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आओ करिअर संवारें: पर्यावरण विषय में एमए करें और हर क्षेत्र में नौकरी पाएं, दुनिया भी संवेरगी
Sun, 23 Feb 2020 12:44 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 23 Feb 2020 12:44 PM IST
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पर्यावरण से हर कोई जुड़ा है। इसका क्षेत्र विशाल है और लगातार विस्तार होता जा रहा है। हर क्षेत्र में पर्यावरण से शिक्षा पाने वाले पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों को नौकरी के लिए ढूंढा जा रहा है। यानी विद्यार्थियों की संख्या इस क्षेत्र में कम हैं और नौकरी के अवसर अधिक। पीयू का पर्यावरण अध्ययन विभाग एमएससी करा रहा है। यहां से पास आउट विद्यार्थी देश दुनिया में कई बड़े पदों पर नौकरी कर रहे हैं। पीयू का पर्यावरण अध्ययन विभाग वर्ष 2004 में स्थापित हुआ।
शुरुआत से ही इस विभाग से एमएससी करने वाले लाइन लंबी है। अब समस्या और विकराल हो गई है। यहां एडमिशन लेने के लिए मेरिट में आना पड़ता है। इसके लिए बाकायदा एंट्रेंस टेस्ट होता है। स्नातक विद्यार्थी इसमें दाखिले के लिए आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा की तिथि और समय पीयू ही तय करता है। एनवायरमेंट साइंस में एमएससी के लिए यहां 25 सीटें हैं। पिछले साल 160 से अधिक आवेदन मिले थे। इस बार यह आंकड़ा 200 के पार जाता नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी विद्यार्थी का दाखिला इस विभाग में हो गया तो उसकी नौकरी भी पक्की है। यहां के विद्यार्थी विदेशों में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, नगर निगम, एनजीओ, पीजीआई, इंडस्ट्री आदि में यहां के पास आउट विद्यार्थी नौकरी कर रहे हैं। वेतन की शुरुआत भी इस क्षेत्र में अच्छी है। तमाम इंडस्ट्री ऐसी हैं जिनको पर्यावरण के विशेषज्ञ मिल ही नहीं पा रहे हैं।
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जानकारों का कहना है कि रोजगार का संकट भले ही देश-विदेश में हो लेकिन पर्यावरण अध्ययन से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी खाली नहीं बैठते। उनके लिए हर जगह काम है।
पर्यावरण का क्षेत्र बहुत बड़ा है। यदि एनवायरमेंट साइंस से विद्यार्थी एमएससी कर लेते हैं तो उनके लिए हर क्षेत्र में नौकरी के अवसर हैं। विभाग में सीटों की संख्या से 10 गुना तक आवेदन आते हैं। प्रवेश परीक्षा के जरिये चयन होता है।
- डॉ. सुमन मोर, विभागाध्यक्ष, पर्यावरण अध्ययन विभाग पीयू
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शुरुआत से ही इस विभाग से एमएससी करने वाले लाइन लंबी है। अब समस्या और विकराल हो गई है। यहां एडमिशन लेने के लिए मेरिट में आना पड़ता है। इसके लिए बाकायदा एंट्रेंस टेस्ट होता है। स्नातक विद्यार्थी इसमें दाखिले के लिए आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा की तिथि और समय पीयू ही तय करता है। एनवायरमेंट साइंस में एमएससी के लिए यहां 25 सीटें हैं। पिछले साल 160 से अधिक आवेदन मिले थे। इस बार यह आंकड़ा 200 के पार जाता नजर आ रहा है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी विद्यार्थी का दाखिला इस विभाग में हो गया तो उसकी नौकरी भी पक्की है। यहां के विद्यार्थी विदेशों में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, नगर निगम, एनजीओ, पीजीआई, इंडस्ट्री आदि में यहां के पास आउट विद्यार्थी नौकरी कर रहे हैं। वेतन की शुरुआत भी इस क्षेत्र में अच्छी है। तमाम इंडस्ट्री ऐसी हैं जिनको पर्यावरण के विशेषज्ञ मिल ही नहीं पा रहे हैं।
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जानकारों का कहना है कि रोजगार का संकट भले ही देश-विदेश में हो लेकिन पर्यावरण अध्ययन से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी खाली नहीं बैठते। उनके लिए हर जगह काम है।
पर्यावरण का क्षेत्र बहुत बड़ा है। यदि एनवायरमेंट साइंस से विद्यार्थी एमएससी कर लेते हैं तो उनके लिए हर क्षेत्र में नौकरी के अवसर हैं। विभाग में सीटों की संख्या से 10 गुना तक आवेदन आते हैं। प्रवेश परीक्षा के जरिये चयन होता है।
- डॉ. सुमन मोर, विभागाध्यक्ष, पर्यावरण अध्ययन विभाग पीयू