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सूखना लेक को पानी देने से पंजाब हरियाणा का इंकार, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

Fri, 02 Jun 2017 01:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 02 Jun 2017 01:39 PM IST
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sukhnal lake crisis case hearing in punjab haryana highcourt
Sukhna Lake, Chandigarh
सुखना लेक के लिए पंजाब और हरियाणा ने पानी देने से इंकार कर दिया है। मामले में एक बार फिर हाईकोर्ट दोनों देशों को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट चंडीगढ़ प्रशासन को कई बार फटकार लगा चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन सुखना के हालात को लेकर गंभीर नहीं दिखाई पड़ रहा।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर हाल ही सुखना के संरक्षण को लेकर 6 सदस्यीय कमेटी की हाईपावर कमेटी की बैठक बुलाई थी। बैठक में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के अलावा केंद्र के भी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में सुखना के लिए पानी का विकल्प तलाशने पर भी चर्चा की गई थी।
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इस पर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ ने सुखना के लिए भाखड़ा से पानी लाने पर सहमति जताई थी, लेकिन अब प्रशासनिक गलियारों से इस सहमति का कोई आधार बनता नहीं दिख रहा। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो पंजाब व हरियाणा सुखना को पानी देने से इंकार कर रहे है। अगर ऐसा ही रहा तो चंडीगढ़ प्रशासन को सुखना के लिए पानी का दूसरा विकल्प तलाशना पड़ेगा।
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सुखना सबकी धरोहर, हाथ ने खींचे पंजाब-हरियाणा

sukhnal lake crisis case hearing in punjab haryana highcourt
सुखना लेक बचाने के लिए पाइप लाइन डालने का काम
सूखती सुखना मामले में वीरवार को सुनवाई करते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि सुखना सबकी धरोहर है। पंजाब और हरियाणा सरकार चंडीगढ़ पर अधिकार तो जताती है लेकिन जब अनमोल विरासत खतरे में है तो पानी देने में कदम पीछे खींच रही है।

कोर्ट ने दोनों राज्यों को नसीहत दी कि कोई भी तकनीकी बाधा इस मामले में आए तो उसे दूर करने का प्रयास किया जाए। खंडपीठ ने कहा कि सुखना केवल चंडीगढ़ का ही नहीं बल्कि हरियाणा और पंजाब का भी गौरव है। दोनों राज्य की सरकारें खुद को प्रतिवादी न समझ इसे बचाने का प्रयास करें

गाद निकालने से प्रशासन ने खड़े किए हाथ
हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन से पूछा कि डि सिल्टिंग को लेकर क्या स्थिति है। इस पर प्रशासन की ओर से बताया गया कि इसके लिए टेंडर का काम हो रहा है और फिलहाल डि सिल्टिंग नहीं की जा सकती है। हालांकि प्रशासन की ओर से कहा गया कि स्थिति सुधरते ही डि सिल्टिंग का काम किया जाएगा।

बादल भरोसे सुखना

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पारा चढ़ते ही सूखने लगी सुखना - फोटो : अमर उजाला
सुखना के सूखने पर चिंता जताते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अब बरसात के कुछ ही दिन बाकी हैं और ऐसे में सिल्ट निकालने के लिए तेजी से काम हो। हाईकोर्ट के आदेशों में आयोजित की गई बैठक के मिनट्स न आने के चलते सुनवाई 19 जुलाई तक टल गई है और तब तक बरसात आरंभ हो जाएगी। ऐसे में बैठक में आने वाले सुझावों पर फिलहाल बरसात के बाद ही कोई ठोस कदम उठाया जा सकेगा। इसके चलते अब फिलहाल सुखना लेक का गिरता जलस्तर बारिश के भरोसे ही है।

सबसे पहले सुखना का जलस्तर फिर बाकी मुद्दे
सुखना लेक के गिरते जलस्तर को प्राथमिकता के आधार पर सुनने का निर्णय लेते हुए हाईकोर्ट ने कैचमेंट में निर्माण व इससे जुड़े अन्य मुद्दों को बाद से लिए छोड़ दिया है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में सुखना का जलस्तर सबसे ज्यादा मायने रखता है इस समस्या का समाधान होने के बाद बाकी मुद्दों पर विचार किया जाएगा।

सकेतड़ी की ओर बनेगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

sukhnal lake crisis case hearing in punjab haryana highcourt
Sukhna Lake
सुखना में सीवरेज का पानी न आए और वहां के स्थानीय लोगों को भी कोई समस्या न हो इसके लिए अब सकेतड़ी के निकट सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का सुझाव सामने आया है। यह सुझाव हाईकोर्ट के आदेशों पर गठित की गई कमेटी की बैठक के दौरान सामने आया है। हालांकि अभी तक इस बैठक के मिनट हाईकोर्ट में नहीं सौंपे गए हैं।

हाईकोर्ट ने मामले में हरियाणा सरकार को अगली सुनवाई तक यह सुनिश्चित करने को कहा है कि सुखना में सिल्ट व सीवरेज का पानी न जाए। वीरवार को मामले की सुनवाई आंरभ होते ही एमिकस क्यूरी ने कहा कि सुखना में आने वाला पानी कैचमेंट एरिया में अवैध निर्माण के चलते बाधित हो रहा है और केवल 25 प्रतिशत पानी ही सुखना में पहुंच रहा है।

इस पर कोर्ट को बताया गया कि वहां मौजूद अवैध निर्माण का लेकर एक मामला विचाराधीन है और इसी के चलते अभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सकता है। एमिकस क्यूरी ने कहा कि जहां एक ओर पानी का प्रवाह कम हुआ है तो वहीं सिल्ट और गंदगी कई गुना ज्यादा बढ़ गई है जिसे रोकने की जरूरत है।

इस दौरान पंचकूला के सकेतड़ी की ओर से आने वाले सीवरेज के पानी से सुखना के गंदे होने का मामला उठाया गया। इस दौरान हरियाणा सरकार की ओर से मौजूद काउंसिल ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेशों पर गठित कमेटी ने इस मुद्दे पर चर्चा की थी।

प्रशासन की ओर से बताया गया कि इस बैठक के मिनट्स तो तैयार हैं लेकिन 6 मे से केवल 4 सदस्यों के हस्ताक्षर ही इसपर अभी तक हो पाए हैं इसलिए इसे अभी कोर्ट में सौंपा नहीं जा सकता।
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