'कुत्तों' पर मेनका गांधी की मेहरबानी से गर्माई राजनीति
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शहर में कुत्तों के मुद्दों पर केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के हस्तक्षेप के बाद यहां की राजनीति गर्मा गई है। मेनका गांधी के एसपीसीए अध्यक्ष को फोन कर डांटने के मामले की मेयर हरफूलचंद्र कल्याण ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यदि ऐसे ही एनजीओ प्रबंधकों को डराया-धमकाया जाएगा तो वे काम कैसे करेंगी।
उन्होंने कहा कि इन हालातों में तो हम किसी और एनजीओ से भी संपर्क नहीं कर सकेंगे। शहर में वैसे ही एक संस्था है जो नसबंदी का काम कर रही थी, उनके काम भी ऐसे रोकटोक की जाएगी तो मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
मेयर ने कहा कि हम तो काम करना चाहते हैं, लेकिन सरकार नहीं करने दे रही है। मेनका के फोन का मुद्दा नगर निगम सदन की बैठक में भी उठा था। पूर्व मेयर सुभाष चावला ने भी मेनका के इस हस्तक्षेप का कड़ा विरोध किया था।
फोन पर लगाई थी एसपीसीए अध्यक्ष को फटकार
गौरतलब है कि वीरवार को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने एसपीसीए, चंडीगढ़ के अध्यक्ष डॉ. जेसी कोचर को फोन किया था और उन्हें नसबंदी का काम ढंग से न होने के कारण खूब फटकार लगाई थी।
इससे नाराज होकर डॉ. कोचर ने इस्तीफा दे दिया था। डॉ. कोचर के बाद वहां के एक डॉक्टर ने भी इस्तीफा दे दिया। हालांकि उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए संस्था को छोड़ा है।
वहीं सूत्रों ने बताया कि डॉ. कोचर के इस्तीफा देने के विरोध में एसपीसीए की कार्यकारिणी के कई अन्य सदस्य भी इस्तीफा देने की बात कर रहे हैं।
गर्म सियासत पर नेताओं के बोल
मेयर के इस बयान पर भाजपा-अकाली पार्षद दल के नेता अरुण सूद का कहना है कि वे अपनी कमियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। शहर में कुत्तों की नसबंदी का काम तो पहले ही सही तरीके से नहीं हो रहा था। मेनका गांधी के फोन करने से कोई फर्क नहीं पड़ा बल्कि उन्होंने तो खुद नसबंदी का काम प्रभावी रूप से चलाने के लिए एसपीसीए अध्यक्ष को फोन किया था।
वहीं कांग्रेस पार्षद प्रदीप छाबड़ा ने कहा कि यह बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक केंद्रीय मंत्री इस तरह फोन पर किसी को धमका रही है। उन्होंने फोन पर तो ऐसी बातें कह दीं, लेकिन शनिवार को चंडीगढ़ में रहते हुए उन्होंने न तो मुद्दा जानने की कोशिश की और न ही किसी से बात भी नहीं की।
भाजपा पार्षद सतिंदर सिंह के मुताबिक कुत्तों की समस्या बढ़ने से अब जनता का प्रेशर बढ़ रहा है तो कांग्रेस पार्षद मेनका गांधी के फोन को बचने का रास्ता बना रहे हैं। मेनका ने तो फोन कर खुद कहा था कि नसबंदी का काम सही ढंग से किया जाए। उन्होंने यह काम रोकने के लिए तो नहीं कहा था।