फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Survey done in one crore, status of buses as it is

एक करोड़ में कराया सर्वे, बसों की स्थिति जस की तस

Mon, 05 Jul 2021 01:27 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 05 Jul 2021 01:27 AM IST
विज्ञापन
Survey done in one crore, status of buses as it is
चंडीगढ़। शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने गुजरात की सेप्ट यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन अर्बन ट्रांसपोर्ट (सीईयूटी) से एक सर्वे कराया। इस पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च हुए। करीब दो साल बीतने के बावजूद सर्वे की सिफारिशों पर अब तक कोई काम नहीं हुआ। अब चंडीगढ़ परिवहन विभाग नेे सीईयूटी से दूसरा प्लान मांग लिया है।
विज्ञापन

इस संबंध में सेप्ट यूनिवर्सिटी को पत्र भेजकर कहा गया है कि परिवहन विभाग के पास वर्तमान में जो ढांचा है, उसी के अनुरूप कोई योजना बनाकर भेजी जाए। सीईयूटी को दो हफ्ते के भीतर यह योजना तैयार कर भेजने को कहा गया है। ट्रांसपोर्ट विभाग की ओर से सीईयूटी को जो पत्र लिखा गया है उसमें कहा गया है कि फिलहाल चंडीगढ़ परिवहन विभाग के पास 355 बसें हैं। 40 इलेक्ट्रिक बसें आगामी अक्तूबर माह तक सड़कों पर आ जाएंगी। कुल मिलाकर सीटीयू के पास लोकल रूट पर 400 बसों का बेड़ा होगा। विभाग को इन्हीं 400 बसों के अनुरूप योजना बनाकर दी जाए, ताकि इसे जल्द से जल्द मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से लागू किया जा सके। यूनिवर्सिटी को कहा गया है कि वह 400 बसों के हिसाब से आकलन करें कि कौन-कौन से रूट पर नई बसें चलाई जाएं और कौन से नुकसान वाले रूटों से बसें हटाई जाएं। किस रूट पर बसों की कितनी फ्रिक्वेंसी रखनी है। इन सब पहलुओं को देखकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
विज्ञापन

वर्ल्ड बैंक ने दिए थे एक करोड़ रुपये
निदेशक उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि सीईयूटी ने सर्वे के बाद जो सिफारिशें की थीं, वो 750 बसों के हिसाब से थी। उसी के अनुरूप योजना भी बनाई गई। योजना की लागत भी कई करोड़ रुपये बताई गई है। उमाशंकर गुप्ता के मुताबिक, सीटीयू में 750 बसों का बेड़ा अभी नहीं है। भविष्य में कब इतनी बसें होंगी, फिलहाल कहा नहीं जा सकता। पहले जो स्टडी यूनिवर्सिटी से कराई गई थी वह भविष्य में आबादी को देखते हुए तैयार कराई गई थी। इसके लिए वर्ल्ड बैंक से एक करोड़ रुपये यूनिवर्सिटी को दिया गए। अब वर्तमान स्थिति और 400 बसों के हिसाब से लांग टर्म के सुझावों की बजाए शॉर्ट टर्म सुझाव देने के लिए कहा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

चंडीगढ़ के 47 फीसदी इलाकों में नहीं जाती बस
120 पेज की रिपोर्ट में परिवहन विभाग को आइना दिखाते हुए बताया गया है कि सीटीयू बसों के संचालन की योजना ठीक नहीं है। कुछ सेक्टरों में जाने के लिए जरूरत से ज्यादा बसें हैं तो कुछ सेक्टर व इलाकों के लिए बस ही नहीं है। चंडीगढ़ के 47 फीसदी इलाकों में बसें नहीं जाती हैं। एक बस के जाने के बाद दूसरी बस के आने तक लोगों को 20 मिनट से 40 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। वहीं, कुछ मार्गों पर सवारियां बहुत हैं, लेकिन उन मार्गों पर सीटीयू की ओर से बस का संचालन ही नहीं किया जाता। सेप्ट यूनिवर्सिटी ने उदाहरण देते हुए बताया है कि विकास नगर, मलोया, मोहाली के सेक्टर-78, पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया और शिक्षा सदन समेत कई ऐसे मार्ग हैं, जहां के लिए सवारियां तो बहुत हैं लेकिन सीटीयू की बसें पर्याप्त नहीं हैं। इसके अलावा कैंबवाला, सिविल सचिवालय और माता मनसा देवी वाले मार्ग पर सवारी कम हैं लेकिन बसें ज्यादा हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी
वर्तमान में जो स्थिति है, उसी के हिसाब से प्लान मांगा गया है। दोबारा शॉर्ट टर्म योजना तैयार करने के लिए कोई अतिरिक्त पैसा यूनिवर्सिटी को नहीं दिया जा रहा है। -उमाशंकर गुप्ता, निदेशक परिवहन विभाग
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed