिस ने कहा कि इसे नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल करवा देते हैं, इस पर युवती की मां ने कहा कि उसे सिर्फ दस दिन का समय दिया जाए। वे उसे नशा मुक्ति की दवा खिला रही है। यदि वह ठीक न हुई तो जैसा पुलिस कहेगी, वैसा ही होगा।
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एसएचओ कमलदीप सिंह ने कहा कि युवती का इलाज डी एडिक्शन सेंटर में चल रहा है। आज भी उसकी मां सेंटर से दवा लेकर आई थी। दस दिन का समय दिया है। यदि ठीक न हुई तो पुलिस उसे नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल करवाएगी।
घर से निकली थी परिवार का पेट पालने, बनी नशे की लती
पांचवीं पास यह युवती छह बहनों व एक भाई में सबसे छोटी है। पिता का साया कुछ वर्ष पूर्व सिर से उठ गया था। इसके बाद यह युवती कमाने के लिए घर से निकली। चंडीगढ़ में जॉब मिली। अच्छी खासी कमाई हो जाती थी। युवती की मां के अनुसार वह घर का खर्च चला रही थी, लेकिन बाद में उसने पैसे भेजने बंद कर दिए। हमें लगा शायद चंडीगढ़ में खर्च ज्यादा हो रहा होगा, लेकिन एक रोज जब वह घर आई तो उसकी आंखें लाल थी।
मुझे लगा कि शायद थक गई होगी। उसने हमने कोई बात नहीं की और चुपचाप कमरे में जाकर सो गई। सुबह नौ बजे तक नहीं उठी तो मुझे शक हुआ। यह क्रम कई बार घटित हुआ तो मैंने सख्ती से पूछताछ की। इस पर उसने बताया कि वह हेरोइन का नशा करती है। मां के अनुसार वह लोगों के घरों में काम करती है। नशे की लत ने बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी।
घर से निकली थी परिवार का पेट पालने, बनी नशे की लती
पांचवीं पास यह युवती छह बहनों व एक भाई में सबसे छोटी है। पिता का साया कुछ वर्ष पूर्व सिर से उठ गया था। इसके बाद यह युवती कमाने के लिए घर से निकली। चंडीगढ़ में जॉब मिली। अच्छी खासी कमाई हो जाती थी। युवती की मां के अनुसार वह घर का खर्च चला रही थी, लेकिन बाद में उसने पैसे भेजने बंद कर दिए। हमें लगा शायद चंडीगढ़ में खर्च ज्यादा हो रहा होगा, लेकिन एक रोज जब वह घर आई तो उसकी आंखें लाल थी।
मुझे लगा कि शायद थक गई होगी। उसने हमने कोई बात नहीं की और चुपचाप कमरे में जाकर सो गई। सुबह नौ बजे तक नहीं उठी तो मुझे शक हुआ। यह क्रम कई बार घटित हुआ तो मैंने सख्ती से पूछताछ की। इस पर उसने बताया कि वह हेरोइन का नशा करती है। मां के अनुसार वह लोगों के घरों में काम करती है। नशे की लत ने बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी।