आर्मी जनरल की वाइफ को सेना का सरप्राइज ‘सैल्यूट’
भारतीय सेना अपने जौहर और हौसले से देशवासियों का दिल जीतती आई है। लेकिन इस बार भारतीय सेना ने जो काम किया है, उसकी जितनी तारीफ की जाए, कम होगी।
मौका था इंडियन आर्मी के तीसरे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल स्व. एसएम श्रीनागेश की पत्नी राजकुमारी श्रीनागेश के 100वें बर्थ-डे का। इस खूबसूरत पल को यादगार बनाने के लिए उनकी फैमिली ने समारोह का आयोजन किया था।
इसकी जानकारी उन्होंने आर्मी को भी दी। लेकिन किसी को उम्मीद नहीं थी कि उनके न्योते को सेना इतनी गर्मजोशी से लेगी। चंडीमंदिर स्थित वेस्टर्न कमांड व दूसरी कमान के अफसरों ने इस न्योते को सम्मानपूर्वक कबूल किया और आर्मी चीफ की पत्नी को सरप्राइज ‘सैल्यूट’ देने की सोची।
आर्मी ऑफिसर्स अचानक आ पहुंचे शुभकामनाएं देने
सेक्टर-16ए स्थित हाउस-242 में मेहमाननवाजी चल ही रही थी कि एकाएक आर्मी ऑफिसर पहुंचने लगे। खुद वेस्टर्न कमांड के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल केजे सिंह राजकुमारी को शुभकामनाएं देने पहुंचे। साथ ही सेना अध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह की शुभकामना का संदेश लेकर आए।
सेना की ओर से बताया गया कि दलबीर सिंह का आना तो तय था लेकिन आवश्यक काम की वजह से उन्हें दौरा स्थगित करना पड़ा। ले. जनरल केजे सिंह के अलावा क्वार्टर मास्टर जनरल ऑफ आर्मी के लेफ्टिनेंट जनरल ओम प्रकाश, आर्मी वार कॉलेज के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएल नरसिम्हन, मद्रास रेजिमेंट के कर्नल सहित कई सेना के अधिकारी इस यादगार पल के दौरान मौजूद रहे।
सभी अफसरों को देखकर समारोह की रौनक दोगुनी हो गई। सौ वर्षीय राजकुमारी अधिकारियों को देखकर भावुक भी हो गईं। उन्होंने कहा कि वे अब भी सेना से जुड़ी हैं। सेना के साथ बिताए पलों को भूलना मुश्किल है। वे यहां बेटी प्रोमिला पुरी के साथ रहती हैं।
श्रीनागेश की उपलब्धियां
जनरल एसएम श्रीनागेश मई 1955 से लेकर 1957 तक आर्मी स्टाफ के चीफ रहे। रिटायरमेंट के बाद असम और आंध्र प्रदेश के गवर्नर रहे। 1957 से लेकर 1962 तक हैदराबाद स्थित इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव कॉलेज के प्रिंसिपल रहे।
1923 में वे हैदराबाद रेजिमेंट में कमीशंड हुए थे। वे हैदराबाद रेजिमेंट, जो इस समय कुमाऊं रेजिमेंट का हिस्सा है, के कमांडेंट रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वे ब्रिगेडियर कमांडर के पद पर तैनात थे।
साल 1947-48 के बीच हुए इंडो-पाक युद्ध में उन्हें जम्मू-कश्मीर के सभी ट्राप्स का जनरल नियुक्त किया था। इससे पहले वेस्टर्न व सदर्न कमांड की भी सफलतापूर्वक कमान संभाल चुके हैं। साल 1977 में उनकी मौत हो गई थी। उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं।