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टैगोर में नाग का रानी प्रेम देखकर दंग रह गए दर्शक
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चंडीगढ़। टैगोर थिएटर में रविवार को जाने-माने नाटककार गिरीश कनार्ड के लिखे नाटक ‘नागमंडल’ का मंचन किया गया। नाटक को सात्विक आर्ट सोसाइटी ने पेश किया। नाटक के निर्देशक अमित सनोरिया और सर्वर अली थे। इसे संगीत दुर्गेश और डिजाइन मनीष ने किया। इसमें तीन गाने शिवम ढल ने लिखे।
नाटक की खास बात यह है कि इसमें दक्षिण के लोकगीत और पहनावे को दर्शाया गया। नाटक में रानी की जिस व्यक्ति से शादी होती है, वह न तो उसे प्रेम देता है और और न ही सम्मान। वह केवल दिन में खाना खाने घर पर आता है और रानी घर पर अकेली रहती है। इस कारण उसके भीतर जीने की इच्छा खत्म होने लगती है। इसी बीच उसके जीवन की कहानी नया मोड़ लेती है, जब उसे एक नाग से प्रेम हो जाता है। वह हर रोज अपनी शक्तियाें के दम पर रानी के पति का रूप धारण कर उससे मिलने लग जाता है, लेकिन रानी को समझ में नहीं आता कि क्यों उसका पति रात को उससे इतना प्रेम करने लगता है और दिन में उसकी तरफ देखना भी पसंद नहीं करता। लोक कथाओं में नाग को लालसा का प्रतीक माना गया है, पर इस कहानी में नाग एक सच्चे प्रेमी की भूमिका निभाता है और अंत तक रानी का साथ निभाता है।
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नाटक की खास बात यह है कि इसमें दक्षिण के लोकगीत और पहनावे को दर्शाया गया। नाटक में रानी की जिस व्यक्ति से शादी होती है, वह न तो उसे प्रेम देता है और और न ही सम्मान। वह केवल दिन में खाना खाने घर पर आता है और रानी घर पर अकेली रहती है। इस कारण उसके भीतर जीने की इच्छा खत्म होने लगती है। इसी बीच उसके जीवन की कहानी नया मोड़ लेती है, जब उसे एक नाग से प्रेम हो जाता है। वह हर रोज अपनी शक्तियाें के दम पर रानी के पति का रूप धारण कर उससे मिलने लग जाता है, लेकिन रानी को समझ में नहीं आता कि क्यों उसका पति रात को उससे इतना प्रेम करने लगता है और दिन में उसकी तरफ देखना भी पसंद नहीं करता। लोक कथाओं में नाग को लालसा का प्रतीक माना गया है, पर इस कहानी में नाग एक सच्चे प्रेमी की भूमिका निभाता है और अंत तक रानी का साथ निभाता है।
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