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हरियाली के शहर में खामोशी का संकट: चंडीगढ़ से गायब हो रहे परिंदे

Fri, 05 Jun 2026 02:41 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2026 02:41 AM IST
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The crisis of silence in the green city: Birds disappearing from Chandigarh
चंडीगढ़। हरियाली के लिए प्रसिद्ध चंडीगढ़ अब एक खामोश संकट का सामना कर रहा है। शहर से पक्षियों की चहचहाहट गायब हो रही है जिससे बुजुर्ग और पुराने निवासी चिंतित हैं। पिछले 20-30 सालों में घरेलू गौरैया, गिद्ध, नीलकंठ और किंगफिशर जैसे पक्षी लगभग विलुप्त हो गए हैं।
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सेक्टर-15 के निवासी राकेश ने बताया कि 15 वर्ष पहले तक आंगन में गौरैया आती थीं, पर अब हफ्तों तक एक भी नहीं दिखती। उनकी जगह अब कबूतरों ने ले ली है। सेक्टर-37 के आरडब्लूए अध्यक्ष यशपाल यादव ने मोबाइल टावरों को इसका मुख्य कारण बताया। उन्होंने शहरीकरण और पेड़ों की कटाई को भी जिम्मेदार ठहराया। सेक्टर-22 के प्रवीण गोयल ने कहा कि घरों के बड़े लॉन और कच्चे आंगन अब कंक्रीट के फर्श में बदल गए हैं। ऊंची इमारतें और कांच के फ्लैट्स पक्षियों के प्राकृतिक आशियाने खत्म कर रहे हैं। ऐसे में पक्षियों के छिपने और घोंसला बनाने की जगह पूरी तरह खत्म हो चुकी है। चंडीगढ़ वन और वन्यजीव विभाग के अधिकारियों ने बढ़ते शहरीकरण को प्रमुख वजह बताया।
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पक्षियों के गायब होने के कारण
पुराने पेड़ों की कटाई और कच्चे मैदानों का पक्का होना भी एक कारण है। बागवानी में केमिकल के इस्तेमाल से पक्षियों के मुख्य भोजन कीड़े-मकोड़े खत्म हो गए हैं। मोबाइल टावरों से निकलने वाली तरंगें छोटे पक्षियों के मानसिक संतुलन और अंडों को नुकसान पहुंचा रही हैं। कबूतरों की बढ़ती आबादी ने छोटे पक्षियों को उनके रिहायशी इलाकों से खदेड़ दिया है।
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कोट...
योग्यतम ही जीवित रहता है यह पुराना सिद्धांत है। बदलते माहौल के कारण पक्षियों का शहरों की ओर आना कम हो रहा है। वन विभाग के अनुसार, घरेलू गौरैया, भारतीय गिद्ध और लॉन्ग-बिल्ड वल्चर चंडीगढ़ के शहरी इलाकों से विलुप्त होने की कगार पर हैं। यह स्थिति पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय है। -सौरभ कुमार, मुख्य वन संरक्षक
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