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अफसरशाही के खिलाफ फूटा पार्षदों का गुस्सा, बोले- एडवाइजर ही चला लें सदन

Sun, 01 May 2022 01:33 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 01 May 2022 01:33 AM IST
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The anger of the councilors erupted against the bureaucracy, said - only the advisor should run the house
एजेंडे को लेकर बहस करते हुए। - फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। सदन की बैठक में शनिवार को अफसरशाही के खिलाफ पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा। भाजपा पार्षद कनवरजीत राणा ने निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा से कहा कि आप हर काम में यही कहती हैं कि यह सदन के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता या आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। जब सदन सुप्रीम है तो फिर उसका अधिकार क्षेत्र क्या है? जब जनता के चुने गए प्रतिनिधियों की बात प्रशासन नहीं सुन रहा तो प्रशासक के सलाहकार (एडवाइजर) ही सदन को चला लें। यहां बैठे पार्षद बेशक अलग-अलग पार्टी के हैं और उनकी विचारधारा भी अलग है, लेकिन अफसरशाही के खिलाफ सभी एक हैं। इस बात पर आम आदमी पार्टी (आप), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के पार्षदों ने टेबल बजाकर सहमति दी।
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सदन में चेन डोजर के एजेंडे को लेकर कांग्रेस पार्षद गुरबक्श रावत ने आयुक्त से कहा कि कंपनियों को जब कोई सामान किराए पर देना होता है तो सबसे बेकार पड़ी मशीनें निगम को दे देते हैं इसलिए टेंडर के दौरान मशीन के निर्माण की तिथि और खरीदने की तिथि का भी जिक्र होना चाहिए। साथ ही आज यह भी तय कर लें कि कितनी पुरानी मशीन को निगम अनुमति देगा। इसके लिए सदन में नियम व शर्तों का एजेंडा लाया जाए।
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आयुक्त ने कहा कि सभी कार्य सीपीडब्ल्यूडी के मानकों के अनुसार होते हैं। यह टेक्निकल कमेटी का अधिकार क्षेत्र है, इसे सदन में नहीं लाया जा सकता। इसके बाद लायंस कंपनी को मंडी, मार्केट सहित कई क्षेत्रों में सफाई की जिम्मेदारी देने के साथ ही कर्मचारियों के लिए तय की गई सुविधाओं का एजेंडा लाया गया। इस पर पार्षदों ने कहा लायंस कंपनी न ठीक से सफाई करती है और न कर्मचारियों के हित में काम कर रही है, फिर हम उन्हें क्यों अतिरिक्त जिम्मदारी सौंप रहे हैं। इस पर आयुक्त ने कहा कि यह एजेंडा सिर्फ सदन की जानकारी के लिए है, टेंडर हम कर चुके हैं। पार्षदों ने कहा कि जिस कमेटी ने यह तय किया, उसमें एक भी पार्षद नहीं था, इस पर आयुक्त ने कहा कि टेक्निकल कमेटी में पार्षदों को नहीं रखा जा सकता। इस पर कनवरजीत राणा ने कहा कि आप हर कार्य में कहतीं हैं कि यह आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में नहीं, फिर इस सदन का क्या मतलब। आप हर कार्य में हमसे सहयोग की अपेक्षा करतीं हैं लेकिन ताली दोनों हाथों से बजती है। पार्षदों को कमजोर करने का प्रयास किया जाएगा तो फिर आप अपने हिसाब से काम करिए हम अपने हिसाब से करेंगे। प्रशासन हर कार्य में आनाकानी करता है तो फिर सलाहकार ही सदन को चला लें।
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आरोप : 15 दिनों में उठ रहा कचरा, बूटा सिंह फोन नहीं उठाते
नेता प्रतिपक्ष योगेश ढींगरा ने कहा कि मेरे क्षेत्र में 15 दिनों में एक बार कचरा उठता है। कंपनी के अधिकारी बूटा सिंह को फोन लगाओ तो वह फोन नहीं उठाते। करोड़ों रुपये खर्च करके सफाई का यह हाल है फिर पार्षद किससे शिकायत करें। इस पर अन्य पार्षदों ने भी सहमति जताई। उन्होंने कहा कि कंपनी कर्मचारियों से भर्ती के समय रुपये वसूलती है और फिर उनके वेतन से भी रुपये काटती है। हम कंपनी पर निगरानी के लिए कोई अधिकारी क्यों नहीं नियुक्त करते। आयुक्त ने कहा कि सदन अनुमति देगा तो हम निगरानी कराने लगेंगे। साथ ही तय हो कि तय समय पर कर्मचारियों को वेतन न मिले तो कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। बाद में तय हुआ कि एक स्वच्छता कमेटी बनेगी, जिसमें पार्षदों को रखा जाएगा और यह कमेटी कंपनी पर निगरानी रखेगी।
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पार्षदों को टीवीसी में शामिल न करने पर भी जताई नाराजगी
कनवरजीत राणा ने कहा कि अधिकारियों ने टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) में एक भी पार्षद को नहीं रखा है। मैं गारंटी देता हूं कि एक भी वेंडर किसी अधिकारी को जानता हो। परेशान होकर वह पार्षद के पास जाता है। हमारे क्षेत्र में वेंडरों को जगह दी जा रही है और हमें पता तक नहीं है। पार्षदों को कमेटी में रखा जाता तो वेंडरों का जो बुरा हाल अभी हो रहा है वह न होता।

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सेक्टर-1 से 30 तक ठेके पर सफाई देने की बात पर भी बवाल
भाजपा पार्षद महेश इंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि जल्द सेक्टर-1 से 30 तक भी दक्षिणी सेक्टरों की तर्ज पर सफाई व्यवस्था को ठेके पर दे दिया जाए, इस पर आप पार्षद कुलदीप ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कंपनियां कर्मचारियों का शोषण करतीं हैं। जो कर्मचारियों अभी काम कर रहे हैं, उन्हें ही बेहतर सुविधाएं दी जाएं तो सफाई व्यवस्था बेहतर हो सकती है। लायंस कंपनी को ठेका देने के बाद स्वच्छ रैंकिंग की स्थिति देख लीजिए। इसके बाद सिद्धू ने कहा कि कंपनी की वजह से जो नुकसान हुआ है उसका भुगतान भी कंपनी से कराया जाए।
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