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Hindi News ›   Chandigarh ›   Sushma Swaraj Told, 39 Indians Died in Iraq, Harjit Masih Interview

हरजीत मसीह पहली बार आया सामने, दिया बड़ा बयान, कहा- सच बोलने की सजा मिली

Mon, 09 Apr 2018 06:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब)
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरदासपुर(पंजाब) Updated Mon, 09 Apr 2018 06:08 PM IST
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Sushma Swaraj Told, 39 Indians Died in Iraq, Harjit Masih Interview
हरजीत सिंह मसीह
इराक में 39 भारतीयों के मारे जाने की खबर का खुलासा होते ही हरजीत मसीह मीडिया से रूबरू हुआ और उसने एक बार फिर बड़ा बयान दे डाला। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ओर से इराक के मोसुल में फंसे 39 भारतीयों की मौत की पुष्टि करने के बाद हरजीत मसीह पुत्र हदैत मसीह निवासी काला अफवाना फतेहगढ़ चूड़िया अपने वकील मुनीष कुमार और बरिंदर अत्री से साथ सामने आया।
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हरजीत मसीह वही शख्स है जो आईएसआईएस के चुंगल से बच निकला था। 2014 से ही वह कह रहा था कि इराक में उसके 39 साथियों को आईएसआईएस ने मार दिया है। उसकी मानें तो सरकार ने उसकी बातों पर ध्यान देने की बजाय पहले उसे नजरबंद रखा। इसके बाद उस पर केस दर्ज करवा दिया।
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उसने सुषमा स्वराज से सवाल किया कि वह झूठा था तो सुषमा स्वराज उन बेगुनाहों के शव सही सलामत लेकर आएं। सरकार ने उसकी और 39 भारतीयों के परिवारों की भावनाओं से खिलवाड़ किया है। इसी कारण उसके पिता की भी मौत हो गई । उसने सरकार से मांग की है कि उस पर दर्ज झूठे केस रद्द करे और 39 मारे गए बेगुनाह नौजवानों के परिजनों को सरकारी नौकरी व माली सहायता दे।
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खुद को बंग्लादेशी बताकर बचा था हरजीत मसीह

Sushma Swaraj Told, 39 Indians Died in Iraq, Harjit Masih Interview
हरजीत सिंह मसीह
अमर उजाला को हरजीत मसीह ने बताया कि 15 जून 2014 को आईएसआईएस के आतंकियों ने कंपनी में काम कर रहे हम 40 भारतीयों को एक टेक्सटाइल कंपनी में भेजने को कहा था। उनके साथ कुछ बांग्लादेशी युवा भी थे। यहां उन्होंने बांग्लादेशियों और भारतीयों को अलग-अलग रखने को कहा। फिर सभी 40 भारतीयों को एक पहाड़ी पर ले गए, जहां घुटनों पर नीचे झुककर बैठने को कहा। जैसे ही वह झुके पीछे से धड़ाधड़ गोलियां चलनी शुरू हो गईं। जो गोली उसे मारी गई वह उसकी टांग को छू कर निकल गई और उसने मरने का नाटक किया और नीचे पड़ा रहा।

इसके बाद में किसी तरह वहां से बच कर निकल गया और एक टैक्सी वाले से मदद लेनी की कोशिश की। लेकिन वह टैक्सी वाला उसे दोबारा उन्हीं आतंकियों के पास ले गया। आतंकियों ने उससे नाम और देश पूछा तो उसने अपना नाम अली और अपने आप को बंग्लादेशी दोनों गलत बताया। उन्होंने कहा कि तुम शिया हो या सुन्नी तो उसने कहा कि अल्लाह एक है। इसके बाद उन्होंने उसे बंग्लादेशी समझकर छोड़ दिया। वह छिपता छिपाता इरबिल बॉर्डर पहुंचा और अंबैसी वालों की मदद से भारत पहुंचा। लेकिन भारत आने पर मुझे एक साल तक नजरबंद रखा गया।

जिसके बाद मेरे उस पर गुरपिंदर कौर ने केस कर दिया गया। इनके वकील मुनीष कुमार ने कहा कि उनके पास पर्याप्त सबूत हैं कि हरजीत मसीह कोई एजेंट नही बल्कि वह वहां काम के लिए गया था। उन्होंने दावा किया कि क्यों 2014 से 2016 तक कोई केस हरजीत मसीह पर नहीं डाला गया। उन्होंने कहा कि हरजीत मसीह और राजबीर सिंह पर आईपीसी धारा 420, 406, 370, 34 तथा इमिग्रेशन एक्ट की धारा 10, 24, 26 के तहत केस दर्ज किया गया है। जो मनजिंदर सिंह पुत्र हरदीप सिंह निवासी बोरवाल (बाबा बकाला) अमृतसर की बहन गुरपिंदर कौर की ओर से किया गया था।
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