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चंडीगढ़ के टैगोर थिएटर में कलाकारों ने मंच पर दिखाया 'रैटरो'
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Tue, 29 Mar 2016 08:44 AM IST
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रैटरो नाटक का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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एक बुजुर्ग की पत्नी के गुजरने के बाद कैसे उसके हालात बदलते हैं और बच्चों के साथ होने के बावजूद कैसे वह खुद को तन्हा महसूस करता है। इस पर बेटी और दामाद पिता के अकेलेपन को दूर करने के लिए फिर से उनकी शादी करवाने की योजना बनाते हैं। संजीदगी से शुरू हुई कहानी में कैसे अचानक मोड़ आता है और वह हास्य में बदल जाता है। यह सब दिखाया गया टैगोर थिएटर में सोमवार से शुरू हुए चार दिवसीय नेशनल थिएटर फेस्टिवल के पहले दिन के नाटक ‘रैटरो’ में।
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घंड़ूआं और चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से विश्व रंगमंच दिवस पर आयोजित चार दिवसीय फेस्टिवल के पहले दिन प्रसिद्ध डायरेक्टर रवि तनेजा के निर्देशित ‘रैटरो’ का मंचन हुआ। यह नाटक रूसी लेखक अलेग्जेंडर की कहानी पर आधारित है। वेद कुमार द्वारा अनुवादित नाटक में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग की एकांत भरी जिंदगी को व्यंग्यमय तरीके से दिखाया गया है।
नाटक का मुख्य पात्र निकोलायी अपनी पत्नी की मौत के बाद अकेला हो जाता है। इस पर उसकी बेटी लुडमिला और दामाद ल्योनिद उसे अपने पास शहर ले आते हैं, लेकिन निकोलायी को शहर की तड़क-भड़क भरी जिंदगी रास नहीं आती। वह भीड़ में भी खुद को अकेला महसूस करता है और अपनी पहली वाली जिंदगी को याद करता है। उसकी बेटी और दामाद उसका अकेलापन दूर करने के लिए उसकी फिर से शादी की योजना बनाते हैं।
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इस पर दोनों निकोलायी के पास तीन अकेले रहने वाली महिलाओं को उसके पास मिलने के लिए भेजते हैं। इसके बाद निकोलायी को एक-एक कर मिलने आई महिलाओं की एकांत भरी जिंदगी और उनके दुखों को पेश करते हुए उसमें हास्य के पुट डाले गए हैं। इससे दर्शकों को सभी पात्रों की एकांत भरी जिंदगी से हमदर्दी होती है, वहीं अंत में हास्य की फुहारें भी छूटीं।
मंगलवार को ‘दूसरा आदमी दूसरी औरत’ का मंचन
चार दिवसीय फेस्टिवल में मंगलवार को रवि मोहन द्वारा निर्देशित नाटक ‘दूसरा आदमी दूसरी औरत’ का मंचन किया जाएगा। नाटक का विषय आधुनिक समय में घट रहे सांझे परिवार का रुझान है। नाटक शाम 6:30 बजे शुरू होगा।
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चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी घंड़ूआं और चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की ओर से विश्व रंगमंच दिवस पर आयोजित चार दिवसीय फेस्टिवल के पहले दिन प्रसिद्ध डायरेक्टर रवि तनेजा के निर्देशित ‘रैटरो’ का मंचन हुआ। यह नाटक रूसी लेखक अलेग्जेंडर की कहानी पर आधारित है। वेद कुमार द्वारा अनुवादित नाटक में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग की एकांत भरी जिंदगी को व्यंग्यमय तरीके से दिखाया गया है।
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नाटक का मुख्य पात्र निकोलायी अपनी पत्नी की मौत के बाद अकेला हो जाता है। इस पर उसकी बेटी लुडमिला और दामाद ल्योनिद उसे अपने पास शहर ले आते हैं, लेकिन निकोलायी को शहर की तड़क-भड़क भरी जिंदगी रास नहीं आती। वह भीड़ में भी खुद को अकेला महसूस करता है और अपनी पहली वाली जिंदगी को याद करता है। उसकी बेटी और दामाद उसका अकेलापन दूर करने के लिए उसकी फिर से शादी की योजना बनाते हैं।
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इस पर दोनों निकोलायी के पास तीन अकेले रहने वाली महिलाओं को उसके पास मिलने के लिए भेजते हैं। इसके बाद निकोलायी को एक-एक कर मिलने आई महिलाओं की एकांत भरी जिंदगी और उनके दुखों को पेश करते हुए उसमें हास्य के पुट डाले गए हैं। इससे दर्शकों को सभी पात्रों की एकांत भरी जिंदगी से हमदर्दी होती है, वहीं अंत में हास्य की फुहारें भी छूटीं।
मंगलवार को ‘दूसरा आदमी दूसरी औरत’ का मंचन
चार दिवसीय फेस्टिवल में मंगलवार को रवि मोहन द्वारा निर्देशित नाटक ‘दूसरा आदमी दूसरी औरत’ का मंचन किया जाएगा। नाटक का विषय आधुनिक समय में घट रहे सांझे परिवार का रुझान है। नाटक शाम 6:30 बजे शुरू होगा।