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Chandigarh News: छात्रा के अपहरण के मामले में शिक्षक को चार साल कैद
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चंडीगढ़। जिला अदालत ने छात्रा के अपहरण के मामले में सरकारी स्कूल के शिक्षक को दोषी करार देते हुए चार साल की कैद और 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। यह फैसला स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की सेशन जज स्वाति सहगल की अदालत ने तथ्यों व सबूतों के आधार पर सुनाया है। दोषी शिक्षक की पहचान सेक्टर-19 के रहने वाले सुनील कुमार के तौर पर हुई है। दोषी शहर के एक सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हिंदी विषय का अध्यापक था। उसने मार्च 2007 में नाबालिग छात्रा का अपहरण किया था। लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ 6 मार्च 2007 को आईपीसी की धारा 363 (अपहरण), 366-ए (नाबालिग लड़की को साथ ले जाने) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया था। सितंबर 2007 में उसके खिलाफ आरोप तय किए गए थे। साल 2009 में अदालत ने दोषी को भगोड़ा घोषित किया था। पुलिस ने इसी साल गिरफ्तार कर लिया था।
पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था शिक्षक
पीड़िता के पिता ने शिकायत में बताया कि उसकी 15 साल की बेटी और एक 12 वर्षीय बेटा है। दोनों बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक उनकी बेटी मार्च 2007 की शाम करीब सात बजे घर से सेक्टर-20 स्थित मंदिर के लिए गई थी, लेकिन वह घर नहीं लौटी। परिवार ने बेटी की तलाश की लेकिन वह कहीं नहीं मिली। उन्होंने स्कूल में पढ़ाने वाले सुनील कुमार पर बेटी के अपहरण करने का शक जताया था। पिता ने पुलिस को बताया था कि कुछ दिन पहले बेटी का जन्मदिन था और उसके शिक्षक ने एक पोर्टेबल सीडी प्लेयर गिफ्ट दिया था। इसके बाद पुलिस में बेटी के गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और पांच दिन के बाद नाबालिग को उत्तराखंड के बागेश्वर से ढूंढ निकाला था। हालांकि शिक्षक पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था।
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पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था शिक्षक
पीड़िता के पिता ने शिकायत में बताया कि उसकी 15 साल की बेटी और एक 12 वर्षीय बेटा है। दोनों बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक उनकी बेटी मार्च 2007 की शाम करीब सात बजे घर से सेक्टर-20 स्थित मंदिर के लिए गई थी, लेकिन वह घर नहीं लौटी। परिवार ने बेटी की तलाश की लेकिन वह कहीं नहीं मिली। उन्होंने स्कूल में पढ़ाने वाले सुनील कुमार पर बेटी के अपहरण करने का शक जताया था। पिता ने पुलिस को बताया था कि कुछ दिन पहले बेटी का जन्मदिन था और उसके शिक्षक ने एक पोर्टेबल सीडी प्लेयर गिफ्ट दिया था। इसके बाद पुलिस में बेटी के गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और पांच दिन के बाद नाबालिग को उत्तराखंड के बागेश्वर से ढूंढ निकाला था। हालांकि शिक्षक पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था।
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