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Chandigarh News: कुर्सियां बदलीं, सिस्टम नहीं... पेनल्टी के बोझ तले कराह रहा कारोबारी

Mon, 11 May 2026 12:14 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 11 May 2026 12:14 AM IST
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The chairs have changed, but not the system... the businessman is groaning under the burden of penalties.
चंडीगढ़। चंडीगढ़ में प्रशासनिक बदलावों का दौर लगातार चलता रहा। राजभवन से लेकर सचिवालय तक चेहरे बदले, नए प्रशासक आए और अधिकारियों ने कमान संभाली लेकिन शहर के व्यापारियों की सबसे बड़ी समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। नीड बेस्ड चेंज और बिल्डिंग वॉयलेशन पर लगने वाली भारी-भरकम पेनल्टी ने हजारों व्यापारियों को आर्थिक और मानसिक संकट में डाल रखा है।
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चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अनुसार शहर के करीब 30 हजार व्यापारियों में से लगभग 10 हजार व्यापारी सीधे तौर पर बिल्डिंग वॉयलेशन और पेनल्टी के मामलों से प्रभावित हैं। व्यापारियों का कहना है कि हर नए अधिकारी के आने पर समाधान का भरोसा दिया जाता है लेकिन जमीन पर स्थिति नहीं बदलती।
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व्यापार मंडल का कहना है कि बदलते समय और कारोबार की जरूरतों के हिसाब से दुकानों में किए गए छोटे-मोटे आंतरिक बदलावों को वैध किया जाना चाहिए। इसके उलट प्रशासन की ओर से लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं और पेनल्टी का बोझ बढ़ता जा रहा है।
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सेक्टर-17, 19, 22, 35 और इंडस्ट्रियल एरिया समेत प्रमुख बाजारों के व्यापारी आज भी कोर्ट-कचहरी और संपदा विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हैं। व्यापारियों का कहना है कि कारोबार बढ़ाने की जगह अब अधिकांश समय पेनल्टी नोटिसों के जवाब देने और सीलिंग के डर में गुजर रहा है।
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के चेयरमैन चरंजीव सिंह ने कहा कि शहर के व्यापारियों पर करोड़ों रुपये की पेनल्टी लग चुकी है। कई मामलों में स्थिति ऐसी है कि व्यापारी अपनी संपत्ति बेच दें तो भी पूरी रकम नहीं चुका पाएंगे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को कई बार प्रशासक और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिली।

मंडल के अध्यक्ष संजीव चड्ढा ने कहा कि पंजाब एक्ट के तहत पेनल्टी राशि 10 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दी गई जिससे व्यापारियों की परेशानी कई गुना बढ़ गई। उन्होंने कहा कि शहर में कई व्यापारियों पर पांच-पांच करोड़ रुपये तक की पेनल्टी लग चुकी है, जो कई मामलों में संपत्ति की कीमत के बराबर पहुंच गई है। व्यापारियों ने मांग उठाई है कि नीड बेस्ड चेंज को मंजूरी देकर पेनल्टी व्यवस्था को तर्कसंगत और व्यावहारिक बनाया जाए।
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