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Chandigarh News: एक साथ तीन जन औषधि केंद्र का टेंडर, महीनों बाद खुला सिर्फ एक ही
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चंडीगढ़। सरकारी अस्पतालों में सस्ती दवाएं मुहैया कराने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री जन औषधि योजना फिर चर्चा में है लेकिन इस बार देरी और लापरवाही इसकी वजह से। चंडीगढ़ में एक साथ तीन जन औषधि केंद्रों के लिए टेंडर जारी किए गए थे, मनीमाजरा, सेक्टर-45 और सेक्टर-22 के सिविल अस्पतालों में लेकिन अलाटमेंट के बावजूद महीनों बीत जाने के बावजूद सिर्फ सेक्टर-22 अस्पताल में ही केंद्र शुरू हो पाया है जबकि बाकी दो जगहों पर अब भी ताले लटके हैं।
मनीमाजरा और सेक्टर-45 अस्पतालों में आने वाले मरीजों को अभी तक सस्ती जेनेरिक दवाओं की सुविधा नहीं मिल पाई है। कई मरीज रोजाना निराश होकर लौट जाते हैं या महंगी दवाएं निजी दुकानों से खरीदने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने इन केंद्रों को जल्दी शुरू करने का वादा किया था लेकिन हकीकत में कोई काम आगे नहीं बढ़ रहा। सूत्रों के अनुसार तीनों केंद्र एक ही व्यक्ति को अलॉट किया गया है। इसके बावजूद उसे शुरू करने में देरी होने का कारण समझ से परे है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस देरी पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि केंद्रों को चालू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
जन औषधि केंद्रों का मकसद गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सस्ती और भरोसेमंद दवाएं उपलब्ध कराना है लेकिन इस तरह की देरी से न सिर्फ मरीजों की परेशानी बढ़ रही है बल्कि योजना की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बाकी दोनों केंद्रों को जल्द से जल्द शुरू किया जाए ताकि मरीजों को राहत मिल सके और योजना का असली उद्देश्य पूरा हो सके। जीएमएसएच 16 में संचालित जन औषधि केंद्र रात 8 बजे ही बंद हो जाती है जिससे मरीजों को 24 घंटे सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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मनीमाजरा और सेक्टर-45 अस्पतालों में आने वाले मरीजों को अभी तक सस्ती जेनेरिक दवाओं की सुविधा नहीं मिल पाई है। कई मरीज रोजाना निराश होकर लौट जाते हैं या महंगी दवाएं निजी दुकानों से खरीदने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने इन केंद्रों को जल्दी शुरू करने का वादा किया था लेकिन हकीकत में कोई काम आगे नहीं बढ़ रहा। सूत्रों के अनुसार तीनों केंद्र एक ही व्यक्ति को अलॉट किया गया है। इसके बावजूद उसे शुरू करने में देरी होने का कारण समझ से परे है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस देरी पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि केंद्रों को चालू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
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जन औषधि केंद्रों का मकसद गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सस्ती और भरोसेमंद दवाएं उपलब्ध कराना है लेकिन इस तरह की देरी से न सिर्फ मरीजों की परेशानी बढ़ रही है बल्कि योजना की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बाकी दोनों केंद्रों को जल्द से जल्द शुरू किया जाए ताकि मरीजों को राहत मिल सके और योजना का असली उद्देश्य पूरा हो सके। जीएमएसएच 16 में संचालित जन औषधि केंद्र रात 8 बजे ही बंद हो जाती है जिससे मरीजों को 24 घंटे सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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