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मेहंदी का रंग भी नहीं छूटा था कि उतर गई कोरोना की जंग में

Thu, 07 May 2020 02:27 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 07 May 2020 02:27 AM IST
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The color of the mehndi was not even left in the battle of corona
चंडीगढ़। ‘10 फरवरी 2020 को मेरी शादी हुई। शादी के कुछ दिन बाद ही चंडीगढ़ में कोरोना को लेकर बचाव कार्य शुरू हो गया। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ने लगी। शादी के बाद मुझे और छुट्टी मिल सकती थी लेकिन जब हॉस्पिटल से मुझे कॉल आई तो घर मेेें रुकना ठीक नहीं लगा। ससुराल में सभी ने लोगों ने मुझे हिम्मत दी। मेरे पति ने मुझे समझाया और कहा कि अब तो हम जन्म-जन्म के साथी हैं, फिलहाल इस समय देश को तुम्हारी जरूरत है और तुमको अपना फर्ज निभाना है। इसलिए सब कुछ दरकिनार कर हॉस्पिटल जाना चाहिए। पति की बातें सुनकर मुझे हिम्मत मिली और मैंने कोरोना की जंग में उतरने का निर्णय ले लिया।’ यह कहना है लुधियाना निवासी सुखप्रीत का, जो जीएमसीएच-32 में नर्सिंग स्टाफ के पद पर कार्यरत हैं।
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सुखप्रीत की शादी लुधियाना के गगनदीप सिंह से 10 फरवरी को हुई। हरप्रीत ने बताया कि हॉस्पिटल की ड्यूटी लिस्ट में मेरा नाम आने के बाद मुझे कॉल आई और मैं तुरंत लुधियाना से चंडीगढ़ आ गई और 28 मार्च से ड्यूटी शुरू कर दी। जब शहर में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी तो हॉस्पिटल में अलग से कोरोना की स्क्रीनिंग ओपीडी बनाई गई। मेरी ड्यूटी स्क्रीनिंग ओपीडी में लगाई गई। मैंने जब पहली बार पीपीई किट पहना तो बड़ा अजीब महसूस हुआ, थोड़ा डर भी लगा लेकिन फिर अपने परिवार की बातें याद आईं और बाकी सहयोगियों को देखकर सारा डर दूर हो गया।
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स्थिति सामान्य होते ही पति लौट जाएंगे यूरोप
सुखप्रीत के पति यूरोप में नौकरी करते हैं। उन्होंने बताया कि शादी के लिए दो महीने की छुट्टी लेकर भारत आए थे लेकिन कोरोना के कारण सारी छुट्टी ऐसे ही निकल गई। शादी के बाद छुट्टियां बिताने की काफी प्लानिंग भी की थी लेकिन कहीं नहीं जा पाए। सुखप्रीत का कहना है कि इस समय हमारा सारा वक्त सिर्फ देश को कोरोना से बचाने के लिए है। बाकी की खुशियां तो हम कोरोना को हराकर अपनों के साथ मनाएंगे ही। सुखप्रीत के मायके में माता-पिता और एक भाई व एक बहन है। उन सभी को भी इनकी बहुत चिंता सताती है लेकिन वो सब बस एक ही बात कहते हैं कि डरना नहीं डटकर लड़ना।
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