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मंदिर खुले पर भक्त नदारद
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चंडीगढ़। कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के बाद 8 जून को सभी धार्मिक स्थल खुले। लॉकडाउन के कारण लोग घरों में ही रहे। सभी धार्मिक स्थल बंद रहे। मंदिर भी बंद रहा, लेकिन मंदिर प्रबंधन का खर्च बंद नहीं हुआ। इस दौरान न चढ़ावा आया न पुजारियों को कोई काम मिला।
अब जब अनलॉक-1 आया तो आस बंधी कि भक्त मंदिर में आएंगे। मंदिर के दान पात्र भी भरेंगे और पुजारियों की आमदनी भी बढ़ेगी। अनलॉक-1 के चार दिन बीत जाने के बाद भी भक्त मंदिरों की ओर रुख नहीं कर रहे हैं। मंदिर में जो भी आता है, वह दर्शन करके बाहर निकल जाता है। हाल यह है कि पुजारियों को प्रणाम करने के बाद भक्त अपने-अपने घरों को चले जा रहे हैं। यही कारण है चिंता का।
सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर को संचालित करने वाली संस्था श्री कृष्ण भक्ति आश्रम मंडल के अध्यक्ष राकेश पाल मोदगिल का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान मंदिर में कोई चढ़ावा नहीं आया, लेकिन खर्च उतना ही रहा। पुजारियों के वेतन, बिजली, पानी और सफाई के खर्च के अलावा भगवान के भोग का भी खर्च शामिल है। जब अनलॉक हुआ तो लगा कि मंदिर में पहले जैसी स्थिति आ जाएगी, लेकिन भक्त मंदिर की ओर नहीं आ रहे हैं। यदि आए भी तो बहुत ही कम। ऐसे ही हालात एक दो महीना तक रहा तो काफी मुश्किल हो जाएगी।
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उन्होंने कहा कि मंदिर की ओर से गरीब बच्चों के लिए फीस, गरीब कन्याओं की शादी, विद्यार्थियों का स्कूल ड्रेस प्रदान किया जाता है। यदि भक्त मंदिर में नहीं आए और दान नहीं किया तो मंदिर कमेटी की ओर से की जाने वाली सामाजिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा।
सेक्टर 29 के सिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर के प्रधान विनोद कुमार चड्ढा ने कहा कि मंदिर का खर्च काफी है। अब आमदनी शून्य हो गई है। आने वाले दिन मुश्किल भरे होंगे।
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अब जब अनलॉक-1 आया तो आस बंधी कि भक्त मंदिर में आएंगे। मंदिर के दान पात्र भी भरेंगे और पुजारियों की आमदनी भी बढ़ेगी। अनलॉक-1 के चार दिन बीत जाने के बाद भी भक्त मंदिरों की ओर रुख नहीं कर रहे हैं। मंदिर में जो भी आता है, वह दर्शन करके बाहर निकल जाता है। हाल यह है कि पुजारियों को प्रणाम करने के बाद भक्त अपने-अपने घरों को चले जा रहे हैं। यही कारण है चिंता का।
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सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर को संचालित करने वाली संस्था श्री कृष्ण भक्ति आश्रम मंडल के अध्यक्ष राकेश पाल मोदगिल का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान मंदिर में कोई चढ़ावा नहीं आया, लेकिन खर्च उतना ही रहा। पुजारियों के वेतन, बिजली, पानी और सफाई के खर्च के अलावा भगवान के भोग का भी खर्च शामिल है। जब अनलॉक हुआ तो लगा कि मंदिर में पहले जैसी स्थिति आ जाएगी, लेकिन भक्त मंदिर की ओर नहीं आ रहे हैं। यदि आए भी तो बहुत ही कम। ऐसे ही हालात एक दो महीना तक रहा तो काफी मुश्किल हो जाएगी।
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उन्होंने कहा कि मंदिर की ओर से गरीब बच्चों के लिए फीस, गरीब कन्याओं की शादी, विद्यार्थियों का स्कूल ड्रेस प्रदान किया जाता है। यदि भक्त मंदिर में नहीं आए और दान नहीं किया तो मंदिर कमेटी की ओर से की जाने वाली सामाजिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा।
सेक्टर 29 के सिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर के प्रधान विनोद कुमार चड्ढा ने कहा कि मंदिर का खर्च काफी है। अब आमदनी शून्य हो गई है। आने वाले दिन मुश्किल भरे होंगे।