पिता क्लर्क थे और बेटा बना IAS, पढ़ें सफलता की कहानी
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बेहद मुश्किल परिस्थितियों में पढ़ाई करके एक बेटे ने सिविल सर्विस (आईएएस) की परीक्षा पास की है। इस बेटे के गांव में खुशी की लहर है। पिता की मौत के बाद उनके सपने को पूरा करके बेटा भी खुशी से सराबोर है। सिविल सर्विस की परीक्षा में 325वीं रैंक पाने वाले चंद्रमोहन का जन्म उपमंडल डबवाली के गांव रिसालियाखेड़ा से हैं।
उनके पिता भगवाना राम सिरसा आईटीआई में हैड क्लर्क के तौर पर कार्यरत थे। उन्होंने अपने बड़े बेटे गौरव और छोटे बेटे चंद्रमोहन को हमेशा उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया था। करीब आठ साल पहले उनका निधन हो गया। पिता के जाने के बाद उनकी शिक्षा का बोझ उनकी माता दयावंती पर आ गया। दोनों बच्चों को मार्केट कमेटी सिरसा में हैड क्लर्क रहे चाचा हनुमान स्वामी ने संभाला। अपने बच्चों की तरह उनकी परवरिश की। गौरव आईटीआई सिरसा में कंट्रेक्टर बेस पर इंस्ट्रक्टर हैं।
पिता के सपने को पूरा करने के लिए चंद्रमोहन को कोटा भेजा। कुछ समय पहले आए आईआईटी के रिजल्ट में भी अच्छा रेंक प्राप्त करके चंद्रमोहन ने हुनर का परिचय दिया। इन दिनों वह नागपुर में ट्रेनिंग ले रहा था। जैसे ही यूपीएससी का रिजल्ट घोषित हुआ तो परीक्षा पास करने पर खुशी से झूम उठा। चंद्रमोहन ने अपने परिजनों को फोन करके बधाई दी। नागपुर से एक कॉल गांव रिसालियाखेड़ा में रह रहे ताऊ भाई प्रह्लाद के पास भी आई। पूरा परिवार खुशी से फूला नहीं समाया।
गांव के स्कूल में भी पढ़ा आईएएस टॉपर
चंद्रमोहन के ताऊ के लड़के प्रह्लाद के अनुसार चंद्रमोहन बचपन से ही इंटेलीजेंट है। जन्म के करीब सात-आठ साल गांव में बिताने के बाद वे सिरसा शिफ्ट हो गए। इससे पहले वह गांव के स्कूल में भी गया था।
रोहताश बुलाते हैं
आईएएस परीक्षा पास करने वाले चंद्रमोहन को पारिवारिक सदस्य रोहताश बुलाते हैं। प्रह्लाद के अनुसार आज से पहले गांव में उसका असली नाम कोई नहीं जानता था। सफलता मिलते ही गांव और जिला सिरसा का नाम रोशन किया है।