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Chandigarh News: टेंडर लेकर ठेकेदार गायब, साहब फोन नहीं उठाते... शिकायत किससे करें
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चंडीगढ़। नगर निगम में ठेकेदारों का दबदबा है। बीते दिनों हुई सदन की बैठक में शहर के कई पार्षदों ने आरोप लगाया कि उनके वार्ड में विभिन्न विकास कार्यों का कई महीने पहले टेंडर होने के बाद काम आवंटित हो चुका है लेकिन ठेकेदार काम शुरू नहीं कर रहें हैं। इसकी शिकायत किससे करें क्योंकि अधिकारी फोन नहीं उठाते। एक पार्षद ने यहां तक कह दिया कि जब उन्होंने अधिकारी को बताया तो उन्हें जवाब मिला कि ठेकेदार तो उनका भी फोन नहीं उठाते। इस पर निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने चीफ इंजीनियर से जवाब मांगा। मेयर ने भी माना कि शहर के लिए यह बड़ी समस्या है। एक ठेकेदार को कई इलाकों में एक साथ काम दे दिया जाता है, जिसकी वजह से वह काम को पूरा करने में बहुत ज्यादा देरी करता है। मेयर अनूप गुप्ता ने चीफ इंजीनियर एनके शर्मा को आदेश दिए कि वह एक रिपोर्ट दें, जिसमें शहर के अलग-अलग हिस्सों में कौन-कौन से कार्य अधूरे हैं, इसकी जानकारी हो। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड के काम भी कुछ काम ऐसे हैं, जो आवंटित हो चुके हैं लेकिन अब तक शुरू नहीं हुए हैं। मेयर ने सभी पार्षदों को आश्वासन दिया है कि रिपोर्ट के आ जाने के बाद वह सभी कार्यों की समीक्षा करेंगे। अगर किसी ठेकेदार ने जानबूझकर काम में देरी की होगी, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डिवीजन के अनुसार टेंडर होने से आ रही समस्या
पार्षद हरदीप सिंह ने बताया कि पहले टेंडर वार्ड के अनुसार होते थे। इससे ठेकेदार एक ही वार्ड के अंदर कार्य करता था लेकिन कुछ समय पहले नगर निगम ने नियम बदल दिए। अब डिवीजन के अनुसार टेंडर किए जा रहे हैं। एक डिवीजन में पांच से आठ तक वार्ड आते हैं। इसकी वजह से जब कोई टेंडर आवंटित होता है तो ठेकेदार को कई वार्डों में काम करना होता है। ऐसे में जब वह किसी एक वार्ड में काम शुरू करता है तो उसे ही पूरा करने में दो से तीन महीने लग जाते हैं। ऐसे में टेंडर के सभी कार्यों को पूरा करने में एक से दो साल लगा देता है। हरदीप सिंह ने कहा कि उन्होंने नगर निगम को सुझाव दिया है कि अगर वार्ड के अनुसार टेंडर नहीं किया जा सकता है तो एसडीओ के अनुसार टेंडर किया जाना चाहिए, ताकि सभी पार्षदों के काम जल्द हो सके।
केस-1
वार्ड नंबर-21 के पार्षद जसबीर सिंह ने बताया कि उनके वार्ड में रिकार्पेटिंग का काम होना था। 26 जून 2022 को काम आवंटित हो चुका है, लेकिन अब तक ठेकेदार ने उनके इलाके में काम शुरू नहीं किया है। इसके अलावा सेक्टर-47सी में एक इमरजेंसी गेट खुलने का काम भी अब तक लटका हुआ है, जबकि निगम की आयुक्त ने आठ अगस्त 2022 को इसकी मंजूरी दे दी थी। जसबीर सिंह ने 28 जनवरी 2023 को इस संबंध में आयुक्त को पत्र भी लिखा, लेकिन काम नहीं हुआ है। पार्षद ने कहा कि निगम में कमीशन माफिया चल रहा है। अधिकारियों के कुछ ही चहेते ठेकेदार हैं, जिन्हें बार-बार काम सौंपा जाता है।
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केस-2
वार्ड नंबर-19 की पार्षद नेहा ने बताया कि उनके वार्ड के काम पिछले साल से आवंटित है, लेकिन ठेकेदार की तरफ से काम शुरू नहीं किया गया है। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 का काम के सड़क का काम रुका हुआ है। 15 मार्च को सांसद किरण खेर ने रामदरबार के कम्युनिटी सेंटर का उद्घाटन करना था तो चार दिन पहले आधी सड़क बना दी गई। पिछले साल जून-जुलाई में ठेकेदार को काम आवंटित हुए थे, लेकिन कई काम अब तक रुके हुए हैं और कई तो शुरू भी नहीं हुए हैं। कई बार काम शुरू करने के लिए अधिकारियों को शिकायत करने की कोशिश की है, लेकिन वो कॉल ही नहीं उठाते।
केस-3
वार्ड नंबर-30 के पार्षद हरदीप सिंह ने बताया कि उनके वार्ड के सेक्टर-41 के वी5 और वी4, सेक्टर-41 और 42 की वी3 और सेक्टर-41बी के वी6 सड़क का काम करीब आठ महीने पहले आवंटित हुआ था, लेकिन अब तक शुरू नहीं हुआ है। इसकी वजह से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोग पार्षदों को बोलते हैं, लेकिन असली समस्या यही है कि एक ठेकेदार को कई वार्डों का काम एक साथ दिया जा रहा है, जिसकी वजह से लोगों के कामों में देरी हो रही है।
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डिवीजन के अनुसार टेंडर होने से आ रही समस्या
पार्षद हरदीप सिंह ने बताया कि पहले टेंडर वार्ड के अनुसार होते थे। इससे ठेकेदार एक ही वार्ड के अंदर कार्य करता था लेकिन कुछ समय पहले नगर निगम ने नियम बदल दिए। अब डिवीजन के अनुसार टेंडर किए जा रहे हैं। एक डिवीजन में पांच से आठ तक वार्ड आते हैं। इसकी वजह से जब कोई टेंडर आवंटित होता है तो ठेकेदार को कई वार्डों में काम करना होता है। ऐसे में जब वह किसी एक वार्ड में काम शुरू करता है तो उसे ही पूरा करने में दो से तीन महीने लग जाते हैं। ऐसे में टेंडर के सभी कार्यों को पूरा करने में एक से दो साल लगा देता है। हरदीप सिंह ने कहा कि उन्होंने नगर निगम को सुझाव दिया है कि अगर वार्ड के अनुसार टेंडर नहीं किया जा सकता है तो एसडीओ के अनुसार टेंडर किया जाना चाहिए, ताकि सभी पार्षदों के काम जल्द हो सके।
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केस-1
वार्ड नंबर-21 के पार्षद जसबीर सिंह ने बताया कि उनके वार्ड में रिकार्पेटिंग का काम होना था। 26 जून 2022 को काम आवंटित हो चुका है, लेकिन अब तक ठेकेदार ने उनके इलाके में काम शुरू नहीं किया है। इसके अलावा सेक्टर-47सी में एक इमरजेंसी गेट खुलने का काम भी अब तक लटका हुआ है, जबकि निगम की आयुक्त ने आठ अगस्त 2022 को इसकी मंजूरी दे दी थी। जसबीर सिंह ने 28 जनवरी 2023 को इस संबंध में आयुक्त को पत्र भी लिखा, लेकिन काम नहीं हुआ है। पार्षद ने कहा कि निगम में कमीशन माफिया चल रहा है। अधिकारियों के कुछ ही चहेते ठेकेदार हैं, जिन्हें बार-बार काम सौंपा जाता है।
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केस-2
वार्ड नंबर-19 की पार्षद नेहा ने बताया कि उनके वार्ड के काम पिछले साल से आवंटित है, लेकिन ठेकेदार की तरफ से काम शुरू नहीं किया गया है। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 का काम के सड़क का काम रुका हुआ है। 15 मार्च को सांसद किरण खेर ने रामदरबार के कम्युनिटी सेंटर का उद्घाटन करना था तो चार दिन पहले आधी सड़क बना दी गई। पिछले साल जून-जुलाई में ठेकेदार को काम आवंटित हुए थे, लेकिन कई काम अब तक रुके हुए हैं और कई तो शुरू भी नहीं हुए हैं। कई बार काम शुरू करने के लिए अधिकारियों को शिकायत करने की कोशिश की है, लेकिन वो कॉल ही नहीं उठाते।
केस-3
वार्ड नंबर-30 के पार्षद हरदीप सिंह ने बताया कि उनके वार्ड के सेक्टर-41 के वी5 और वी4, सेक्टर-41 और 42 की वी3 और सेक्टर-41बी के वी6 सड़क का काम करीब आठ महीने पहले आवंटित हुआ था, लेकिन अब तक शुरू नहीं हुआ है। इसकी वजह से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोग पार्षदों को बोलते हैं, लेकिन असली समस्या यही है कि एक ठेकेदार को कई वार्डों का काम एक साथ दिया जा रहा है, जिसकी वजह से लोगों के कामों में देरी हो रही है।