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सुभाष चंद्रा को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 24 Mar 2017 09:27 AM IST
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सुभाष चंद्रा
- फोटो : File Photo
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सभा चुनाव में सुभाष चंद्रा की जीत को चुनौती देने वाली वरिष्ठ अधिवक्ता आर के आनंद की याचिका को खारिज कर दिया है। इसके लिए सुभाष चंद्रा द्वारा दाखिल अर्जी को आधार बनाया गया और अर्जी को मंजूरी मिलने के चलते ही याचिका खारिज हुई।
दरअसल अर्जी में चंद्रा ने कहा था कि चुनाव याचिका में आवश्यक तकनीकी नियम की पालना नहीं की गई और ऐसे में फार्मेट 25 ए के अधूरे होने के चलते इस याचिका को खारिज किया जाए। हाईकोर्ट ने इस कानूनी आधार पर चंद्रा की अर्जी मंजूर करते हुए उनके खिलाफ याचिका खारिज कर दी। याचिका के खारिज होने के साथ ही सुभाष चंद्रा के राज्यसभा सांसद पद पर लगा सवालिया निशान भी हट गया है।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आरके आनंद ने याचिका दाखिल करते हुए सुभाष चंद्रा के निर्वाचन को चुनौती दी थी। याचिका में आनंद ने कहा था कि सुभाष चंद्र की जीत एक साजिश का नतीजा है। साजिश के चलते ही चुनाव प्रक्त्रिस्या के दौरान वह पेन बदल दिया गया था जिस पैन से वोटिंग की जानी थी। पैन बदले जाने के कारण वोट अमान्य हो गई। आनंद ने कहा कि यदि स्याही विवाद नहीं होता तो जो वोट रद्द हो गई थी वह उनके पक्ष में पढ़ती और विजय उनकी होती। वोट अमान्य होने के कारण ही सुभाष चंद्र को जीत मिल गई। याची ने कहा कि पेन ऐसे ही नहीं बदल गया बल्कि यह पूर्व नियोजित तरीके से बदला गया था।
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दरअसल अर्जी में चंद्रा ने कहा था कि चुनाव याचिका में आवश्यक तकनीकी नियम की पालना नहीं की गई और ऐसे में फार्मेट 25 ए के अधूरे होने के चलते इस याचिका को खारिज किया जाए। हाईकोर्ट ने इस कानूनी आधार पर चंद्रा की अर्जी मंजूर करते हुए उनके खिलाफ याचिका खारिज कर दी। याचिका के खारिज होने के साथ ही सुभाष चंद्रा के राज्यसभा सांसद पद पर लगा सवालिया निशान भी हट गया है।
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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आरके आनंद ने याचिका दाखिल करते हुए सुभाष चंद्रा के निर्वाचन को चुनौती दी थी। याचिका में आनंद ने कहा था कि सुभाष चंद्र की जीत एक साजिश का नतीजा है। साजिश के चलते ही चुनाव प्रक्त्रिस्या के दौरान वह पेन बदल दिया गया था जिस पैन से वोटिंग की जानी थी। पैन बदले जाने के कारण वोट अमान्य हो गई। आनंद ने कहा कि यदि स्याही विवाद नहीं होता तो जो वोट रद्द हो गई थी वह उनके पक्ष में पढ़ती और विजय उनकी होती। वोट अमान्य होने के कारण ही सुभाष चंद्र को जीत मिल गई। याची ने कहा कि पेन ऐसे ही नहीं बदल गया बल्कि यह पूर्व नियोजित तरीके से बदला गया था।
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सुभाष चंद्रा की अर्जी मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने आनंद की याचिका की खारिज
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
- फोटो : File Photo
याचिकाकर्ता की अपील की थी कि इस चुनाव को रद्द करते हुए नए सिरे से चुनाव करवाया जाए। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने सुभाष चंद्र सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
याचिका पर सुनवाई के दौर में सुभाष चंद्रा ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दाखिल की और इसके माध्यम से उनके खिलाफ दाखिल हुई चुनाव याचिका को गलत करार दिया। चंद्रा ने अर्जी में कहा था कि चुनाव याचिका दाखिल करने के लिए निर्धारित नियम है जिसके तहत फॉर्मेट 25 ए के तहत इसे दाखिल किया जाना अनिवार्य है।
फॉर्मेट 25ए में आरोपों के उल्लेख के अभाव में इस प्रकार की याचिका औचित्य विहीन हो जाती है और इस नियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न जजमेंट भी मौजूद हैं। अर्जी पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था।
वीरवार को अर्जी पर अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने सुभाष चंद्र की दलील को स्वीकार कर लिया। सुभाष चंद्रा की दलील और उनकी अर्जी को स्वीकृति मिलने के साथ ही हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका खारिज कर दी।
याचिका पर सुनवाई के दौर में सुभाष चंद्रा ने हाईकोर्ट में एक अर्जी दाखिल की और इसके माध्यम से उनके खिलाफ दाखिल हुई चुनाव याचिका को गलत करार दिया। चंद्रा ने अर्जी में कहा था कि चुनाव याचिका दाखिल करने के लिए निर्धारित नियम है जिसके तहत फॉर्मेट 25 ए के तहत इसे दाखिल किया जाना अनिवार्य है।
फॉर्मेट 25ए में आरोपों के उल्लेख के अभाव में इस प्रकार की याचिका औचित्य विहीन हो जाती है और इस नियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न जजमेंट भी मौजूद हैं। अर्जी पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था।
वीरवार को अर्जी पर अपना फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने सुभाष चंद्र की दलील को स्वीकार कर लिया। सुभाष चंद्रा की दलील और उनकी अर्जी को स्वीकृति मिलने के साथ ही हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका खारिज कर दी।