छोटे बादल ने बदले सियासत के मायने, विवादों से जुड़े पर चित किए विरोधी
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पंजाब की सियासत में बड़ा नाम। पारिवारिक विरासत सहेजने के लिए राजनीति में कदम रखा और परंपरागत तरीके से चलने वाली पार्टी के मायने ही बदल दिए। मार्गदर्शन कदम-कदम पर बड़े बादल यानि पिता सरदार प्रकाश सिंह बादल का मिला और अपने रणनीतिक व राजनीतिक कौशल के दम पर उनके ओहरे से बाहर निकले पंजाब के उप मुख्यमंत्री एवं शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल।
नौ जुलाई 1962 को फरीदकोट में जन्मे सुखबीर की शिक्षा-दिशा देश से लेकर विदेश तक हुई। लारेंस सनावर स्कूल सोलन हिमाचल से शुरूआती शिक्षा के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के अर्थशास्त्र विभाग से एमए ऑनर्स की। इसके बाद अमेरिका की केलीफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी लॉस एंजल्स से एमबीए किया। सुखबीर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत विधानसभा के बजाए लोकसभा से की।
फरीदकोट संसदीय क्षेत्र से सांसद रहते हुए 1998 से 1999 तक वाजपेयी सरकार के दूसरे कार्यकाल में केंद्रीय राज्य उद्योग मंत्री का कार्यभार संभाला। 2001 से 2004 तक वे राज्य सभा सदस्य भी रहे। 2004 में फरीदकोट से फिर लोकसभा सांसद चुने गए। पुत्र का अनुभव बढ़ते देख 2008 में प्रकाश सिंह बादल ने सुखबीर बादल के हाथों में पार्टी की कमान सौंप दी और वह अभी तक शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष पद पर आसीन हैं। अध्यक्ष बनने के बाद सुखबीर का राजनीतिक कद पंजाब की राजनीति में एकाएक और बढ़ा और जनवरी 2009 में उन्हें उप मुख्यमंत्री बना दिया गया। अटकलें उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की भी काफी उठीं।
प्रकाश सिंह बादल ने उन पर विधानसभा सदस्य न होते हुए भी भरोसा जताया। उन्हें छह महीने के भीतर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचना था पर सुखबीर ने चुनाव ही नहीं लड़ा और जुलाई 2009 में पद से इस्तीफा दे दिया। अगस्त 2009 में जलालाबाद सीट से उप-चुनाव जीत कर वह दोबारा उप-मुख्यमंत्री बने। 2012 विधानसभा चुनाव में अकाली-भाजपा सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर थी।
सरकार के सत्ता से जाने के कयास जोरों पर थे पर सुखबीर ने कमान अपने हाथों में लेते हुए न केवल सारी अटकलों पर विराम लगाया, बल्कि अकाली-भाजपा सरकार को 68 सीटों के साथ जिताकर पूर्ण बहुमत की सरकार भी बनाई। राजनीतिक धुरंधर उनके रणनीतिक व कूटनीतिक कौशल को मान गए। सुखबीर ने सरकार बनने के बाद पहली बार प्रोगे्रसिव पंजाब इन्वेस्टर्स समिट कराई। इसे 2013 के बाद 2015 में फिर से कराया, जिससे पंजाब में निवेशक आए। मोहाली इंटरनेशन एयरपोर्ट से पहली अंतरराष्टï्रीय फ्लाइट में चालीस सदस्यीय व्यापारी प्रतिनिधिमंडल लेकर शारजाह गए। दुबई से पंजाब में निवेश लाने के लिए भी एमओयू साइन किए।
पंजाब में बीते वर्ष 10 हजार 290 करोड़ रुपये के 12 मेगा रोड़ प्रोजेक्ट की केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के साथ मिलकर आधारशिला रखी। अप्रैल 2015 में सुखबीर पर मोगा बस छेड़छाड़ व आत्महत्या मामले में उंगलियां भी उठीं। ओर्बिट एविएशन से कूद कर जान देने वाली युवती के पिता की आवाज तीस लाख रुपये देकर दबाने के आरोप भी लगे, लेकिन वह मैदान में डटे रहे और चुनौतियां से पार पाने के बाद सियासी मैदान में विरोधियों को चित किया। सुखबीर की पत्नी हरसिमरत कौर नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है।