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बड़ा फैसलाः विदेश में दिए गए तलाक को भारत में चुनौती दी जा सकती है
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 22 Mar 2017 12:27 PM IST
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महिलाओं के लिए राहत भरी खबर। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने तलाक के एक केस में बड़ा ही अहम फैसला सुनाया है। इसके तहत विदेशी अदालत द्वारा दिए गए आदेशों में यदि कोई कानूनी खामी है तो उसे देश की अदालत में भी चुनौती दी जा सकती है।
यह अहम फैसला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आस्ट्रेलिया से पति को तलाक भेजने वाली महिला के पति की अपील पर सुनवाई के दौरान सुनाया। मामले में याचिकाकर्ता के वकील सुखविंदर सिंह नारा ने बताया की याचिकाकर्ता सुभाष कुमार करनाल का रहने वाला है।
याची भारतीय नागरिक है और उसका विवाह 2016 में स्वीटी जिंदल से हिंदू रीति- रिवाज से हुआ था। शादी के बाद लड़की अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए आस्ट्रेलिया चली गई और पति भारत में ही रह रहा था।
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इसी बीच 2016 में युवती ने मेलबोर्न (आस्ट्रेलिया) की फेडरल सर्किट कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर दी थी। याचिका को कोर्ट ने मंजूर कर लिया था और तलाक का आदेश पारित कर दिया था।
यह तलाक का आदेश याची को भारत में प्राप्त हुआ, जिसके खिलाफ विदेश की कोर्ट में कोई अपील दायर न की गई थी। याची ने इस आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया।
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यह अहम फैसला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आस्ट्रेलिया से पति को तलाक भेजने वाली महिला के पति की अपील पर सुनवाई के दौरान सुनाया। मामले में याचिकाकर्ता के वकील सुखविंदर सिंह नारा ने बताया की याचिकाकर्ता सुभाष कुमार करनाल का रहने वाला है।
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याची भारतीय नागरिक है और उसका विवाह 2016 में स्वीटी जिंदल से हिंदू रीति- रिवाज से हुआ था। शादी के बाद लड़की अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए आस्ट्रेलिया चली गई और पति भारत में ही रह रहा था।
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इसी बीच 2016 में युवती ने मेलबोर्न (आस्ट्रेलिया) की फेडरल सर्किट कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर दी थी। याचिका को कोर्ट ने मंजूर कर लिया था और तलाक का आदेश पारित कर दिया था।
यह तलाक का आदेश याची को भारत में प्राप्त हुआ, जिसके खिलाफ विदेश की कोर्ट में कोई अपील दायर न की गई थी। याची ने इस आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया।
इंटरनेशनल कानून का पालन नहीं
कोर्ट
याची के वकील सुखविंदर नारा ने दलील पेश करते हुए कहा कि विदेशी न्यायालय का फैसला अंतरराष्ट्रीय कानून, हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13, सीपीसी की धारा 13 व 1965 की हेग क न्वेंशन के अनुकूल नहीं है।
याची ने कहा कि इन सभी कानूनों के अनुरूप न होने के चलते इस आदेश की कोई कानूनी वैधता नहीं है। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एमएमएस बेदी ने कहा कि विदेशी न्यायालय का आदेश भी भारतीय सिविल कोर्ट में दावा दायर करके चैलेंज किया जा सकता है।
पंजाब की महिलाओं की संख्या अधिक
हाईकोर्ट के इस फैसले से ऐसे लोगों को फायदा मिलेगा जिनके खिलाफ विदेशी कोर्ट ने तलाक के आदेश पारित किए हैं। विदेशी कोर्ट में अपील दाखिल करने में अक्षम लोगों की बड़ी संख्या है।
पंजाब में यह देखने में आता है कि यहां आकर शादी कर वापस लौटने वाले विदेश जाकर तलाक के आदेश भेज देते हैं। विदेश में तलाक आसानी से मिल जाता है और अक्सर भारतीय लड़कियां विदेशी कोर्ट होने के चलते अपील दाखिल नहीं कर पाती हैं।
याची ने कहा कि इन सभी कानूनों के अनुरूप न होने के चलते इस आदेश की कोई कानूनी वैधता नहीं है। याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एमएमएस बेदी ने कहा कि विदेशी न्यायालय का आदेश भी भारतीय सिविल कोर्ट में दावा दायर करके चैलेंज किया जा सकता है।
पंजाब की महिलाओं की संख्या अधिक
हाईकोर्ट के इस फैसले से ऐसे लोगों को फायदा मिलेगा जिनके खिलाफ विदेशी कोर्ट ने तलाक के आदेश पारित किए हैं। विदेशी कोर्ट में अपील दाखिल करने में अक्षम लोगों की बड़ी संख्या है।
पंजाब में यह देखने में आता है कि यहां आकर शादी कर वापस लौटने वाले विदेश जाकर तलाक के आदेश भेज देते हैं। विदेश में तलाक आसानी से मिल जाता है और अक्सर भारतीय लड़कियां विदेशी कोर्ट होने के चलते अपील दाखिल नहीं कर पाती हैं।