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सुविधा : महामारी के दौर में उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए टेली मेडिसिन बनी वरदान

Mon, 12 Apr 2021 09:52 PM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 12 Apr 2021 09:52 PM IST
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Tele medicine became a boon for high blood pressure patients during Corona period
चंडीगढ़। टेलीमेडिसिन कोविड-19 महामारी के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों के लिए वरदान साबित हुई है। स्ट्रेंगथनिंग मैनेजमेंट ऑफ हाइपरटेंशन सर्विसेज प्रोजेक्ट से चंडीगढ़ से सटे क्षेत्रों समेत ग्रामीण पंजाब में अब तक 32,000 मरीज इसका लाभ ले चुके हैं। एक साल पहले पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा एवं स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ विभाग ने यह परियोजना शुरू की थी। इस प्रोजेक्ट के एक साल पूरे होने पर पीजीआई के परियोजना संचालकों और पंजाब के विशेषज्ञों ने सोमवार को प्रेस क्लब में इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
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प्रोजेक्ट के प्रधान अन्वेषक (प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर) व पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा के डॉक्टर सोनू गोयल ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य पंजाब सरकार के टेलीमेडिसिन ओपीडी पोर्टल-ई संजीवनी को तकनीकी सहायता प्रदान करना है ताकि कोविड-19 महामारी के समय में स्वास्थ्य देखभाल की बढ़ती चुनौतियों को कम किया जा सके। इस दौरान स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों को बेहतर और सशक्त बनाने, खाद्य चक्र से ट्रांस फैट को समाप्त करने जैसे विषय इस परियोजना का एक हिस्सा रहा है। इस प्रयास में डीसीएम एंड एसपीएच ने पंजाब में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को बेहतर बनाने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की। इंटरनेट सुविधा दुरुस्त रखने के लिए 400 वाई-फाई डोंगल वितरित किए गए और नियमित रूप से जरूरी निगरानी की गई। हेल्थ सेंटर में टेलीमेडिसिन सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए हब एंड स्पोक्स मॉडल का पालन किया गया।
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पंजाब के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. अरीत कौर ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (सीएचडब्ल्यू) और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) की क्षमता बढ़ाई गई। गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की स्क्रीनिंग सीएचओ द्वारा हेल्थ सेंटर में ही की गई। स्क्रीनिंग के बाद, हब में मौजूद डॉक्टरों से जुड़े सीएचओ ने ई-संजीवनी सॉफ्टवेयर के जरिए इलाज शुरू किया गया और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में उपलब्ध दवाएं दी गईं। अब तक, एचडब्ल्यूसी में 32,000 टेली कंसल्टेशन किए जा चुके हैं।
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पीजीआई के आंतरिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर, डॉ. आशीष भल्ला ने कहा कि टेलीमेडिसिन और ई-संजीवनी के जरिए उच्च रक्तचाप के 15 लाख मामलों की जांच की गई। इस अवसर पर पीजीआई के प्रो. धीरज खुराना, डॉ. पूनम खन्ना के साथ ही हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. टीपी सिंह ने भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम में कार्डियो हेल्थ न्यूज लेटर के नवीनतम अंक का विमोचन भी किया गया।
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