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जैश के फिदायीनों ने घाटी में ही तैयार किए मौत के सौदागर
Fri, 15 Feb 2019 05:20 AM IST
राजेश सैनी
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: राजेश सैनी
Updated Fri, 15 Feb 2019 05:20 AM IST
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pulwama terror attack
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पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों पर हुए आतंकी हमले की पटकथा भले ही सरहद पार लिखी गई हो, लेकिन इस हमले में जैश के आतंकियों ने मौत के सौदागर यहीं घाटी में ही तैयार किए हैं।
इस हमले को भी अंजाम देने वाला जैश का फिदायीन अदील अहमद डार बताया जा रहा है, वह भी यहीं पुलवामा के गुनीबाग स्थित कोकपुरा का रहने वाला युवक वकास है। सेना के पास जनवरी मध्य से ही इनपुट था कि एलओसी पार से जैश के फिदायीन सरहद पार कर घाटी में घुस चुके हैं और किसी बड़े हमले की फिराक में है।
उसके बाद से ही 26 जनवरी गणतंत्र दिवस आया। जिसे लेकर घाटी में सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया एजेंसियों मुस्तैद रही। फिर 4 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कश्मीर में कार्यक्रम तय हुआ। इस दौरान भी लगातार सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों को बड़ा हमला होने का इनपुट मिलता रहा।
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सैन्य सूत्र बताते हैं कि जनवरी मध्य से लेकर 10 फरवरी तक लगभगर6 इनपुट ऐसे आ चुके थे जिसमें फिदायीन हमले की आशंका जताई जा चुकी थी। लेकिन 13 फरवरी देररात फिर से इनपुट मिला कि ये फिदायीन हमला किसी न किसी फोर्स के कॉनवाय (रक्षादल) पर किया जाएगा।
इंडियन फोर्सिस इस इनपुट को काफी सटीक मानते हुए अभी और सतर्क होती कि 14 फरवरी को जैश के स्थानीय फिदायीन गुर्गे ने एक बड़े हमले को अंजाम दे दिया। सूत्रों ने बताया कि दरअसल, फिदायीन यह तय कर चुके थे कि हमला हाईवे पर उस वक्त होगा, जब कोई कॉनवाय यहां से मूव करेगा। ऐसा ही हुआ अत्यधिक बर्फबारी की वजह से सीआरपीएफ के जवान जम्मू में थे और उन्हें गाड़ियों में वापस श्रीनगर पहुंचना था।
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इस हमले को भी अंजाम देने वाला जैश का फिदायीन अदील अहमद डार बताया जा रहा है, वह भी यहीं पुलवामा के गुनीबाग स्थित कोकपुरा का रहने वाला युवक वकास है। सेना के पास जनवरी मध्य से ही इनपुट था कि एलओसी पार से जैश के फिदायीन सरहद पार कर घाटी में घुस चुके हैं और किसी बड़े हमले की फिराक में है।
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उसके बाद से ही 26 जनवरी गणतंत्र दिवस आया। जिसे लेकर घाटी में सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया एजेंसियों मुस्तैद रही। फिर 4 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कश्मीर में कार्यक्रम तय हुआ। इस दौरान भी लगातार सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों को बड़ा हमला होने का इनपुट मिलता रहा।
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सैन्य सूत्र बताते हैं कि जनवरी मध्य से लेकर 10 फरवरी तक लगभगर6 इनपुट ऐसे आ चुके थे जिसमें फिदायीन हमले की आशंका जताई जा चुकी थी। लेकिन 13 फरवरी देररात फिर से इनपुट मिला कि ये फिदायीन हमला किसी न किसी फोर्स के कॉनवाय (रक्षादल) पर किया जाएगा।
इंडियन फोर्सिस इस इनपुट को काफी सटीक मानते हुए अभी और सतर्क होती कि 14 फरवरी को जैश के स्थानीय फिदायीन गुर्गे ने एक बड़े हमले को अंजाम दे दिया। सूत्रों ने बताया कि दरअसल, फिदायीन यह तय कर चुके थे कि हमला हाईवे पर उस वक्त होगा, जब कोई कॉनवाय यहां से मूव करेगा। ऐसा ही हुआ अत्यधिक बर्फबारी की वजह से सीआरपीएफ के जवान जम्मू में थे और उन्हें गाड़ियों में वापस श्रीनगर पहुंचना था।
pulwama attack
सूत्रों ने बताया कि इस हमले में पूरी तरह से लोकल नेटवर्क इस्तेमाल किया गया। स्थानीय लोगों में से ही कुछ असामाजिक तत्वों ने आतंकियों को ये सूचना दी थी कि हाईवे से जवानों का काफिला गाड़ियों से गुजर रहा है। जैसे ही ये सीआरपीएफ का रक्षादल पुलवामा हाईवे से गुजर रहा था, तभी घात लगाकर बैठे आतंकियों ने हमला किया। सैन्य सूत्रों ने यह भी बताया कि सरहद पार से आए जैश के इन फिदायीनों ने यही स्थानीय युवकों का ब्रेनवॉश कर इस काम के लिए तैयार किया है।
निर्धारित से ज्यादा जवान चढ़ गए थे बस में
हरियाणा के कालका नंबर एचआर 49 एफ 0637 की बस में 42 जवानों को ही बैठना था। इन जवानों को इस बस में जम्मू से श्रीनगर जाना था। लेकिन चूंकि जवानों की संख्या ज्यादा होने की वजह से इस बस में निर्धारित 42 जवानों से अधिक जवान सवार हो गए और इसी बस को आतंकियों ने निशाना बना दिया। लिहाजा फौज अब सूची के अलावा उन जवानों की पहचान भी कर रही है, जिनके नाम सूची में नहीं थे।
पठानकोट में हाईअलर्ट जारी
इस घटना के बाद वैसे तो सैन्य हाईकमान ने उतर भारत की सभी छावनियों को अलर्ट कर दिया है। लेकिन पठानकोर्ट में हाईअलर्ट जारी किया गया है। चूंकि ये इलाका जम्मू के साथ ही सटा हुआ है। इसलिए सेना को आशंका है कि आतंकी कहीं इस इलाके में भी कुछ गड़बड़ी न कर दें। इस इलाके में पहले भी संदिग्ध देखे जा चुके हैं।
इस हमले के बाद चिंताएं काफी बढ़ गई है। देश भावुक हो सकता है, लेकिन सरकार को गंभीरता से काम लेना होगा। इस बात की आशंका से कतई इंकार नहीं किया जा सकता है, इस हमले में स्थानीय नेटवर्क का ही इस्तेमाल हुआ है। लेकिन समस्या यह है कि हमला हाईवे पर हुआ और ऐसे में हाईवे पर सिविलियन वाहनों को आने से कैसे रोका जा सकता है। अभी सिर्फ इस हमले की समीक्षा करने की जरूरत है।
- लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा, सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने वाले टीम के कमांडर।
निर्धारित से ज्यादा जवान चढ़ गए थे बस में
हरियाणा के कालका नंबर एचआर 49 एफ 0637 की बस में 42 जवानों को ही बैठना था। इन जवानों को इस बस में जम्मू से श्रीनगर जाना था। लेकिन चूंकि जवानों की संख्या ज्यादा होने की वजह से इस बस में निर्धारित 42 जवानों से अधिक जवान सवार हो गए और इसी बस को आतंकियों ने निशाना बना दिया। लिहाजा फौज अब सूची के अलावा उन जवानों की पहचान भी कर रही है, जिनके नाम सूची में नहीं थे।
पठानकोट में हाईअलर्ट जारी
इस घटना के बाद वैसे तो सैन्य हाईकमान ने उतर भारत की सभी छावनियों को अलर्ट कर दिया है। लेकिन पठानकोर्ट में हाईअलर्ट जारी किया गया है। चूंकि ये इलाका जम्मू के साथ ही सटा हुआ है। इसलिए सेना को आशंका है कि आतंकी कहीं इस इलाके में भी कुछ गड़बड़ी न कर दें। इस इलाके में पहले भी संदिग्ध देखे जा चुके हैं।
इस हमले के बाद चिंताएं काफी बढ़ गई है। देश भावुक हो सकता है, लेकिन सरकार को गंभीरता से काम लेना होगा। इस बात की आशंका से कतई इंकार नहीं किया जा सकता है, इस हमले में स्थानीय नेटवर्क का ही इस्तेमाल हुआ है। लेकिन समस्या यह है कि हमला हाईवे पर हुआ और ऐसे में हाईवे पर सिविलियन वाहनों को आने से कैसे रोका जा सकता है। अभी सिर्फ इस हमले की समीक्षा करने की जरूरत है।
- लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा, सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने वाले टीम के कमांडर।