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सुभाष चावला के इस्तीफा से कांग्रेस में मची खलबली
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चंडीगढ़। नगर निगम चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन और उसके बाद से नेताओं व कार्यकर्ताओं के पार्टी छोड़ने से दुखी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चावला ने शनिवार को पद से इस्तीफा दे दिया। चावला पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं और दो बार शहर के मेयर रह चुके हैं। उनके इस्तीफे से कांग्रेस में खलबली मच गई है। इस्तीफे के बाद चावला ने कहा कि कुछ दिनों बाद प्रेसवार्ता कर अपनी बात सबके सामने रखूंगा। उधर, चावला के इस्तीफे के बाद अब नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए जोड़तोड़ शुरू होने की संभावना है।
प्रदीप छाबड़ा को हटाने के बाद आठ फरवरी 2021 को सुभाष चावला को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस दौरान लगातार टकराव के बाद प्रदीप छाबड़ा ने कांग्रेस छोड़ आम आदमी पार्टी की सदस्यता ले ली। उनके समर्थक भी आप में चले गए। इसी बीच नगर निगम चुनाव आ गया। यहां उम्मीद थी कि कांग्रेस कुछ बेहतर प्रदर्शन करेगी लेकिन टिकट न मिलने से नाराज शीला फूल सिंह और शशिशंकर तिवारी ने भी कांग्रेस छोड़ दी।
पार्टी के अंदर विरोधियों के स्वर तेज हुए तो 35 में से कांग्रेस के खाते में मात्र 8 सीटें ही आ सकीं। उसके बाद पार्टी में विरोध के स्वर और तेज हो गए। नीचे स्तर पर भी कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर जाने लगे। इसके बाद पूर्व पार्षद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता देवेंद्र सिंह बबला भी अपनी पत्नी व नवनिर्वाचित पार्षद हरप्रीत कौर बबला के साथ भाजपा में चले गए। इससे कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। कुछ दिन पहले एक और पार्षद गुरुचरण सिंह काला समेत कई कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हो गए। कांग्रेस के लगातार कमजोर होने से चावला दुखी थे और अंत में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उधर, इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
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जल्द होंगे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव
कांग्रेस में जल्द ही ब्लॉक स्तर से लेकर अखिल भारतीय स्तर तक के चुनाव होने हैं। चंडीगढ़ कांग्रेस के ब्लॉक स्तर के अध्यक्षों के चुनाव के बाद जुलाई में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होगा। ऐसे में सुभाष चावला के इस्तीफा से पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी सकते में हैं। सुभाष चावला पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल के करीबी माने जाते हैं। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष वही होगा, जिसके सिर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल हाथ रखेंगे।
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मनीष तिवारी भी चंडीगढ़ में सक्रिय
उधर, पंजाब के आनंदपुर साहिब से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी भी चंडीगढ़ में लगातार सक्रियता दिखा रहे हैं। अपने समर्थकों के छोटे से छोटे कार्यक्रम में वह शामिल हो रहे हैं और राज्यसभा में चंडीगढ़ के मुद्दों को जोरशोर से उठा रहे हैं। ऐसे में चंडीगढ़ में कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति आसान नहीं होगी।
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प्रदीप छाबड़ा को हटाने के बाद आठ फरवरी 2021 को सुभाष चावला को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस दौरान लगातार टकराव के बाद प्रदीप छाबड़ा ने कांग्रेस छोड़ आम आदमी पार्टी की सदस्यता ले ली। उनके समर्थक भी आप में चले गए। इसी बीच नगर निगम चुनाव आ गया। यहां उम्मीद थी कि कांग्रेस कुछ बेहतर प्रदर्शन करेगी लेकिन टिकट न मिलने से नाराज शीला फूल सिंह और शशिशंकर तिवारी ने भी कांग्रेस छोड़ दी।
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पार्टी के अंदर विरोधियों के स्वर तेज हुए तो 35 में से कांग्रेस के खाते में मात्र 8 सीटें ही आ सकीं। उसके बाद पार्टी में विरोध के स्वर और तेज हो गए। नीचे स्तर पर भी कार्यकर्ता पार्टी छोड़कर जाने लगे। इसके बाद पूर्व पार्षद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता देवेंद्र सिंह बबला भी अपनी पत्नी व नवनिर्वाचित पार्षद हरप्रीत कौर बबला के साथ भाजपा में चले गए। इससे कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। कुछ दिन पहले एक और पार्षद गुरुचरण सिंह काला समेत कई कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हो गए। कांग्रेस के लगातार कमजोर होने से चावला दुखी थे और अंत में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उधर, इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
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जल्द होंगे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव
कांग्रेस में जल्द ही ब्लॉक स्तर से लेकर अखिल भारतीय स्तर तक के चुनाव होने हैं। चंडीगढ़ कांग्रेस के ब्लॉक स्तर के अध्यक्षों के चुनाव के बाद जुलाई में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होगा। ऐसे में सुभाष चावला के इस्तीफा से पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी सकते में हैं। सुभाष चावला पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल के करीबी माने जाते हैं। कांग्रेस सूत्रों की मानें तो प्रदेश कांग्रेस का नया अध्यक्ष वही होगा, जिसके सिर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल हाथ रखेंगे।
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मनीष तिवारी भी चंडीगढ़ में सक्रिय
उधर, पंजाब के आनंदपुर साहिब से कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी भी चंडीगढ़ में लगातार सक्रियता दिखा रहे हैं। अपने समर्थकों के छोटे से छोटे कार्यक्रम में वह शामिल हो रहे हैं और राज्यसभा में चंडीगढ़ के मुद्दों को जोरशोर से उठा रहे हैं। ऐसे में चंडीगढ़ में कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति आसान नहीं होगी।