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अनर्जित लाभ को 25 से घटाकर 20 फीसदी करने का सुझाव

Fri, 13 May 2022 01:57 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 13 May 2022 01:57 AM IST
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Suggestion to reduce unearned profit from 25 to 20 percent
चंडीगढ़। एस्टेट ऑफिस से जुड़े कई मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सांसद किरण खेर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है। वीरवार को इस कमेटी की तीसरी बैठक हुई। इसमें सदस्यों ने अनर्जित लाभ को घटाने का सुझाव दिया। तय हुआ कि वर्तमान में अनर्जित लाभ को 25 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी किया जाए। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक फैसला प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित लेंगे।
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कमेटी की पहली दो बैठकों में लिए गए फैसले और सिफारिशों पर क्या कार्रवाई हुई है, बैठक में सबसे पहले इस पर चर्चा हुई। कुल 14 मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें प्रमुख रूप से औद्योगिक और व्यावसायिक लीज होल्ड संपत्तियों को फ्री होल्ड में बदलने, आवासीय संपत्तियों के कन्वर्जन चार्जेज को कम करने का मुद्दा शामिल रहा। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि लोगों की सहूलियत को देखते हुए इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।
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माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज डेवलेपमेंट एक्ट, 2006 की धारा 2 (ई) के तहत उल्लिखित ‘एंटरप्राइज’ की परिभाषा को औद्योगिक प्लाटों में गतिविधियों के लिए लागू करने की अनुमति देने, औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और 2 में औद्योगिक गतिविधि और व्यावसायिक गतिविधि के समूहों को तैयार करने की संभावना तलाश करने, बिल्डिंग वॉयलेशन के जारी किए गए नोटिस की समीक्षा, सुप्रीम कोर्ट में चल रहे चरणजीत कौर के मामले को देखते हुए आवासीय संपत्ति को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने, एफएआर बढ़ाने, सेक्टर-7 और 26 में हुए उल्लंघनों, सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए जमीन आवंटन के लिए नीति बनाने, समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। भवन उल्लंघन व दुरुपयोग के मुद्दे पर सांसद किरण खेर ने निर्देश दिया कि तर्कसंगत दरों को निर्धारित किया जाए ताकि लोगों पर अधिक बोझ न पड़े।
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उद्योग नीति 2015 पर फिर से विचार करेगा विभाग
बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रशासन का उद्योग विभाग उद्योग नीति 2015 पर फिर से विचार करेगा ताकि एमएसएमई अधिनियम 2006 के तहत सभी अनुमत उद्यमों को भी औद्योगिक क्षेत्र में काम करने की अनुमति दी जा सके। औद्योगिक विभाग बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज वाले उद्योगों के क्लस्टर की योजना बनाएगा ताकि चंडीगढ़ में इंडस्ट्रियल हब बनाया जा सके। यह निर्णय लिया गया कि एस्टेट ऑफिस भवन उल्लंघन के मामले पर फिर से विचार करेगा। चर्चा हुई कि एफएआर के फार्मूले की फिर से जांच की जाए, ताकि एफएआर बढ़ाने के लिए तर्कसंगत दरों पर शुल्क लगाया जा सके।
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