अब दक्षिणी मोर्चों पर बढ़ेगी वायुसेना की ताकत, तंजावुर एयरफोर्स स्टेशन में तैनात होंगे सुखोई
देश के उतरी मोर्चों के साथ-साथ इंडियन एयरफोर्स अब दक्षिणी मोर्चे पर भी अपनी ताकत बढ़ाएगी। इसके लिए ने दक्षिणी एयर कमांड के अधीनस्थ तमिलनाडु के महत्वपूर्ण एयरफोर्स स्टेशन तंजावुर में खतरनाक लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई की 222 स्क्वाड्रन तैनात करने का फैसला लिया है। इस क्षेत्र में सुखोई की ये पहली स्क्वाड्रन होगी। 20 जनवरी को तंजावुर एयरफोर्स स्टेशन में सुखोई की इस स्क्वाड्रन का प्रवेशण होगा।
एयरफोर्स का ये निर्णय देश के दक्षिणी मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर लिया गया है। उल्लेखनीय है कि तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटनी ने 28 मई 2013 को तंजावुर एयरफोर्स स्टेशन देश को समर्पित किया था। जबकि पहले इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल घरेलू विमानों के लिए होता था।
तंजावुर एयरफोर्स स्टेशन के परिचालन का मकसद दक्षिणी एयर कमांड को सशक्त बनाना और एयरफोर्स की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाना था। मगर अब सुखाई की स्क्वाड्रन के बाद दक्षिणी एयर कमांड की ताकत और बढ़ जाएगी। अभी देखा जाए तो तमिलनाडु के कोयंबटूर में सिर्फ तेजस लड़ाकू विमान की स्क्वाड्रन मौजूद है।
आतंकी, समुद्री लुटेरों के खतरों से और मजफूज होगा क्षेत्र
दरअसल, दक्षिण भारत के अधिकतर राज्यों के बड़े भूखंड समुद्री तटीय इलाकों से सटे हुए हैं। ये राज्य अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से सटे हुए हैं। भारतीय समुद्रीय क्षेत्र में हमारे कई द्वीप भूखंड भी हैं। जिनकी सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी भी नेवी के साथ-साथ एयरफोर्स के अधीनस्थ दक्षिणी कमांड के कंधों पर रहती है। ऐसे तटीय इलाकों में आतंकी व समुद्री लुटेरों के हमले संबंधी खतरों से हमारी सेनाएं हमेशा अलर्ट भी रहती हैं। लेकिन तंजावुर एयरफोर्स स्टेशन पर सुखोई की स्क्वाड्रन तैनात होने के बाद बंगाल की खाड़ी के साथ लगते साउदर्न-ईस्टर्न बॉर्डर की सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता हो जाएगी।
इंडेक्शन सेरेमनी में पहुंच सकते हैं सीडीएस रावत
सुखोई की पहली स्क्वाड्रन सेरेमनी के अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत भी 20 जनवरी को तंजावुर एयरफोर्स स्टेशन पहुंच सकते हैं। जबकि उनके अलावा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया और साउदर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ अमित तिवारी भी मुख्य रूप से इस सेरेमनी में मौजूद रहेंगे। एयरफोर्स के एक आला अफसर के अनुसार तंजावुर में सुखोई लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन दक्षिणी मोर्चों पर सुरक्षा के मद्देनजर एक मील का पत्थर साबित होगी।