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मंत्री रंधावा समेत नौ विधायकों ने जारी किया 'ब्लैक पेपर', पिछली अकाली सरकार पर लगाए कई आरोप

Wed, 22 Jan 2020 06:51 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 22 Jan 2020 06:51 PM IST
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Sukhjinder Singh Randhawa and 9 MLAs issued 'black paper' on power agreements
मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और नौ कांग्रेसी विधायकों ने जारी किया 'ब्लैक पत्र'

पंजाब के सहकारिता और जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और नौ कांग्रेसी विधायकों ने अकाली दल की पिछली सरकार के समय हुए बिजली समझौतों के कारण राज्य के लोगों से हुए अन्याय को उजागर किया है। अकाली दल द्वारा राज्यपाल को सौंपे मेमोरेंडम को झूठ का पुलिंदा बताते हुए उन्होंने खुलासा किया कि 2006 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के समय बनाई गई बिजली नीति में पिछली अकाली सरकार ने निजी मुनाफों के खातिर हेराफेरी करके 25 साल के लिए ऐसी नई नीति बना दी कि आज राज्य के लोग मंहगी बिजली का संताप भोग रहे हैं। 

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इस संबंध में मंगलवार को रंधावा और विधायकों दर्शन सिंह बराड़, परमिन्दर सिंह पिंकी, गुरकीरत सिंह कोटली, दर्शन लाल मंगूपुर, कुलबीर सिंह जीरा, कुलदीप सिंह वैद, परगट सिंह, सुखपाल सिंह भुल्लर और दविन्दर सिंह घुबाया ने ‘ब्लैक पेपर’ भी जारी किया। उन्होंने बिजली के मुद्दे पर पिछली सरकार में 10 सालों के दौरान बिजली विभाग संभालने वाले पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को किसी भी प्लेटफॉर्म पर खुली बहस का न्योता दिया। 
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समझौतों से पहले बनने लगे थे निजी थर्मल प्लांट
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के समय निजी थर्मल प्लांट पहले से ही स्थापित होने शुरू हो गए और समझौतों की नीति बाद में बनाई गई। रंधावा ने खुलासा किया कि साल 2006 में कांग्रेस सरकार द्वारा बनाई बिजली नीति के अनुसार राज्य में अधिक से अधिक 2000 मेगावॉट सामर्थ्य के बिजली प्रोजेक्ट लगाए जा सकते थे और एक प्रोजेक्ट 1000 मेगावॉट से अधिक के सामर्थ्य वाला नहीं लग सकता। 

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उस समय 540 मेगावॉट सामर्थ्य वाला गोइन्दवाल पावर प्लांट का एमओयू सहीबद्ध किया और दूसरे फैसले के अनुसार कोयला भी झारखंड के पछवाड़ा स्थित अपनी कोयले की खान से खरीदा जाएगा। उन्होंने कहा कि 2007 के बाद अकाली दल की सरकार ने 4000 मेगावॉट के समझौते सहीबद्ध कर लिए। 

राज्य को दूसरी बड़ी मार कोयला अपनी खान की बजाय कोल इंडिया से खरीदने के फैसले से पड़ी। रंधावा ने कहा कि अकाली नेता बिजली समझौतों के पीछे यूपीए सरकार के दिशा-निर्देशों पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूपीए सरकार की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत गुजरात की तरफ से बिजली नीति बनाई गई और अकाली सरकार ने गुजरात की नीति को ही अपनाया। 

उन्होंने कहा कि गुजरात की नीति में धारा 9 और 11 के अंतर्गत राज्य को फायदा पहुंचाने वाली मदों को पंजाब ने निजी फायदों के लिए बाहर रख दिया। उन्होंने कहा कि धारा 9 के अनुसार बिजली खरीदने से मना किया जा सकता था लेकिन पंजाब ने यह मद शामिल नहीं की। इसी तरह धारा 11 ही खत्म कर दी गई जिसके अंतर्गत 100 प्रतिशत बिजली खरीदने की जिम्मेदारी पंजाब ने अपने ऊपर ले ली और न खरीदने की सूरत में फिक्सड चार्ज देने होंगे। उन्होंने कहा कि मार्च 2017 तक अकाली सरकार ने फिक्सड चार्ज के रूप में 6553 करोड़ रुपए पावर प्लांटों को दिए। 

निजी प्लांटों से खरीदी 6 रुपये प्रति यूनिट बिजली

उन्होंने कहा कि 25 सालों के लिए हुए समझौतों के बदले 65 हजार करोड़ फिक्सड चार्ज देने होंगे जबकि पावर प्लांटों पर कुल 25 हजार करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। रंधावा ने कहा कि पूर्व उप मुख्यमंत्री निजी पावर प्लांट से 2.80 रुपए प्रति यूनिट बिजली खरीदने की बात कर रहे हैं जबकि अकाली दल अपनी सरकार की प्राप्तियों में पंजाब के लोगों को 6.39 रुपए प्रति यूनिट देने की बात करती है। 

उन्होने 3.60 रुपए प्रति यूनिट फर्क पर अकालियों को जवाब देने को कहा। रंधावा ने आगे कहा कि 2014 से सितंबर 2016 तक अकाली सरकार के समय बिजली की पूरी मांग के दौरान पंजाब ने बाहर से 13,822 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी जोकि 3.34 रुपए से 3.41 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से पड़ी। उन्होंने कहा कि अपने राज्य के निजी पावर प्लांटों से 5.18 रुपए से 6 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदी गई। इस तरह सुखबीर बादल को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्हें निजी पावर प्लांट बनाने का क्या फायदा हुआ जबकि बाहर के राज्यों से सस्ती बिजली खरीदी जा रही थी।

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