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‘तोता बोलता’ रहा, मुख्तारा का दर्द सुनाता रहा

Thu, 28 Nov 2013 10:10 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 28 Nov 2013 10:10 AM IST
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tagore theatre_theatre lab_natak manchan_chandigarh
थियेटर लैब की प्रस्तुति ‘तोता बोलता’ ने टैगोर थियेटर में दर्शकों को अपना दीवाना बना लिया। यह यूपी पर आधारित चंद्रशेखर कंबार की लिखी कहानी है। यह एक प्रथा और मान्यता पर आधारित है।
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इसमें दिखाया गया है कि पूर्णमासी पर बनाई गई सब्जी खिलाने से बांझ औरत गर्भवती हो जाती है। इसमें एक खास फल की पूजा की जाती है और वही फल खिला दिया जाता है।
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कहानी शुरू होती है गांव के सबसे खतरनाक इंसान से। उसका नाम है गौड़ा। उसका कोई बच्चा नहीं था। पत्नी गौड़ती को पता चलता है कि पूर्णमासी के दिन पूजा करने और पति को सब्जी खिलाने से बच्चा हो जाएगा।
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वह यह सब्जी गौड़ा के दुश्मन बसन्ना को खिला देती है। बसन्ना सब्जी खाते ही दूसरे रंग में रंग जाता है। सब्जी खिलाने के बाद गौड़ती पूछती है कि तोता कहां से बोला तो बसन्ना बताता है कि पेड़ के पीछे रखा है।


बसन्ना उसको तोता देने जाता है तो दोनों ही उस सब्जी के कारण एक दूसरे से संबंध बना बैठते हैं। जब गौड़ा को मालूम पड़ता है तो वह बसन्ना को मरवा देता है।

नाटक में जगदीश तिवारी ने गौड़ा, ईशा ने गौड़ती, धीरज ने बसन्ना,  जगजीत संधू ने गुरिया, पूजा ढींगरा ने निंगी और प्रदीप चीमा, प्रदीप, जगजीत, बलकार, पाली संधू ने सुरक्षाकर्मी की भूमिका निभाई।
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