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टीम इंडिया के इस चहेते को विदेशी भी देते हैं सम्मान, जानिए वजह
संजीव पंगोत्रा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 26 Nov 2016 09:27 AM IST
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धर्मवीर
- फोटो : अमर उजाला
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देश के किसी कोने में वनडे हो, टेस्ट मैच या फिर आइपीएल के मैच हो। ये शख्स जरूर नजर आता है और विदेशी भी इसके दीवाने हैं।
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दिव्यांगता के बावजूद क्रिकेट का जनून इतना कि धर्मवीर वर्ल्ड क्रिकेटरों में अपनी पहचान कायम कर चुके हैं। धोनी, युवराज सिंह, विराट कोहली हों या फिर आस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, वेस्ट इंडीज के जाने माने क्रिकेटर्स, सभी के आंखों के तारे है बालब्वॉय धर्मवीर।
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देश के किसी कोने में भी वनडे, टेस्ट मैच या फिर आइपीएल के मैच हो, वहां वे जरूर मौजूद रहते हैं। विदेशों में आयोजित वर्ल्ड कप के मैचों में बालब्वॅाय के रूप में जा चुके हैं।
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दिलचस्प बात यह है कि यहां पर जाने के लिए भारतीय क्रिकेटर्स और देश के क्रिकेट एसोसिएशन इनकी मदद करती है। भारत और इंग्लैंड के बीच मोहाली में खेले जाने वाले टेस्ट मैच के लिए धर्मवीर शुक्रवार को पीसीए स्टेडियम पहुंचे। वह यहां पर मैदान के पास बाउंड्री पर गेंद को पकड़ते हुए दिखाई देंगे।
बालब्वॉय की शुरूआत इसी स्टेडियम से हुई
टीम इंडिया
- फोटो : अमर उजाला
दिव्यांगता को आड़े नही आने दिया
मूल रूप से मध्य प्रदेश के पीपस्या गांव के रहने वाले 23 वर्षीय धर्र्मवीर तीन भाई बहनों में वह सबसे बड़े हैं। इनके पिता खेतीबाड़ी से घर कर काम चलाते हैं। धर्मवीर जब आठ साल के थे तो बुखार के कारण पोलियो से ग्रस्त हो गए और नतीजन अपने पांव पर खड़े नहीं हो सकते। इसके बावजूद हौसला नहीं हारे। क्रिकेट का शौक था मेहनत की और मध्य प्रदेश हैंडीकैप्ड क्रिकेट के कप्तान बन गए।
बालब्वॉय की शुरूआत इसी स्टेडियम से हुई
धर्मवीर ने बताया कि ‘2004 में पीसीए स्टेडियम मोहाली में भारत- श्रीलंका के बीच वनडे मैच था। मैं यहां पहुंच गया। टीमें अंदर अभ्यास कर रही थीं और मैं बाहर इंतजार कर रहा था। तभी यहां से एक अधिकारी आए।
उन्होंन ही मुझे अंदर भेजा। तब लाइन पर जे भी बाल आती थी मैं उठाकर वापस खिलाड़ी को देता था। यहीं से मेरे बालब्वॉय बनने का सफर शुरू हुआ और जो आज तक चल रहा हैं। धर्मवीर ने बताया कि इतने साल क्रिकेट में बालब्वॉय बनने के चलते आज देश ही नही विदेशों के नामी क्रिकेटर मुझे जानते है और काफी इज्जत देते हैं।
धर्मवीर ने बताया कि 2007 में वेस्ट इंडीज में आयोजित वर्ल्ड कप और वर्ष 2009 मे साउथ अफ्रीका में आईपीएल में वह भारतीय क्रिकेटरों और प्रिटी जिंटा के कारण शिरकत कर चुके हैं।
मूल रूप से मध्य प्रदेश के पीपस्या गांव के रहने वाले 23 वर्षीय धर्र्मवीर तीन भाई बहनों में वह सबसे बड़े हैं। इनके पिता खेतीबाड़ी से घर कर काम चलाते हैं। धर्मवीर जब आठ साल के थे तो बुखार के कारण पोलियो से ग्रस्त हो गए और नतीजन अपने पांव पर खड़े नहीं हो सकते। इसके बावजूद हौसला नहीं हारे। क्रिकेट का शौक था मेहनत की और मध्य प्रदेश हैंडीकैप्ड क्रिकेट के कप्तान बन गए।
बालब्वॉय की शुरूआत इसी स्टेडियम से हुई
धर्मवीर ने बताया कि ‘2004 में पीसीए स्टेडियम मोहाली में भारत- श्रीलंका के बीच वनडे मैच था। मैं यहां पहुंच गया। टीमें अंदर अभ्यास कर रही थीं और मैं बाहर इंतजार कर रहा था। तभी यहां से एक अधिकारी आए।
उन्होंन ही मुझे अंदर भेजा। तब लाइन पर जे भी बाल आती थी मैं उठाकर वापस खिलाड़ी को देता था। यहीं से मेरे बालब्वॉय बनने का सफर शुरू हुआ और जो आज तक चल रहा हैं। धर्मवीर ने बताया कि इतने साल क्रिकेट में बालब्वॉय बनने के चलते आज देश ही नही विदेशों के नामी क्रिकेटर मुझे जानते है और काफी इज्जत देते हैं।
धर्मवीर ने बताया कि 2007 में वेस्ट इंडीज में आयोजित वर्ल्ड कप और वर्ष 2009 मे साउथ अफ्रीका में आईपीएल में वह भारतीय क्रिकेटरों और प्रिटी जिंटा के कारण शिरकत कर चुके हैं।