{"_id":"162dd344836c22ae9b3d1173f1014c6e","slug":"subhash-sudha-left-hand-sitting-on-lotus-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथ छोड़ कमल पर बैठे सुभाष सुधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथ छोड़ कमल पर बैठे सुभाष सुधा
राजेश शांडिल्य/ अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 23 Aug 2014 12:42 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सुभाष सुधा ने तीन दिन में कुरुक्षेत्र वासियों को तीन पोस्टर दिखा दिए। ये पोस्टर 18 अगस्त, 20 अगस्त और 22 अगस्त के हैं।
बता दें कि एक माह पहले तक सुभाष सुधा के पोस्टरों में कांग्रेस की छाप दिखती रही। कुछ दिन पहले इन पोस्टरों में कांग्रेस की छाप हटा दी गई।
इसमें स्वतंत्र चलने वाले किसी प्रत्याशी की तरह स्लोगन तथा सिर्फ सुधा की फोटो नजर आने लगी थी। ‘अमर उजाला’ ने सुधा के नगर में लगे पोस्टर, होर्डिंग, व्हाट्स अप और फेसबुक पर प्रचारित की जा रही सामग्री को भांपकर उनके पार्टी छोड़ने के साफ संकेत दिए थे। लेकिन पार्टी में बगावत को रोकने में एक दिग्गज कांग्रेसी ने भरसक प्रयास किए।
उन्होंने 18 अगस्त को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कुरुक्षेत्र आगमन के दौरान सुभाष सुधा को सीएम की गाड़ी में बिठाकर टिकट पर संशय को मिटाने का भी प्रयास किया था।
सीएम की गाड़ी में सुधा को लिफ्ट मिलने का असर दिखा कि अगले ही दिन उनकी नई प्रचार सामग्री तैयार हुई। नगर में बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए।
जिन पर मुख्यमंत्री हुड्डा, सांसद दीपेंद्र हुड्डा और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं और पार्टी प्रदेशाध्यक्ष के चेहरे अचानक सुधा के पोस्टरों में फिर से दिखाई पड़े।
विज्ञापन
रोचक पहलू है कि 22 अगस्त को चौथा परिवर्तन दिखा कि सुभाष सुधा कांग्रेस नहीं, बल्कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रामबिलास शर्मा, कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी एवं अन्य भाजपा दिग्गजों के साथ नए पोस्टरों पर अवतरित हुए। लाजिमी तौर पर ये पोस्टर कुरुक्षेत्र की राजनीतिक हलचल के लिए काफी था।
सुबह से ही कांग्रेस, भाजपा और इनेलो के नेता गुड़गांव में 22 अगस्त की सुबह शामिल हुए सुभाष सुधा की जानकारी मीडिया कर्मियों और सुधा समर्थकों से जुटाते दिखे।
सुधा का राजनीतिक कैरियर
1. 1995 में इनेलो ने सुधा को नगरपरिषद अध्यक्ष बनाया।
2. 2002 में सुधा ने इनेलो छोड़ी और कांग्रेस ज्वाइन की।
3. 2009 में सुधा ने कांग्रेस छोड़ी और थानेसर विधानसभा सीट से आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा।
4. 2010 में सुधा दोबारा कांग्रेस में शामिल हुए।
5. 2012 में हरियाणा वित्त आयोग का सदस्य बनाया गया।
6. 2014, अगस्त में सुधा ने कांग्रेस छोड़ी और गुड़गांव में भाजपा ज्वाइन की।
उम्मीदवार चयन कमेटी की बैठक थी गुड़गांव में
सुधा को ज्वाइन करने रणनीति तैयार करने वाले नेताओं ने सोची समझी तैयारी के तहत शुक्रवार को उन्हें गुड़गांव में भाजपा में शामिल किया।
बताया गया है कि गुड़गांव में भाजपा के उम्मीदवार चयन समिति की बैठक रखी थी। उल्लेखनीय है कि भाजपा में सुधा के निकटतम दिग्गज नेता उन्हें थानेसर विधानसभा सीट से टिकट दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। सुभाष को यहां से मजबूत उम्मीदवार बताया जा रहा है। क्योंकि कांग्रेस से बगावत कर आजाद चुनाव लड़ने पर सुधा को 2009 में करीब 17 हजार वोट हासिल हुए थे।
टिकट के दावेदारों में हलचल
भाजपा की टिकट पर नजर गड़ाए बैठे टिकट दावेदारों में सुधा के भाजपा में आने से जबरदस्त हलचल है। जिलाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच और दूसरे नेताओं के चेहरे उतरे हुए नजर आए।
डीडी-सुधा की राजनीतिक स्पर्धा
एक बार फिर जयभगवान शर्मा डीडी और सुभाष सुधा की राजनीतिक स्पर्धा एक ही दल में नजर आएगी। क्योंकि इससे पहले इन दोनों नेताओं की स्पर्धा इनेलो, कांग्रेस के बाद अब भाजपा में भी दिखने जा रही है।
ये दोनों ही भाजपा की टिकट के जुगाड़ में पूरा जोर लगा रहे हैं। हालांकि इस बार सुधा का पलड़ा थोड़ा भारी इसलिए भी दिखाई दे रहा है, क्योंकि संघ के कुछ लोग भी उनके साथ दिख रहे हैं।
विज्ञापन
बता दें कि एक माह पहले तक सुभाष सुधा के पोस्टरों में कांग्रेस की छाप दिखती रही। कुछ दिन पहले इन पोस्टरों में कांग्रेस की छाप हटा दी गई।
इसमें स्वतंत्र चलने वाले किसी प्रत्याशी की तरह स्लोगन तथा सिर्फ सुधा की फोटो नजर आने लगी थी। ‘अमर उजाला’ ने सुधा के नगर में लगे पोस्टर, होर्डिंग, व्हाट्स अप और फेसबुक पर प्रचारित की जा रही सामग्री को भांपकर उनके पार्टी छोड़ने के साफ संकेत दिए थे। लेकिन पार्टी में बगावत को रोकने में एक दिग्गज कांग्रेसी ने भरसक प्रयास किए।
उन्होंने 18 अगस्त को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कुरुक्षेत्र आगमन के दौरान सुभाष सुधा को सीएम की गाड़ी में बिठाकर टिकट पर संशय को मिटाने का भी प्रयास किया था।
विज्ञापन
सीएम की गाड़ी में सुधा को लिफ्ट मिलने का असर दिखा कि अगले ही दिन उनकी नई प्रचार सामग्री तैयार हुई। नगर में बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए।
जिन पर मुख्यमंत्री हुड्डा, सांसद दीपेंद्र हुड्डा और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं और पार्टी प्रदेशाध्यक्ष के चेहरे अचानक सुधा के पोस्टरों में फिर से दिखाई पड़े।
विज्ञापन
रोचक पहलू है कि 22 अगस्त को चौथा परिवर्तन दिखा कि सुभाष सुधा कांग्रेस नहीं, बल्कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रामबिलास शर्मा, कुरुक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी एवं अन्य भाजपा दिग्गजों के साथ नए पोस्टरों पर अवतरित हुए। लाजिमी तौर पर ये पोस्टर कुरुक्षेत्र की राजनीतिक हलचल के लिए काफी था।
सुबह से ही कांग्रेस, भाजपा और इनेलो के नेता गुड़गांव में 22 अगस्त की सुबह शामिल हुए सुभाष सुधा की जानकारी मीडिया कर्मियों और सुधा समर्थकों से जुटाते दिखे।
सुधा का राजनीतिक कैरियर
1. 1995 में इनेलो ने सुधा को नगरपरिषद अध्यक्ष बनाया।
2. 2002 में सुधा ने इनेलो छोड़ी और कांग्रेस ज्वाइन की।
3. 2009 में सुधा ने कांग्रेस छोड़ी और थानेसर विधानसभा सीट से आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा।
4. 2010 में सुधा दोबारा कांग्रेस में शामिल हुए।
5. 2012 में हरियाणा वित्त आयोग का सदस्य बनाया गया।
6. 2014, अगस्त में सुधा ने कांग्रेस छोड़ी और गुड़गांव में भाजपा ज्वाइन की।
उम्मीदवार चयन कमेटी की बैठक थी गुड़गांव में
सुधा को ज्वाइन करने रणनीति तैयार करने वाले नेताओं ने सोची समझी तैयारी के तहत शुक्रवार को उन्हें गुड़गांव में भाजपा में शामिल किया।
बताया गया है कि गुड़गांव में भाजपा के उम्मीदवार चयन समिति की बैठक रखी थी। उल्लेखनीय है कि भाजपा में सुधा के निकटतम दिग्गज नेता उन्हें थानेसर विधानसभा सीट से टिकट दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। सुभाष को यहां से मजबूत उम्मीदवार बताया जा रहा है। क्योंकि कांग्रेस से बगावत कर आजाद चुनाव लड़ने पर सुधा को 2009 में करीब 17 हजार वोट हासिल हुए थे।
टिकट के दावेदारों में हलचल
भाजपा की टिकट पर नजर गड़ाए बैठे टिकट दावेदारों में सुधा के भाजपा में आने से जबरदस्त हलचल है। जिलाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच और दूसरे नेताओं के चेहरे उतरे हुए नजर आए।
डीडी-सुधा की राजनीतिक स्पर्धा
एक बार फिर जयभगवान शर्मा डीडी और सुभाष सुधा की राजनीतिक स्पर्धा एक ही दल में नजर आएगी। क्योंकि इससे पहले इन दोनों नेताओं की स्पर्धा इनेलो, कांग्रेस के बाद अब भाजपा में भी दिखने जा रही है।
ये दोनों ही भाजपा की टिकट के जुगाड़ में पूरा जोर लगा रहे हैं। हालांकि इस बार सुधा का पलड़ा थोड़ा भारी इसलिए भी दिखाई दे रहा है, क्योंकि संघ के कुछ लोग भी उनके साथ दिख रहे हैं।