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Chandigarh News: डेपुटेशन का चस्का पड़ा भारी, स्वास्थ्य विभाग के 317 पद खत्म
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चंडीगढ़। स्वास्थ्य विभाग को डेपुटेशन पर दूसरे प्रदेशों से डाॅक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ बुलाना महंगा पड़ा है। अपनों को खुश करने के लिए डेपुटेशन के चस्के के चलते देखते ही देखते विभाग के 317 पद समाप्त हो चुके हैं। इसे लेकर अब आला अधिकारी परेशान हैं। इन 317 पदों में डॉक्टरों के साथ नर्सिंग ऑफिसर और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये पद एक-दो साल में नहीं 15 से 20 वर्षों में एक-एक कर समाप्त हो गए हैं लेकिन आला अधिकारियों ने इसे लेकर कभी गंभीरता नहीं दिखाई। अब जब मामला गंभीर स्थिति में पहुंच गया है तब अधिकारियों के हाथ-पैर फूलने लगे हैं। समाप्त पदों को फिर से सक्रिय करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय से अनुरोध किया जा रहा है।
जीएमएसएच 17 में सबसे ज्यादा पद खत्म
नियमित पदों पर नियुक्ति न होने के चलते जीएमएसएच-16 के 190 पद समाप्त हो चुके हैं। एक रिकॉर्ड के अनुसार इसमें नर्सिंग ऑफिसर के 59 और डॉक्टरों व पैरामेडिकल के 131 पद शामिल हैं। अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि नियमित नियुक्ति पर रोक का मुख्य कारण अपनों को डेपुटेशन पर यहां तैनाती देना है। इससे वर्षों से खाली पदों पर नियुक्ति के लिए किसी भी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। मानकों की अनदेखी का ही परिणाम है जो डेपुटेशन पर आने वाले डॉक्टर और अन्य कर्मचारी तीन के बजाय 10 से लेकर 20 साल से एक ही जगह पर तैनात हैं।
जीएमसीएच 32 में भी गिनती लंबी
जीएमसीएच में समाप्त हुए 127 पदों में से 34 पद फैकल्टी/प्रोफेसर से संबंधित हैं। अन्य 93 पद नर्सिंग और अन्य पैरामेडिकल श्रेणी से संबंधित हैं। यहां भी डेपुटेशन का लंबा खेल चल रहा है। स्थिति यह है कि मेडिकल कॉलेज में डेपुटेशन पर दूसरे प्रदेशों से आए मेडिकल ऑफिसरों को विभाग प्रमुख बनाया गया है। सूत्रों का कहना है कि यहां तैनाती के लिए मारामारी मची रहती है। डेपुटेशन पर आने वाले लोग विभिन्न स्टोर प्रमुख जैसे पदों पर प्रभारी बनने के लिए जुगाड़ लगा रहे हैं।
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वित्त विभाग से मिली सहमति
अधिकारियों के अनुसार, जीएमएसएच-16 में 190 पदों के पुनरोद्धार के प्रस्ताव को वित्त विभाग ने सहमति दे दी है। इसमें नर्सिंग ऑफिसर के 59 पद शामिल हैं। 131 पद पैरामेडिकल/मंत्रिस्तरीय/गैर-मंत्रालयी पदों से संबंधित हैं। इस सहमति से एक उम्मीद जगी है क्योंकि अब से पहले तक इससे जुड़े प्रस्ताव को दरकिनार किया जाता रहा है। पहली बार इस पर अधिकारी सचेत हुए हैं।
इन कारणों को बताया जा रहा जिम्मेदार
- यूटी प्रशासन को प्रतिनियुक्ति पर पदों को भरने के लिए पंजाब/हरियाणा की ओर से चिकित्सा अधिकारियों की सिफारिश न करना।
- चंडीगढ़ प्रशासन की ओबीसी श्रेणी की नीति से संबंधित मुद्दे, जिसके कारण यूपीएससी इस श्रेणी के लिए भर्तियां नहीं कर रहा है।
- मार्च 2023 से केंद्रीय वेतनमान को अपनाने और इसके परिणामस्वरूप अर्हक सेवा में परिवर्तन के कारण आरआर में संशोधन लंबित हैं।
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जीएमएसएच 17 में सबसे ज्यादा पद खत्म
नियमित पदों पर नियुक्ति न होने के चलते जीएमएसएच-16 के 190 पद समाप्त हो चुके हैं। एक रिकॉर्ड के अनुसार इसमें नर्सिंग ऑफिसर के 59 और डॉक्टरों व पैरामेडिकल के 131 पद शामिल हैं। अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि नियमित नियुक्ति पर रोक का मुख्य कारण अपनों को डेपुटेशन पर यहां तैनाती देना है। इससे वर्षों से खाली पदों पर नियुक्ति के लिए किसी भी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। मानकों की अनदेखी का ही परिणाम है जो डेपुटेशन पर आने वाले डॉक्टर और अन्य कर्मचारी तीन के बजाय 10 से लेकर 20 साल से एक ही जगह पर तैनात हैं।
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जीएमसीएच 32 में भी गिनती लंबी
जीएमसीएच में समाप्त हुए 127 पदों में से 34 पद फैकल्टी/प्रोफेसर से संबंधित हैं। अन्य 93 पद नर्सिंग और अन्य पैरामेडिकल श्रेणी से संबंधित हैं। यहां भी डेपुटेशन का लंबा खेल चल रहा है। स्थिति यह है कि मेडिकल कॉलेज में डेपुटेशन पर दूसरे प्रदेशों से आए मेडिकल ऑफिसरों को विभाग प्रमुख बनाया गया है। सूत्रों का कहना है कि यहां तैनाती के लिए मारामारी मची रहती है। डेपुटेशन पर आने वाले लोग विभिन्न स्टोर प्रमुख जैसे पदों पर प्रभारी बनने के लिए जुगाड़ लगा रहे हैं।
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वित्त विभाग से मिली सहमति
अधिकारियों के अनुसार, जीएमएसएच-16 में 190 पदों के पुनरोद्धार के प्रस्ताव को वित्त विभाग ने सहमति दे दी है। इसमें नर्सिंग ऑफिसर के 59 पद शामिल हैं। 131 पद पैरामेडिकल/मंत्रिस्तरीय/गैर-मंत्रालयी पदों से संबंधित हैं। इस सहमति से एक उम्मीद जगी है क्योंकि अब से पहले तक इससे जुड़े प्रस्ताव को दरकिनार किया जाता रहा है। पहली बार इस पर अधिकारी सचेत हुए हैं।
इन कारणों को बताया जा रहा जिम्मेदार
- यूटी प्रशासन को प्रतिनियुक्ति पर पदों को भरने के लिए पंजाब/हरियाणा की ओर से चिकित्सा अधिकारियों की सिफारिश न करना।
- चंडीगढ़ प्रशासन की ओबीसी श्रेणी की नीति से संबंधित मुद्दे, जिसके कारण यूपीएससी इस श्रेणी के लिए भर्तियां नहीं कर रहा है।
- मार्च 2023 से केंद्रीय वेतनमान को अपनाने और इसके परिणामस्वरूप अर्हक सेवा में परिवर्तन के कारण आरआर में संशोधन लंबित हैं।