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Chandigarh News: मार्च में गर्मी की दस्तक, प्रदेश में आठ हजार मेगावाट तक पहुंचेगी मांग
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मार्च में गर्मी की दस्तक, प्रदेश में आठ हजार मेगावाट तक पहुंचेगी मांग
-चार दिनों में मौसम में ठंडक होने से घटी 1 हजार मेगावाट बिजली की मांग
-20 मार्च को 7700 मेगावाट तक पहुंच चुकी है बिजली की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राज्य में गर्मी की दस्तक के साथ ही बिजली निगम अलर्ट मोड पर आ गए हैं। निगमों की ओर से पहले से ही गर्मी के पीक सीजन को लेकर व्यवस्था कर ली गई है। निगम अधिकारियों का दावा है कि गर्मी के सीजन में बिजली की कोई किल्लत नहीं होगी। पीक मांग के अनुसार, हरियाणा के पास 13522 मेगावाट बिजली की व्यवस्था कर ली गई है। पिछले साल सबसे अधिकतम मांग 13 हजार मेगावाट रही थी। इस बार संभावना है कि कुल क्षमता के बराबर बिजली की खपत पहुंच सकती है। मार्च माह के अंत तक बिजली की मांग 8 हजार मेगावाट को पार कर सकती है। अभी जितनी मांग आ रही है, उतनी आपूर्ति की जा रही है और कोई कट भी नहीं लगाए जा रहे हैं। मौजूदा समय में बात करें तो चार दिनों से मौसम में ठंडक होने के चलते बिजली की मांग में अचानक से गिरावट आई है। पहले जहां बिजली की मांग 7100 मेगावाट को पार कर गई थी, वह घटकर अब 6100 मेगावाट तक रह गई है। पहाड़ी इलाकों में बारिश और प्रदेश के कई जिलों में बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट आने से प्रतिदिन एक हजार मेगावाट बिजली की कम मांग आ रही है। हालांकि, अगले महीने से कुछ दिनों में बिजली की मांग अचानक से बढ़ेगी। क्योंकि उस समय तक गर्मी तेज होगी और एसी कूलर चलने शुरू हो जाएंगे। संभावना है कि अप्रैल माह में ही बिजली की खपत 10 हजार मेगावाट तक जा सकती है।
बता दें कि हरियाणा के पास 13,522 मेगावाट बिजली की क्षमता है, जबकि हरियाणा खुद 2582.4 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन करता है और बाकी बिजली खरीदी जाती है। इसमें से भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड से 846.14 मेगावाट बिजली, जबकि प्राइवेट कंपनियों से 7173.22 मेगावाट और 2921.09 मेगावाट बिजली केन्द्रीय प्लांटों से खरीदी जाती है। गौर हो कि अदाणी पावर ने अपने मुंद्रा संयंत्र से पैदा होने वाली 720-720 मेगावाट बिजली हरियाणा की दो डिस्कॉम को आपूर्ति का खरीद समझौता किया था। अब इस समझौते को संशोधित कर आपूर्ति की जाने वाली बिजली 600-600 मेगावाट कर दी है। ऐसे में हरियाणा को 1424 मेगावाट के स्थान पर रोजाना 1200 मेगावाट बिजली मिल रही है। वहीं, आपात स्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ से 350 मेगावाट व मध्य प्रदेश से 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली के लिए पहले से ही अनुबंध हो रखे हैं।
बाक्स
लगातार बढ़ रही है बिजली की खपत
वर्ष 2021 में गर्मी के पीक सीजन में 12125 मेगावाट प्रतिदिन मांग थी। वर्तमान में पानीपत में 250-250 मेगावाट की तीन इकाइयां, खेदड़ में 600 मेगावाट की एक और यमुनानगर में 300-300 मेगावाट की दो इकाइयां संचालित हैं। इसके अलावा, अडानी पावर से 1400 मेगावाट का करार है। अडानी से 1000 मेगावाट,
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मार्च माह में बिजली की खपत
तिथि खपत (मेगावाट)
15 7462
16 7633
17 6729
18 7747
19 7744
20 7705
21 7335
22 7276
23 7144
24 6178
25 4825
26 6125
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-चार दिनों में मौसम में ठंडक होने से घटी 1 हजार मेगावाट बिजली की मांग
-20 मार्च को 7700 मेगावाट तक पहुंच चुकी है बिजली की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राज्य में गर्मी की दस्तक के साथ ही बिजली निगम अलर्ट मोड पर आ गए हैं। निगमों की ओर से पहले से ही गर्मी के पीक सीजन को लेकर व्यवस्था कर ली गई है। निगम अधिकारियों का दावा है कि गर्मी के सीजन में बिजली की कोई किल्लत नहीं होगी। पीक मांग के अनुसार, हरियाणा के पास 13522 मेगावाट बिजली की व्यवस्था कर ली गई है। पिछले साल सबसे अधिकतम मांग 13 हजार मेगावाट रही थी। इस बार संभावना है कि कुल क्षमता के बराबर बिजली की खपत पहुंच सकती है। मार्च माह के अंत तक बिजली की मांग 8 हजार मेगावाट को पार कर सकती है। अभी जितनी मांग आ रही है, उतनी आपूर्ति की जा रही है और कोई कट भी नहीं लगाए जा रहे हैं। मौजूदा समय में बात करें तो चार दिनों से मौसम में ठंडक होने के चलते बिजली की मांग में अचानक से गिरावट आई है। पहले जहां बिजली की मांग 7100 मेगावाट को पार कर गई थी, वह घटकर अब 6100 मेगावाट तक रह गई है। पहाड़ी इलाकों में बारिश और प्रदेश के कई जिलों में बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट आने से प्रतिदिन एक हजार मेगावाट बिजली की कम मांग आ रही है। हालांकि, अगले महीने से कुछ दिनों में बिजली की मांग अचानक से बढ़ेगी। क्योंकि उस समय तक गर्मी तेज होगी और एसी कूलर चलने शुरू हो जाएंगे। संभावना है कि अप्रैल माह में ही बिजली की खपत 10 हजार मेगावाट तक जा सकती है।
बता दें कि हरियाणा के पास 13,522 मेगावाट बिजली की क्षमता है, जबकि हरियाणा खुद 2582.4 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन करता है और बाकी बिजली खरीदी जाती है। इसमें से भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड से 846.14 मेगावाट बिजली, जबकि प्राइवेट कंपनियों से 7173.22 मेगावाट और 2921.09 मेगावाट बिजली केन्द्रीय प्लांटों से खरीदी जाती है। गौर हो कि अदाणी पावर ने अपने मुंद्रा संयंत्र से पैदा होने वाली 720-720 मेगावाट बिजली हरियाणा की दो डिस्कॉम को आपूर्ति का खरीद समझौता किया था। अब इस समझौते को संशोधित कर आपूर्ति की जाने वाली बिजली 600-600 मेगावाट कर दी है। ऐसे में हरियाणा को 1424 मेगावाट के स्थान पर रोजाना 1200 मेगावाट बिजली मिल रही है। वहीं, आपात स्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ से 350 मेगावाट व मध्य प्रदेश से 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली के लिए पहले से ही अनुबंध हो रखे हैं।
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लगातार बढ़ रही है बिजली की खपत
वर्ष 2021 में गर्मी के पीक सीजन में 12125 मेगावाट प्रतिदिन मांग थी। वर्तमान में पानीपत में 250-250 मेगावाट की तीन इकाइयां, खेदड़ में 600 मेगावाट की एक और यमुनानगर में 300-300 मेगावाट की दो इकाइयां संचालित हैं। इसके अलावा, अडानी पावर से 1400 मेगावाट का करार है। अडानी से 1000 मेगावाट,
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मार्च माह में बिजली की खपत
तिथि खपत (मेगावाट)
15 7462
16 7633
17 6729
18 7747
19 7744
20 7705
21 7335
22 7276
23 7144
24 6178
25 4825
26 6125