Haryana Weather News: बारिश से पांच डिग्री गिरा पारा, कैथल-इंद्री में गिरे ओले, 12 शहरों में छा सकती धुंध
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीबी सिंह का कहना है कि मौसम में आए बदलाव का असर गेहूं की फसल पर होगा। अगेती व 20 दिनों पहले बुआई की जा चुकी गेहूं में हल्की बारिश से फायदा होगा, वहीं पछेती और पिछले पांच से सात दिन पहले की गई बुआई पर इसका नुकसान हो सकता है।
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पश्चिमी विक्षोभ के असर से गुरुवार को हरियाणा के 11 शहरों में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं तेज बारिश देखने को मिली। कैथल और इंद्री में ओलावृष्टि हुई। कुछ शहरों में दिन के दौरान ही अंधेरा छा गया था। बारिश से हरियाणा के शहरों में पांच डिग्री तक तापमान में गिरावट देखी गई। इससे सर्दी बढ़ गई है। मौसम विभाग के मुताबिक बारिश के बाद शुक्रवार को 12 शहरों में सुबह के वक्त घना कोहरा छा सकता है। इसके लिए विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है।
धुंध का असर यातायात पर पड़ सकता है। इसलिए लोगों को आवगमन के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. मदन खिचड़ ने बताया कि दो दिसंबर से पांच दिसंबर के दौरान मौसम आमतौर पर खुश्क रहेगा। उत्तरी व उत्तर पश्चिमी हवाएं चलने से रात के तापमान में गिरावट आएगी। वहीं, दिन में फिलहाल अभी ठंड नहीं बढ़ेगी।
वहीं, अंबाला में पांच डिग्री तापमान की गिरावट दर्ज की गई। जबकि रोहतक में 4.9, नारनौल में 2.8 की गिरावट रिकॉर्ड की गई। हरियाणा के पंचकूला, अंबाला, कैथल, कुरुक्षेत्र में सुबह से ही बादल छाए थे। पंचकूला और अंबाला में सुबह से ही पूरे दिन रुक-रुक बारिश होती रही। कैथल में 20 एमएम, कुरुक्षेत्र में 15 एमएम, अंबाला में 20 एमएम, कुरुक्षेत्र में पांच एमएम बारिश दर्ज की गई। पानीपत, यमुनानगर, हिसार, सोनीपत, रेवाड़ी और नारनौल में हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई। घने बादल छाने से हाईवे और शहर में दिन में भी वाहन चालकों को लाइट जलानी पड़ी। कैथल समेत अन्य अनाज मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ा धान भीग गया। वहीं झज्जर में सीजन की पहली धुंध पड़ी। दृश्यता 15 मीटर से कम रही।
इन जिलों में पड़ सकती है धुंध
मौसम विभाग ने पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, गुरुग्राम, मेवात, पलवल, फरीदाबाद, फतेहाबाद और हिसार में धुंध की चेतावनी जारी की है।
गेहूं की पछेती बिजाई के साथ सब्जियों को भी नुकसान: डॉ. सिंह
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीबी सिंह का कहना है कि मौसम में आए बदलाव का असर गेहूं की फसल पर होगा। अगेती व 20 दिनों पहले बुआई की जा चुकी गेहूं में हल्की बारिश से फायदा होगा, वहीं पछेती और पिछले पांच से सात दिन पहले की गई बुआई पर इसका नुकसान हो सकता है। सब्जियों की फसलों पर भी इस मौसम का विपरीत असर पड़ सकता है। खासतौर से ओलावृष्टि वाले क्षेत्र में गेहूं की फसल और सब्जियों को अधिक नुकसान होगा।
सोनीपत में एक्यूआई 348 पहुंचा
सोनीपत में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) काफी तेजी से बढ़कर 348 तक पहुंच गया था। ग्रैप-3 के नियम हटने के बाद प्रदूषण का स्तर फिर से तेजी से बढ़ा। हालांकि शाम को फिर से बूंदाबांदी का दौर शुरू हो गया। इससे अब फिर से सांसों में घुल रहे प्रदूषण के जहर से राहत मिलने की उम्मीद है। बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट आने की संभावना है।
दो सालों से कम हो रही थी बारिश, इस बार 27 फीसदी अधिक
नवंबर महीने में पिछले दो सालों से सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की जा रही थी। इस बार 30 नवंबर तक हरियाणा में 4.8 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई, जो सामान्य से 27 फीसदी ज्यादा रिकॉर्ड की गई। साल 2022 में 0.3 और साल 2021 में बिल्कुल बारिश नहीं हुई थी। इस साल सबसे ज्यादा बारिश झज्जर में रिकॉर्ड हुई। यहां करीब 22 एमएम बारिश हुई। सबसे कम बारिश सिरसा में हुई। यहां 0.2 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई।