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Hindi News ›   Chandigarh ›   Syndicate's term ends after Senate, now eyes on High Court's decision

सीनेट के बाद सिंडिकेट का भी कार्यकाल खत्म, अब निगाहें हाईकोर्ट के फैसले पर

Fri, 01 Jan 2021 02:26 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 01 Jan 2021 02:26 AM IST
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Syndicate's term ends after Senate, now eyes on High Court's decision
चंडीगढ़। सीनेट के बाद सिंडिकेट की कार्यकाल वीरवार को खत्म हो गया। पीयू के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब बिना चुनाव हुए ही दोनों सदनों का कार्यकाल चला गया। इस पर लोग हैरत में हैं तो कुछ खुश भी। हैरत इस बात की है कि पीयू स्वायत्तशासी निकाय थी, लेकिन अब दोनों सदन विदा हो गए। खुशी कुछ लोगों को इस बात की है कि सिंडिकेट व सीनेट का रिफॉर्म हो सकता है या फिर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस बनेगा। इससे पीयू के संचालन के लिए नए रास्ते खुलेंगे। उधर, सीनेट चुनाव करवाने के लिए प्रकरण हाईकोर्ट में चल रहा है। सबकी निगाहें 12 जनवरी के निर्णय पर टिकी हुई हैं। अब सीनेट व सिंडिकेट के अधिकारों का प्रयोग पीयू वीसी करेंगे।
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पीयू अपने में स्वायत्तशासी निकाय है। इसका संचालन दो सदनों के जरिए होता आ रहा था। उच्च सदन में सीनेट व निम्न सदन में सिंडिकेट रही। सिंडिकेट पीयू के हर मामले में निर्णय लेती है। इनके फैसले सीनेट में जाते हैं। दोनों का कार्य लगभग समान ही है। बस सदस्यों की संख्या कम अधिक है। सीनेट के जरिए सिंडिकेट के सदस्यों का चुनाव होता है। हर साल की तरह इस बार भी सीनेट व सिंडिकेट के चुनाव होने थे लेकिन नहीं हो पाए। इसके लिए प्रयास काफी हुए लेकिन सफलता नहीं मिल पाई।
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नहीं दी गई सदस्यों को विदाई
सिंडिकेट एक साल के कार्यकाल के साथ 31 दिसंबर को विदा हो गई। नियमानुसार इस दिन बैठक होती है और सभी पीयू की उपलब्धियों पर चर्चा करते हैं। कार्यकाल की सराहना आदि की जाती है, लेकिन पीयू ने बैठक आयोजित नहीं की। ऑनलाइन बैठक हो सकती थी, लेकिन यह भी नहीं की गई। कोई प्रशंसा पत्र आदि भी जारी नहीं किया गया। इसको लेकर पीयू के शिक्षकों ने नाराजगी जाहिर की। कहा कि कम से कम सिंडिकेट की विदाई तो ठीक से होनी चाहिए थी। साथ ही भविष्य की योजनाओं पर भी बात होनी चाहिए थी।
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अब शुरू होगा आगे का खेल
पीयू के उच्चाधिकारियों की ओर से सीनेट व सिंडिकेट चुनाव इस बार नहीं करवाए गए। इसका कारण असली क्या है? अब यह सामने आएगा, क्योंकि सीनेट व सिंडिकेट का रिफॉर्म होगा या फिर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस बनेगा। हालांकि पीयू प्रशासन ने इसका कारण कोरोना को बताया था। लेकिन राजनीतिक लोगों ने इसका आंकलन दूसरा निकाला है। सूत्रों का कहना है कि जनवरी में खुलासा हो जाएगा कि पीयू का संचालन किसके जरिए होगा। रिफार्म भी हुआ तो कितने सदस्य सीनेट में होंगे। यह भी तय होगा। स्नातक वर्ग के चुनाव के लिए योग्यता आदि भी तय होगी।
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