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Chandigarh News: स्मार्ट पार्किंग के लिए टेंडर जारी, दोपहिया पार्किंग मुफ्त करने का प्रस्ताव भी शामिल
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चंडीगढ़। नगर निगम ने पीपीपी मॉडल पर स्मार्ट पार्किंग प्रोजेक्ट का टेंडर जारी कर दिया है। निगम का दावा है कि टेंडर पूरा होने के बाद छह महीने में परियोजना को पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। पिछले घोटालों से सबक लेते हुए इस बार ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को बढ़ावा दिया जाएगा। दोपहिया वाहनों की पार्किंग भी मुफ्त करने का प्रस्ताव टेंडर में डाला गया है।नगर निगम शहर के 89 पार्किंग को स्मार्ट बनाने की परियोजना पर काम कर रहा है। स्मार्ट पार्किंग पॉलिसी के तहत पार्किंग के प्रवेश और निकास पर ऑटोमैटिक बूम बैरियर लगाए जाएंगे। करीब 89 पार्किंग स्थलों पर फास्ट टैग को स्कैन कर यह बूम बैरियर अपने आप खुल जाएंगे। निकासी के समय जितने समय गाड़ी पार्किंग में खड़ी हुई होगी, उसके हिसाब से फास्ट टैग से पैसे कट जाएंगे। निगम ने ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए कैश देने वालों पर अतिरिक्त पांच रुपये का शुल्क भी लगाया है। सोमवार को निगम ने टेंडर का नोटिस जारी किया। इसके अनुसार स्मार्ट पार्किंग समाधान के लिए डिजाइन, विकास, कार्यान्वयन, संचालन और रखरखाव के लिए इच्छुक बोलीदाताओं, एजेंसियों, कंपनियों से ई-टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से ऑनलाइन बोलियां आमंत्रित की हैं। इच्छुक बोलीदाता ई-टेंडरिंग वेबसाइट https://etenders.chd.nic.in/ से आरएफपी दस्तावेज डाउनलोड कर सकते हैं और 11 मार्च दोपहर तीन बजे से पहले अपनी बोली जमा कर सकते हैं। मंगलवार सुबह नौ बजे से इच्छुक एजेंसियां अपनी बोली जमा कर सकती हैं। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि अगर टेंडर से संबंधित कोई शुद्धि पत्र होगा तो वह वेबसाइट पर ही ऑनलाइन प्रकाशित किया जाएगा।
26 फरवरी को होगी प्री-बिड बैठक
यह परियोजना अगले करीब 15 वर्षों के लिए होगी, इसलिए आरएफपी जारी करने से पहले भी निगम ने इच्छुक कंपनियों से चर्चा की थी। इसके अलावा 26 फरवरी को एक प्री-बिड बैठक भी रखी गई है। प्री-आरएफपी बैठक में बैंक के अलावा ऐसी कई कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए जो एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मॉल और दूसरे शहरों में पार्किंग का काम कर रही हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन कुल करीब 12 कंपनियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कई सुझाव दिए, जिन पर विचार करने के बाद नगर निगम ने अब टेंडर जारी कर दिया है।
पिछली गलतियों से सबक, जॉइंट खाते में आएंगे पैसे
पार्किंग घोटाले से सीख लेते हुए निगम ने कई शर्तों में बदलाव किए हैं। सबसे अहम यह है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा दिया जाएगा। पार्किंगों से जो रोजाना पैसों का कलेक्शन होगा, वह जॉइंट खाते में जाएंगे। कोई भी एक कंपनी, पैसों को दूसरे खाते में ट्रांसफर नहीं कर सकेगी। कैश को रोजाना जमा कराना होगा। अब तक जितने भी पार्किंग के ठेके दिए गए हैं, उसमें रोजाना के पैसों का कलेक्शन कंपनी करती थी और महीने में निगम को फीस देती थी। नगर निगम सदन की ओर से पारित प्रस्ताव के आधार पर टेंडर जारी किया गया है। इसमें दोपहिया वाहनों की पार्किंग मुफ्त होने और ट्राइसिटी से बाहर के वाहनों पर दोगुना पार्किंग फीस लेने का फैसला है। नगर निगम की सदन की बैठक में पार्षदों ने सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पास किया था। प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने सदन के इस फैसले को गलत ठहराया था। उन्होंने एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में इस फैसले को वापस लेने के निर्देश दिए थे। हालांकि, सदन ने इस फैसले को वापस नहीं लिया है।
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26 फरवरी को होगी प्री-बिड बैठक
यह परियोजना अगले करीब 15 वर्षों के लिए होगी, इसलिए आरएफपी जारी करने से पहले भी निगम ने इच्छुक कंपनियों से चर्चा की थी। इसके अलावा 26 फरवरी को एक प्री-बिड बैठक भी रखी गई है। प्री-आरएफपी बैठक में बैंक के अलावा ऐसी कई कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए जो एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, मॉल और दूसरे शहरों में पार्किंग का काम कर रही हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन कुल करीब 12 कंपनियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कई सुझाव दिए, जिन पर विचार करने के बाद नगर निगम ने अब टेंडर जारी कर दिया है।
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पिछली गलतियों से सबक, जॉइंट खाते में आएंगे पैसे
पार्किंग घोटाले से सीख लेते हुए निगम ने कई शर्तों में बदलाव किए हैं। सबसे अहम यह है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा दिया जाएगा। पार्किंगों से जो रोजाना पैसों का कलेक्शन होगा, वह जॉइंट खाते में जाएंगे। कोई भी एक कंपनी, पैसों को दूसरे खाते में ट्रांसफर नहीं कर सकेगी। कैश को रोजाना जमा कराना होगा। अब तक जितने भी पार्किंग के ठेके दिए गए हैं, उसमें रोजाना के पैसों का कलेक्शन कंपनी करती थी और महीने में निगम को फीस देती थी। नगर निगम सदन की ओर से पारित प्रस्ताव के आधार पर टेंडर जारी किया गया है। इसमें दोपहिया वाहनों की पार्किंग मुफ्त होने और ट्राइसिटी से बाहर के वाहनों पर दोगुना पार्किंग फीस लेने का फैसला है। नगर निगम की सदन की बैठक में पार्षदों ने सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पास किया था। प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने सदन के इस फैसले को गलत ठहराया था। उन्होंने एडवाइजरी काउंसिल की बैठक में इस फैसले को वापस लेने के निर्देश दिए थे। हालांकि, सदन ने इस फैसले को वापस नहीं लिया है।
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