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बेटे की जिम्मेदारी उठाते हुए गुरबक्श और नितिन कोरोना के मरीजों के बीच कर रहे ड्यूटी
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गुरबक्श और नितिन अपने बेटे के साथ।
- फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। जीएमसीएच- 32 में तैनात स्टाफ नर्स गुरबक्श कौर और एनेस्थीसिया टेक्नीशियन के पद पर कार्यरत उनके पति नितिन डेढ़ महीने से लगातार अस्पताल में ड्यूटी कर रहे हैं। गुरबक्श एंटीनेटल वार्ड में तो नितिन कोविड आईसीयू में ड्यूटी कर रहे हैं। इनका घर पर एक साल का बेटा दक्ष भी है। सास ससुर के इस समय साथ न होने के कारण इन्हें ड्यूटी के साथ-साथ खतरे के बीच अपने बेटे की भी जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। गुरबक्श का कहना है कि जिस तरह हम बेटे की जिम्मेदारी से मुंह नहीं फेर सकते, ठीक वैसे ही इस समय देश को कोरोना से बचाने में हमें अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वाह करना होगा।
सुबह-शाम की ड्यूटी बांटकर हो रहा काम
गुरबक्श ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौर में हम दोनों को एक साथ ड्यूटी करने से राहत मिल सकते थी, लेकिन हमने छुट्टी लेने की बजाए समझदारी से अपना फर्ज निभाने का निर्णय लिया। इसके अंतर्गत मैं सुबह तो पति नाइट शिफ्ट की ड्यूटी कर रहे हैं। ऐसा करने से हम बारी-बारी से ड्यूटी करने के साथ ही अपने बच्चे की देखभाल भी ठीक तरह से कर पा रहे हैं। मेरा यह मानना है कि अगर मैं छुट्टी लेकर घर पर बैठ जाती और पति अकेले ड्यूटी करते तो मुझे यह मलाल अंदर ही अंदर परेशान करता रहता कि इस संकट की घड़ी में मैं अपने फर्ज को निभाने में नाकाम रही। इसलिए हम दोनों ने मिलकर इस समस्या का समाधान निकाला। हम ड्यूटी के दौरान पूरी सुरक्षा और सावधानी बरतने के साथ ही घर आने के बाद भी बच्चे के कारण हर स्तर पर एहतियात बरतते हैं।
परिवार से मिलती है हिम्मत
नितिन के पिता आर्मी से रिटायर हैं, ऐसे में घर में अनुशासन और हिम्मत की बातें होना आम है। गुरबक्श ने बताया कि कोरोना आईसीयू में ड्यूटी लगने पर हमें थोड़ा डर तो जरूर लगा था। लेकिन ससुर जी की बातों से वह पूरी तरह खत्म हो गया। उनका कहना है कि हिम्मत के आगे हर मुसीबत छोटी हो जाती है अगर मिलकर किसी भी संकट से निबटने की ठान ली जाए तो अपनी जीत पक्की है । वह प्रतिदिन कॉल करके हम दोनों से बारी-बारी बात करते हैं और अपने ड्यूटी के दौरान की आर्मी से जुड़ी बातें बताकर हमारे अंदर हिम्मत बढ़ाते हैं।
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सुबह-शाम की ड्यूटी बांटकर हो रहा काम
गुरबक्श ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौर में हम दोनों को एक साथ ड्यूटी करने से राहत मिल सकते थी, लेकिन हमने छुट्टी लेने की बजाए समझदारी से अपना फर्ज निभाने का निर्णय लिया। इसके अंतर्गत मैं सुबह तो पति नाइट शिफ्ट की ड्यूटी कर रहे हैं। ऐसा करने से हम बारी-बारी से ड्यूटी करने के साथ ही अपने बच्चे की देखभाल भी ठीक तरह से कर पा रहे हैं। मेरा यह मानना है कि अगर मैं छुट्टी लेकर घर पर बैठ जाती और पति अकेले ड्यूटी करते तो मुझे यह मलाल अंदर ही अंदर परेशान करता रहता कि इस संकट की घड़ी में मैं अपने फर्ज को निभाने में नाकाम रही। इसलिए हम दोनों ने मिलकर इस समस्या का समाधान निकाला। हम ड्यूटी के दौरान पूरी सुरक्षा और सावधानी बरतने के साथ ही घर आने के बाद भी बच्चे के कारण हर स्तर पर एहतियात बरतते हैं।
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परिवार से मिलती है हिम्मत
नितिन के पिता आर्मी से रिटायर हैं, ऐसे में घर में अनुशासन और हिम्मत की बातें होना आम है। गुरबक्श ने बताया कि कोरोना आईसीयू में ड्यूटी लगने पर हमें थोड़ा डर तो जरूर लगा था। लेकिन ससुर जी की बातों से वह पूरी तरह खत्म हो गया। उनका कहना है कि हिम्मत के आगे हर मुसीबत छोटी हो जाती है अगर मिलकर किसी भी संकट से निबटने की ठान ली जाए तो अपनी जीत पक्की है । वह प्रतिदिन कॉल करके हम दोनों से बारी-बारी बात करते हैं और अपने ड्यूटी के दौरान की आर्मी से जुड़ी बातें बताकर हमारे अंदर हिम्मत बढ़ाते हैं।
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