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गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर चंडीगढ़ में जैन मुनिश्री तरुण सागर ने दी ये सीख
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 20 Jul 2016 06:38 PM IST
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संत तरूण सागर
- फोटो : amar ujala
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गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर चंडीगढ़ में जैन मुनिश्री तरुण सागर ने अपने कड़वे प्रवचन में कुछ सीखें दी हैं। गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर जैन मुनिश्री तरुण सागर ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को दो चीजों से हमेशा दूर रहना चाहिए एक तो क्रोध व दूसरा अहंकार।
यह दोनों चीजें मनुष्य के जीवन को नर्क बना देती हैं। जिस मनुष्य के पास धन नहीं होता उसे नींद से उठाने की जरूरत पड़ती है लेकिन जिसके पास धन होता है उसे सुलाने के लिए नींद की गोलियां देनी पड़ती है। इसलिए धन का लोभ त्यागें और धर्म की राह पर चलिए।
उन्होंने कहा कि हमें गुरु का हाथ नहीं पकड़ना चाहिए बल्कि गुरु को अपना हाथ पकड़ाना चाहिए क्योंकि मुश्किल समय में हम गुरु का हाथ छोड़ सकते हैं लेकिन गुरु हमारा हाथ कभी नहीं छोड़ेगा।
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यह दोनों चीजें मनुष्य के जीवन को नर्क बना देती हैं। जिस मनुष्य के पास धन नहीं होता उसे नींद से उठाने की जरूरत पड़ती है लेकिन जिसके पास धन होता है उसे सुलाने के लिए नींद की गोलियां देनी पड़ती है। इसलिए धन का लोभ त्यागें और धर्म की राह पर चलिए।
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उन्होंने कहा कि हमें गुरु का हाथ नहीं पकड़ना चाहिए बल्कि गुरु को अपना हाथ पकड़ाना चाहिए क्योंकि मुश्किल समय में हम गुरु का हाथ छोड़ सकते हैं लेकिन गुरु हमारा हाथ कभी नहीं छोड़ेगा।
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