UCC: सुखबीर बादल ने विधि आयोग को लिखा पत्र, कहा- यूसीसी देश हित में नहीं, बिना सहमति अल्पसंख्यकों पर लागू न हो
अकाली दल ने कहा कि प्रस्तावित यूसीसी उन सामाजिक जनजातियों को भी प्रभावित करेगा, जिनके अपने रीति-रिवाज, संस्कृति और विभिन्न व्यक्तिगत कानून हैं। इस प्रकार यह अनावश्यक रूप से देश में अशांति पैदा करेगा, खासतौर पर उत्तर पूर्व राज्यों में जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत कुछ कानूनों से विशेष छूट प्राप्त है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने शुक्रवार को 22वें विधि आयोग को सूचित किया कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) देश के हित में नहीं है और देशव्यापी अंतर-धार्मिक सहमति के बिना अल्पसंख्यकों के लिए इसे लागू करना गलत होगा। यह भी कहा गया है कि इसे लागू करने से संविधान की भावना का उल्लंघन होगा और भय, अविश्वास व विभाजनकारी भावनाएं पैदा होंगी।
शिअद के अध्यक्ष सुखबीर बादल द्वारा आयोग के सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया कि ‘एकरूपता को एकता के साथ भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए। भारत विविधता में एकता का प्रतीक है, सही मायनों में केवल हमारा संघीय ढ़ांचा ही हमारी समस्याओं का समाधान कर सकता है और भारत को वैश्विक महाशक्ति बना सकता है।’
केंद्र सरकार से यूसीसी को आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह करते हुए शिअद अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर कोई भी निर्णय लेने से पहले सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करने का भी आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ‘यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि संवेदनशील सीमावर्ती राज्य पंजाब में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। बादल ने आयोग को यह भी सूचित किया कि पार्टी ने राज्य और बाहर के विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया है। उसके आधार पर हमें जो व्यापक धारणा मिली है वह यही है कि यदि यूसीसी को लागू कर दिया जाता है तो इससे निश्चित रूप से अलग-अलग जाति, पंथ और धर्मों के अल्पसंख्यक समुदायों के लोग प्रभावित होंगे।’
पत्र में यह भी कहा गया है कि अकाली दल राज्यों को अधिक स्वायत्ता पर जोर देने के साथ लोकतंत्र और संघवाद की रक्षा करने में विश्वास करता है। इस मुद्दे की 21वें विधि आयोग ने पहले ही गहराई से जांच कर कहा था कि यूसीसी इस सत्र पर न तो आवश्यक है न ही वांछनीय है।
अकाली दल ने कहा कि प्रस्तावित यूसीसी उन सामाजिक जनजातियों को भी प्रभावित करेगा, जिनके अपने रीति-रिवाज, संस्कृति और विभिन्न व्यक्तिगत कानून हैं। इस प्रकार यह अनावश्यक रूप से देश में अशांति पैदा करेगा, खासतौर पर उत्तर पूर्व राज्यों में जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत कुछ कानूनों से विशेष छूट प्राप्त है।