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Hindi News ›   Chandigarh ›   Suggestions sought from liquor contractors and traders for the draft of New Excise Policy-2026-27

Chandigarh News: न्यू एक्साइज पॉलिसी-2026-27 के ड्राफ्ट के लिए शराब ठेकेदारों व कारोबारियों से मांगे सुझाव

Wed, 26 Nov 2025 12:44 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 26 Nov 2025 12:44 AM IST
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Suggestions sought from liquor contractors and traders for the draft of New Excise Policy-2026-27
चंडीगढ़। वित्तीय वर्ष 2026-27 की नई एक्साइज पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग ने शहर के शराब ठेकेदारों और कारोबारियों से पॉलिसी पर सुझाव मांग लिए हैं। नए एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर निशांत कुमार यादव जल्द ही कारोबारियों के साथ बैठक करेंगे ताकि सभी सुझावों का विश्लेषण कर पॉलिसी का ढांचा अंतिम रूप दिया जा सके।
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विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस बार भी लाइसेंस फीस में 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना है। रेस्टोरेंट्स, क्लब, डिस्कोथेक और शराब वेंड्स के रिजर्व प्राइस में भी बढ़ोतरी की तैयारी है।
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शराब कारोबारी कुनाल ने बताया कि मौजूदा पॉलिसी में पहली बार रेस्टोरेंट्स, क्लब और डिस्कोथेक को शहर के किसी भी शराब ठेके से सीधे स्टॉक खरीदने की छूट दी गई है। इससे शराब की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि कई बार ठेकों से गलत या मिलावट वाला स्टॉक भी सप्लाई हो जाता है। कुनाल ने कहा कि पहले शराब का स्टॉक बॉटलिंग प्लांट (एल-1बी) और बीडब्ल्यूएच-2 लाइसेंसी से आता था जहां शराब की गुणवत्ता और स्टॉक में पारदर्शिता रहती थी। उन्होंने मांग की है कि नई पॉलिसी में इस व्यवस्था को फिर से पुराने मानकों के अनुसार लागू किया जाए ताकि क्वालिटी कंट्रोल सुनिश्चित रहे।
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एक्साइज ड्यूटी घटाने की मांग
शहर के कई शराब ठेकेदारों ने विभाग को सुझाव भेजकर एक्साइज ड्यूटी कम करने की मांग की है। उनका कहना है कि पंजाब और हरियाणा में ड्यूटी चंडीगढ़ से कम है। चंडीगढ़ में फिलहाल लगभग 12.5% एक्साइज ड्यूटी ली जा रही है जबकि यहां कारोबारियों को पहले ही लाइसेंस के रूप में करोड़ों रुपये जमा कराने पड़ते हैं। कारोबारियों का कहना है कि ड्यूटी कम करने से कारोबार को राहत मिलेगी और इंटर-स्टेट प्राइस गैप भी कम होगा।

सिंडिकेट दोबारा न बने, इस पर कड़ी नजर
शराब कारोबारी दर्शन कलेर ने कहा कि नई पॉलिसी बनाते समय विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई बाहरी कारोबारी यहां आकर सिंडिकेट या लिकर लॉबी न बना ले। उन्होंने कहा कि महंगी लाइसेंस फीस के कारण कारोबार पर पहले ही दबाव है, इसलिए वेंड्स की लाइसेंस फीस को भी रिवाइज किया जाना चाहिए।
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