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Chandigarh News: दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों का आशियाना बना सुखना
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चंडीगढ़। सुखना वेटलैंड अब दुर्लभ, संकटग्रस्त और गंभीर रुप से संकटग्रस्त प्रजातियों का आशियना बन चुका है। चाहे इंडियन स्किमर का अस्तित्व हो या फिर वन्यजीव तस्करी और प्राकृितक आवास में बदलाव की चुनौतियों का सामना करने वाली भारतीय पैंगोलिन जैसी प्रजाति।
सुखना वेटलैंड में भारतीय पैंगोलिन, मिस्र का गिद्ध, इंडियन स्किमर, पलास फिश ईगल, स्टेपी ईगल और स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल जैसी प्रजातियां भी हैं। इनमें कई ऐसी हैं जोकि वैश्विक स्तर पर खतरे का सामना कर रही हैं। सुखना इनको आवास उपलब्ध कराती हैं। इन प्रजातियों में पलास फिश ईगल और स्टेपी ईगल जैसे शिकारी पक्षियों की मौजूदगी भी है जोकि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक हैं। इन सभी प्रजातियों का संरक्षण सुखना वेटलैंड की जैव विविधता को बनाए रखने के लिए जरूरी है।
सुखना वेटलैंड की इन खूबियों ने इसको अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट का दर्जा हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है। रामसर मानदंड 2 के अनुसार किसी भी आर्द्रभूमि का महत्व तब बढ़ जाता है जब वह संकटग्रस्त या गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों को आश्रय देती है।
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तीन मानकों से साबित हुई अहमियत
मानदंड दो-दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों को आश्रय देना
मानदंड तीन-विशिष्ट जैव-भौगोलिक क्षेत्र की जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका
मानदंड चार-वह प्रजातियां जिनको आर्द्रभूमि सुरक्षित आवास, प्रजनन स्थल या प्रतिकूल परिस्थितियों में शरण देता है।
अब लगेंगे बोर्ड, होगी ज्यादा केयर
रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद अब सुखना वेटलैंड में कई बदलाव आएंगे। इसमें सुखना वेटलैंड के लोगों के साथ रामसर साइट का सारा जिक्र भी होगा। इसके साथ ही पर्यटकों को सुखना में मौजूद दुर्लभ प्रजातियों के साथ ही संकटग्रस्त और गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों के बारे में पूरी जानकारी देने के लिए बोर्ड लगाए जाएंगे।
कोट्स
रामसर का दर्जा मिलने के बाद सुखना वेटलैंड के संरक्षण की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। यहां जल की गुणवत्ता बनाए रखना, प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना और पक्षियों व वन्यजीवों की निगरानी करना अहम होगा। यह दर्जा सुखना को सिर्फ एक झील नहीं बल्कि दुर्लभ प्रजातियों के अस्तित्व और क्षेत्रीय जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर के रूप में स्थापित करता है।-सौरभ कुमार,पर्यावरण निदेशक चंडीगढ़
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सुखना वेटलैंड में भारतीय पैंगोलिन, मिस्र का गिद्ध, इंडियन स्किमर, पलास फिश ईगल, स्टेपी ईगल और स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल जैसी प्रजातियां भी हैं। इनमें कई ऐसी हैं जोकि वैश्विक स्तर पर खतरे का सामना कर रही हैं। सुखना इनको आवास उपलब्ध कराती हैं। इन प्रजातियों में पलास फिश ईगल और स्टेपी ईगल जैसे शिकारी पक्षियों की मौजूदगी भी है जोकि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए आवश्यक हैं। इन सभी प्रजातियों का संरक्षण सुखना वेटलैंड की जैव विविधता को बनाए रखने के लिए जरूरी है।
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सुखना वेटलैंड की इन खूबियों ने इसको अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट का दर्जा हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है। रामसर मानदंड 2 के अनुसार किसी भी आर्द्रभूमि का महत्व तब बढ़ जाता है जब वह संकटग्रस्त या गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों को आश्रय देती है।
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तीन मानकों से साबित हुई अहमियत
मानदंड दो-दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों को आश्रय देना
मानदंड तीन-विशिष्ट जैव-भौगोलिक क्षेत्र की जैव विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका
मानदंड चार-वह प्रजातियां जिनको आर्द्रभूमि सुरक्षित आवास, प्रजनन स्थल या प्रतिकूल परिस्थितियों में शरण देता है।
अब लगेंगे बोर्ड, होगी ज्यादा केयर
रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद अब सुखना वेटलैंड में कई बदलाव आएंगे। इसमें सुखना वेटलैंड के लोगों के साथ रामसर साइट का सारा जिक्र भी होगा। इसके साथ ही पर्यटकों को सुखना में मौजूद दुर्लभ प्रजातियों के साथ ही संकटग्रस्त और गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों के बारे में पूरी जानकारी देने के लिए बोर्ड लगाए जाएंगे।
कोट्स
रामसर का दर्जा मिलने के बाद सुखना वेटलैंड के संरक्षण की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। यहां जल की गुणवत्ता बनाए रखना, प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखना और पक्षियों व वन्यजीवों की निगरानी करना अहम होगा। यह दर्जा सुखना को सिर्फ एक झील नहीं बल्कि दुर्लभ प्रजातियों के अस्तित्व और क्षेत्रीय जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर के रूप में स्थापित करता है।-सौरभ कुमार,पर्यावरण निदेशक चंडीगढ़